Reel viral; पुलिस की रीलबाज मैडम का सोशल मीडिया पर ‘तहलका’, जनता परेशान, रीलबाजी के आगे खाकी की जिम्मेदारी हुई फेल!

Share With Others

Reel viral; बाबा महाकाल की पावन नगरी उज्जैन से इन दिनों एक ऐसा मामला सामने आ रहा है जिसने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मध्य प्रदेश पुलिस का आधिकारिक ध्येय वाक्य देशभक्ति और जनसेवा है, जिसका अर्थ है कि पुलिस का हर जवान जनता की सुरक्षा और समाज में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए समर्पित रहेगा। लेकिन सोशल मीडिया के इस आधुनिक दौर में ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ पुलिसकर्मियों के लिए यह ध्येय वाक्य अब सिर्फ इंस्टाग्राम रील्स के व्यूज, लाइक्स और फॉलोअर्स तक ही सीमित होकर रह गया है। उज्जैन जिले में तैनात एक महिला पुलिसकर्मी इन दिनों अपनी ऑन-ड्यूटी जिम्मेदारियों को निभाने से ज्यादा सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड करने को लेकर सुर्खियों और विवादों के केंद्र में आ गई हैं।

सोशल मीडिया की चकाचौंध में खोई यह महिला पुलिसकर्मी काम में भले ही उतनी सक्रिय न दिखती हों, लेकिन रील बाजी के मामले में उन्होंने इंटरनेट पर पूरी तरह से धूम मचा रखी है। पुलिस विभाग एक बेहद ही संवेदनशील और अनुशासित संगठन माना जाता है, जहाँ हर कर्मचारी के कंधों पर समाज को सुरक्षित रखने का एक बहुत बड़ा दायित्व होता है। ऐसे में जब कोई कर्मचारी इस जिम्मेदारी को भूलकर केवल कैमरे के सामने अपनी कला का प्रदर्शन करने में व्यस्त हो जाए, तो जनता के बीच व्यवस्था के प्रति अविश्वास की भावना पनपने लगती है। पिछले कुछ समय से आम नागरिकों और मीडिया द्वारा इन गतिविधियों को लगातार नोट किया जा रहा है, जिससे विभाग की छवि पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

See also  Rewa news:माननीय कलेक्टर महोदय प्रतिभा पाल जी कोटेदार के द्वारा गरीबों को हक, घपला करने की खबर चलने के बावजूद कार्यवाही शून्य...

Reel viral; कॉप अंजलि के नाम से सोशल मीडिया पर मचा तहलका और जनता की नाराजगी

इंस्टाग्राम पर कॉप अंजलि के नाम से संचालित एक अकाउंट इन दिनों चर्चा का मुख्य विषय बना हुआ है। इस अकाउंट पर अपलोड किए गए वीडियो को देखकर साफ पता चलता है कि मैडम का पूरा ध्यान खाकी वर्दी की गरिमा बनाए रखने के बजाय खुद को एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर के रूप में स्थापित करने पर है। पिछले कुछ दिनों से लगातार जागरूक नागरिकों द्वारा इस अकाउंट की गतिविधियों को बहुत बारीकी से वॉच किया जा रहा है। इन वीडियो में कभी महिला पुलिसकर्मी फिल्मी गानों पर स्लो-मोशन में वॉक करती नजर आती हैं, तो कभी ड्यूटी के दौरान ही विभिन्न प्रकार के पोज देकर वीडियो शूट करवाती दिखाई देती हैं।

हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें

जब पुलिस जैसी अत्यंत जिम्मेदार और महत्वपूर्ण नौकरी में तैनात कोई कर्मचारी अपना मुख्य समय रील बनाने में व्यतीत करने लगे, तो आम जनता का परेशान होना और सवाल उठाना पूरी तरह से स्वाभाविक है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी थानों या चौकियों पर किसी शिकायत को लेकर जाया जाता है, तो अक्सर स्टाफ की कमी या व्यस्तता का हवाला दिया जाता है। लेकिन दूसरी तरफ उसी स्टाफ के सदस्य ऑन-ड्यूटी घंटों समय निकालकर शानदार एडिटिंग के साथ सोशल मीडिया पर वीडियो अपलोड कर रहे होते हैं। यह विरोधाभास आम नागरिकों के मन में पुलिस प्रशासन के प्रति असंतोष को जन्म दे रहा है।

