Rewa collector; रीवा कलेक्ट्रेट में गूंजा ‘सियावर रामचंद्र की जय’, 90 साल के बुजुर्ग ने लुटाया आशीर्वाद

Rewa collector; रीवा की जनसुनवाई में दिखा मानवता का अनूठा चेहरा: जब कलेक्टर की संवेदनशीलता देख निहाल हुए 90 वर्षीय बुजुर्ग जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में आयोजित होने वाली जनसुनवाई आमतौर पर शिकायतों, आवेदनों और प्रशासनिक तल्खी के लिए जानी जाती है। दूर-दराज के गांवों से आए फरियादी अपनी समस्याओं को लेकर चिंतित चेहरे के साथ लाइन में खड़े नजर आते हैं, लेकिन बीते दिनों रीवा कलेक्ट्रेट का नजारा कुछ बदला-बदला सा था। यहां एक ऐसी घटना घटी जिसने न केवल वहां मौजूद लोगों का दिल जीत लिया, बल्कि यह संदेश भी दिया कि प्रशासन सिर्फ फाइलों से नहीं, बल्कि भावनाओं और संवेदनशीलता से भी चलता है।
मामला उस समय का है जब जनसुनवाई के दौरान अपनी फरियाद लेकर 90 साल के एक बुजुर्ग कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। झुर्रियों से भरे चेहरे और कांपते हाथों में उम्मीद की एक अर्जी लिए यह बुजुर्ग जब कलेक्टर के सामने पहुंचे, तो नजारा देखने लायक था। अक्सर देखा जाता है कि बड़े कार्यालयों में बुजुर्गों को अपनी बात कहने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ता है, लेकिन रीवा कलेक्टर ने जिस विनम्रता और आत्मीयता के साथ इन बाबा की बात सुनी, उसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को प्रभावित किया।
जैसे ही कलेक्टर ने बुजुर्ग की समस्या का समाधान करने का भरोसा दिलाया और उनके प्रति सम्मान प्रकट किया, बाबा भावविभोर हो गए। उनकी आंखों में खुशी के आंसू थे और जुबां पर दुआएं। खुशी के इसी अतिरेक में बुजुर्ग ने कलेक्ट्रेट के भरे सभाकक्ष में हाथ उठाकर पूरी ऊर्जा के साथ सियावर रामचंद्र की जय के नारे लगाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते पूरा कार्यालय इस जयघोष से गूंज उठा। यह महज एक धार्मिक नारा नहीं था, बल्कि एक पीड़ित व्यक्ति का उस व्यवस्था के प्रति आभार था, जिसने उसे न्याय का भरोसा दिलाया था।
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जिले की जनता का कहना है कि रीवा को पहले कभी ऐसे संवेदनशील कलेक्टर नहीं मिले। लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि वर्तमान कलेक्टर न केवल प्रशासनिक कार्यों में दक्ष हैं, बल्कि उनके भीतर आम आदमी के प्रति अपार सहानुभूति भी है। अक्सर प्रशासनिक अधिकारी अपनी मर्यादा और पद की गरिमा के नाम पर जनता से दूरी बनाकर रखते हैं, लेकिन यहां कलेक्टर ने उस दूरी को पाट दिया। बुजुर्ग के साथ उनकी बातचीत का तरीका किसी अधिकारी और फरियादी जैसा नहीं, बल्कि एक पोते और दादा या एक सुशिक्षित नागरिक और सम्मानीय बुजुर्ग जैसा था।
आज के दौर में जब सरकारी दफ्तरों को लेकर आम जनता के मन में डर और संशय का माहौल रहता है, तब रीवा कलेक्ट्रेट से आई यह तस्वीर लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करती है। हर जिले को आज ऐसे ही नेतृत्व की आवश्यकता है जो सिर्फ आदेश पारित न करे, बल्कि जनता के दुख-दर्द को खुद महसूस कर सके। जनसुनवाई में पहुंचे अन्य लोग भी इस पल के साक्षी बने और उन्होंने कलेक्टर की कार्यशैली की जमकर सराहना की।
