Rewa News; रीवा कलेक्टर का ये अंदाज़ देख लोग हैरान, जमीन पर बैठकर सुनी गांव वालों की बातें
Rewa News today; नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। हाल ही में अपने सख्त प्रशासनिक रवैये को लेकर सुर्खियों में रहे रीवा कलेक्टर का अब एक अलग और मानवीय पक्ष सामने आया है। जिले के सकरवट गांव में आयोजित ग्राम चौपाल के दौरान कलेक्टर जमीन पर बैठकर ग्रामीणों से सीधे संवाद करते नजर आए। इस दौरान उन्होंने गांव के लोगों की समस्याएं ध्यान से सुनीं और उनके समाधान का आश्वासन भी दिया।
कलेक्टर के इस बदले हुए अंदाज़ का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। लोग इसे प्रशासन और आम जनता के बीच संवाद बढ़ाने की सकारात्मक पहल बता रहे हैं। खास बात यह है कि यह वीडियो ऐसे समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारियों ने कलेक्टर के खिलाफ नाराजगी जताई थी और उन पर अत्यधिक सख्ती बरतने के आरोप लगाए थे।
सकरवट गांव में लगी ग्राम चौपाल
रीवा जिले के सकरवट गांव में आयोजित ग्राम चौपाल में कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने गांव के बीच पहुंचकर लोगों से सीधे बातचीत की। आमतौर पर प्रशासनिक बैठकों में अधिकारियों के लिए अलग व्यवस्था होती है, लेकिन यहां कलेक्टर ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठे नजर आए।
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गांव के बुजुर्ग, महिलाएं और युवा अपनी-अपनी समस्याएं लेकर चौपाल में पहुंचे थे। किसी ने सड़क की समस्या बताई, तो किसी ने पेयजल, राशन और बिजली से जुड़ी परेशानियां सामने रखीं। ग्रामीणों ने बताया कि लंबे समय बाद किसी वरिष्ठ अधिकारी ने गांव में बैठकर इतनी सहजता से उनकी बातें सुनीं।
चौपाल के दौरान कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को समस्याओं के त्वरित निराकरण के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है और इसके लिए जमीनी स्तर पर संवाद जरूरी है।
सख्त छवि के बीच नरम व्यवहार की चर्चा
रीवा कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी पिछले कुछ समय से जिले में अपनी कार्यशैली को लेकर लगातार चर्चा में रहे हैं। प्रशासनिक बैठकों में अनुशासन और समयबद्ध काम को लेकर उनका सख्त रवैया कई बार सामने आ चुका है।
हाल ही में ग्रामीण विकास विभाग के कर्मचारियों ने भी उनके खिलाफ मोर्चा खोला था। कर्मचारियों का कहना था कि कलेक्टर का रवैया काफी कठोर है और कार्य के दौरान दबाव अधिक बनाया जा रहा है। इस मामले ने प्रशासनिक हलकों में भी काफी चर्चा बटोरी थी।
ऐसे माहौल के बीच सकरवट गांव की चौपाल का यह वीडियो लोगों को कलेक्टर का दूसरा पक्ष दिखा रहा है। सोशल मीडिया पर कई लोग लिख रहे हैं कि प्रशासनिक सख्ती और जनसुनवाई, दोनों का संतुलन ही एक अच्छे अधिकारी की पहचान होती है।
ग्रामीणों ने अपनत्व के साथ रखी बात
ग्राम चौपाल के दौरान ग्रामीणों ने बिना किसी औपचारिकता के अपनी समस्याएं साझा कीं। गांव की महिलाओं ने पानी और स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर चिंता जताई, जबकि युवाओं ने रोजगार और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग उठाई।
कलेक्टर ने हर समस्या को गंभीरता से सुना और संबंधित विभागों को प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि अधिकारियों का गांव तक पहुंचना लोगों में भरोसा बढ़ाता है।
चौपाल में मौजूद कई ग्रामीणों का कहना था कि जब अधिकारी गांव में आकर लोगों के बीच बैठते हैं, तो समस्याओं की वास्तविक स्थिति समझने में आसानी होती है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में भी सुधार आता है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
सकरवट गांव की चौपाल का वीडियो अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से शेयर किया जा रहा है। वीडियो में कलेक्टर ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठे दिखाई दे रहे हैं। आसपास बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद हैं और अपनी बात रख रहे हैं।
वीडियो पर लोगों की मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे प्रशासन की सकारात्मक पहल बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि अधिकारियों को जनता के बीच नियमित रूप से इसी तरह पहुंचना चाहिए।
हालांकि, प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि जमीनी स्तर पर संवाद बढ़ाने से शासन और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है। खासकर ग्रामीण क्षेत्रों में चौपाल जैसी व्यवस्थाएं समस्याओं के त्वरित समाधान में मददगार साबित होती हैं।
जनसुनवाई मॉडल को लेकर बढ़ी चर्चा
मध्य प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों में ग्राम चौपाल और जनसुनवाई कार्यक्रमों को प्रशासनिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकारियों की सीधी पहुंच सुनिश्चित करना है।
रीवा जिले में भी समय-समय पर इस तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं, लेकिन कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी का यह वीडियो इसलिए अधिक चर्चा में है क्योंकि यह उनकी हालिया सख्त छवि के बिल्कुल विपरीत दिखाई देता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि किसी भी जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए अनुशासन के साथ मानवीय संवाद भी जरूरी होता है। यदि अधिकारी जनता की समस्याओं को सीधे सुनें, तो शिकायतों का समाधान अधिक तेज़ी से संभव हो पाता है।
प्रशासन और जनता के बीच संवाद की जरूरत
सकरवट गांव की यह चौपाल अब जिले में चर्चा का विषय बनी हुई है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि चौपाल में उठाई गई समस्याओं पर जल्द कार्रवाई होगी। वहीं, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर नई बहस भी शुरू कर दी है।
कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी का यह अंदाज़ यह संकेत देता है कि प्रशासन सिर्फ दफ्तरों तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि गांवों तक पहुंचकर लोगों की समस्याएं समझने की कोशिश भी कर रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चौपाल में उठाए गए मुद्दों पर कितना काम होता है और ग्रामीणों को कितनी राहत मिलती है।