See also  रीवा–भोपाल रूट के यात्रियों को बड़ी राहत: रेवांचल एक्सप्रेस में बढ़ेंगे जनरल कोच, शुरू होगी सस्ती AC 3-इकोनॉमी सुविधा

 Reel viral; खाकी वर्दी की मर्यादा और सरकारी गाइडलाइंस का सरेआम उल्लंघन

पुल‍िस की वर्दी केवल एक साधारण कपड़ा नहीं है, बल्कि यह देश के कानून, अनुशासन, त्याग और आम जनता के अटूट भरोसे का सबसे बड़ा प्रतीक है। जब कोई अधिकारी या कर्मचारी ऑन-ड्यूटी रहते हुए, सरकारी दफ्तरों के भीतर या कानून व्यवस्था की ड्यूटी के दौरान रील बनाने को प्राथमिकता देता है, तो वह सीधे तौर पर वर्दी की गरिमा को तार-तार करता है। मध्य प्रदेश पुलिस मुख्यालय द्वारा समय-समय पर सोशल मीडिया के उपयोग को लेकर बेहद सख्त गाइडलाइंस जारी की जाती हैं। इन नियमों में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी पुलिसकर्मी ड्यूटी के दौरान या वर्दी पहनकर ऐसी कोई रील या वीडियो नहीं बनाएगा जिससे विभाग की छवि पर विपरीत असर पड़े।

इसके बावजूद उज्जैन की इस महिला पुलिसकर्मी द्वारा लगातार नियमों को ताक पर रखकर वीडियो बनाना जारी है, जो सीधे तौर पर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। वर्दी पहनकर रील बनाने का यह शौक न केवल व्यक्तिगत स्तर पर बल्कि पूरे संगठन के स्तर पर अनुशासन की धज्जियां उड़ाता है। पुलिस सेवा में आने का मुख्य उद्देश्य आत्म-प्रचार नहीं बल्कि जन-सेवा होना चाहिए। जब प्राथमिकताओं का यह चक्र बदल जाता है, तो कानून व्यवस्था की नींव हिलने लगती है। इस प्रकार की अनुशासनहीनता अन्य पुलिसकर्मियों को भी गलत दिशा में जाने के लिए प्रेरित करती है, जिससे पूरे महकमे में एक गलत संदेश जाता है।

See also  MPPSC परीक्षा 26 अप्रैल को: त्रिस्तरीय जांच अनिवार्य, 90 मिनट पहले पहुंचना होगा केंद्र, प्रशासन ने जारी किए सख्त निर्देश

Reel viral; क्या उज्जैन के पुलिस कप्तान ने अपने स्टाफ को रीलबाजी के लिए फ्री हैंड दे दिया है

इस पूरे मामले के सार्वजनिक होने के बाद अब जिले के नागरिकों के मन में कई गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जनता सीधे तौर पर उज्जैन के पुलिस कप्तान से यह जवाब मांग रही है कि क्या उन्होंने अपने स्टाफ को ड्यूटी के समय रीलबाजी करने के लिए पूरी छूट यानी फ्री हैंड दे दिया है? अगर पुलिस मुख्यालय के नियम इतने सख्त हैं, तो फिर इन रीलबाज मैडम के खिलाफ अब तक किसी प्रकार की अनुशासनात्मक या दंडात्मक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? समाज में कानून का डर पैदा करने वाली पुलिस खुद अनुशासन के दायरे से बाहर होती दिख रही है।
अगर देशभक्ति और जनसेवा का जज्बा सिर्फ रील बनाने और इंटरनेट पर लोकप्रियता हासिल करने तक ही सीमित हो जाएगा, तो समाज के पीड़ित और लाचार लोगों की सुनवाई कौन करेगा?

Leave a Comment