सोशल मीडिया पर भी वीडियो तेजी से प्रसारित हो रहा है। वीडियो में बुजुर्ग की खुशी और कलेक्टर की शालीनता साफ नजर आ रही है। लोग इस वीडियो पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिख रहे हैं कि यदि हर जिले के अधिकारी इसी तरह जनता से जुड़ाव महसूस करें, तो किसी भी व्यक्ति को न्याय के लिए दर-दर नहीं भटकना पड़ेगा। बुजुर्ग द्वारा लगाया गया जयकारा इस बात का प्रमाण है कि जब प्रशासन जनता के द्वार तक पहुंचता है या उनकी बात सुनता है, तो जनता भी उसे अपना मानकर दिल खोलकर आशीर्वाद देती है।
जनसुनवाई में दिखा प्रशासन का मानवीय चेहरा, कलेक्टर ने वृद्ध को तत्काल उपलब्ध कराई सुनने की मशीन
जिला कलेक्ट्रेट में मंगलवार को आयोजित साप्ताहिक जनसुनवाई के दौरान एक भावुक और मानवीय दृश्य देखने को मिला। अपनी फरियाद लेकर पहुंचे एक बुजुर्ग की समस्या का समाधान कलेक्टर ने न केवल तत्काल किया, बल्कि मौके पर ही उन्हें बड़ी राहत पहुंचाई।
जानकारी के अनुसार, जनसुनवाई में पहुंचे एक वृद्ध ने कलेक्टर के समक्ष अपनी सुनने की समस्या रखी। उन्होंने बताया कि कम सुनाई देने के कारण उन्हें दैनिक जीवन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। वृद्ध की परेशानी को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने संवेदनशीलता दिखाई और बिना समय गंवाए तत्काल मौके पर ही श्रवण यंत्र (सुनने की मशीन) मंगवाकर उन्हें उपलब्ध कराई।
गीत गाकर जताया आभार
जैसे ही बुजुर्ग को मशीन लगाई गई और उन्हें स्पष्ट सुनाई देने लगा, वे भावुक हो गए। उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। उन्होंने अपनी प्रसन्नता व्यक्त करने के लिए गीत की पंक्तियों का सहारा लिया और कहा, “बिन मांगे सब मिले, मांगे मिले भीख।” बुजुर्ग ने जिला प्रशासन और कलेक्टर की कार्यशैली की जमकर सराहना की और खुशी से जय-जयकार लगाई।
प्रशासन की पहल की सराहना
जनसुनवाई में मौजूद अन्य फरियादियों और नागरिकों ने भी प्रशासन की इस त्वरित कार्यवाही की सराहना की। उपस्थित लोगों का कहना था कि प्रशासन की ऐसी संवेदनशीलता आमजन का भरोसा मजबूत करती है। मौके पर मौजूद अधिकारियों ने बुजुर्ग को सम्मान के साथ जलपान भी कराया। प्रशासन की इस त्वरित कार्यवाही ने स्पष्ट संदेश दिया है कि पीड़ित और जरूरतमंदों की समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ तत्पर है।
रीवा जिले के लिए यह गर्व का विषय है कि यहां का प्रशासन मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता दे रहा है। कलेक्ट्रेट परिसर में गूंजा वह जयकारा आने वाले समय में अन्य अधिकारियों के लिए भी प्रेरणा बनेगा कि वे पद की शक्ति का उपयोग पीड़ितों के चेहरे पर मुस्कान लाने के लिए करें। रीवा की जनता की यह तारीफ और बुजुर्ग का वह निस्वार्थ आशीर्वाद निश्चित रूप से जिले के विकास और प्रशासनिक साख को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह घटना बताती है कि न्याय सिर्फ कागजों पर नहीं होता, बल्कि वह विश्वास में झलकता है, जो उस दिन उस 90 साल के बुजुर्ग की आंखों में साफ दिखाई दे रहा था।
