Rewa news; सरकार द्वारा चलाई जा रही जनकल्याणकारी योजनाओं में जमीनी स्तर पर किस तरह की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, इसका एक ताजा उदाहरण रीवा जिले के कलेक्टर कार्यालय में देखने को मिला। मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में एक पीड़ित युवक नीरज मिश्रा ने अपने जॉब कार्ड में हुई धोखाधड़ी और उसके कारण प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ न मिल पाने की शिकायत दर्ज कराई है।
रीवा जिले की त्योंथर तहसील के ग्राम पंचायत पंछा, पोस्ट सोहागी के रहने वाले नीरज मिश्रा ने बताया कि पिछले 3 वर्षों से उनका नाम प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची में शामिल है। लेकिन जब हाल ही में उनके आवास का रजिस्ट्रेशन और जियो-टैगिंग (जॉब कार्ड नंबर फीडिंग) की प्रक्रिया शुरू हुई, तो उन्हें पता चला कि उनके जॉब कार्ड नंबर पर पहले से ही किसी अन्य व्यक्ति के नाम से आवास स्वीकृत कर राशि निकाल ली गई है।
पीड़ित नीरज मिश्रा ने मीडिया के सामने दस्तावेज दिखाते हुए कहा:
जब मैंने पंचायत से अपना जॉब कार्ड नंबर लेकर उसकी जांच करवाई, तो देखा कि मेरे जॉब कार्ड में किसी अन्य व्यक्ति का नाम जोड़ दिया गया है, जो कि मेरे परिवार का सदस्य भी नहीं है। रोजगार सहायक या अन्य कर्मचारियों की लापरवाही के कारण ऐसा हुआ है।”
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8 से 10 अन्य ग्रामीण भी हैं पीड़ित
नीरज मिश्रा का आरोप है कि यह गड़बड़ी सिर्फ उनके साथ नहीं हुई है, बल्कि उनके गांव के लगभग 8 से 10 अन्य लोगों के जॉब कार्ड में भी इसी तरह की हेराफेरी की गई है। उन्होंने कहा कि गांव में जो लोग वास्तव में पात्र हैं, वे आज भी आवास के लिए भटक रहे हैं, जबकि अपात्र लोगों को गलत तरीके से लाभ पहुंचाया जा रहा है।
भोपाल स्तर पर अटका मामला
पीड़ित के अनुसार, जब उन्होंने इस बात की शिकायत जनपद पंचायत त्योंथर के सीईओ से की, तो उन्हें बताया गया कि जॉब कार्ड में सुधार के लिए मामला भोपाल (मुख्यालय) भेजा गया है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक वहां से पोर्टल पर सुधार नहीं होगा, तब तक उन्हें आवास का लाभ नहीं मिल पाएगा।
कलेक्टर ने दिया जांच का आश्वासन
त्योंथर जनपद स्तर पर कोई सुनवाई न होने के बाद, नीरज मिश्रा ने रीवा कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर जनसुनवाई में अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित से मुलाकात के बाद कलेक्टर ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उचित जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
पीड़ित ने मीडिया के माध्यम से मांग की है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की जाए ताकि गरीब और पात्र ग्रामीणों को उनका हक मिल सके
