Sirmaur hospital:रीवा जिले का 50 बिस्तरों वाला सिरमौर सिविल अस्पताल इन दिनों खुद ही इलाज की आस में बदहाली के दौर से गुजर रहा है। स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में स्थित यह महत्वपूर्ण अस्पताल अव्यवस्थाओं और भारी स्टाफ संकट का शिकार है, जहां मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ होने के गंभीर आरोप सामने आ रहे हैं।
सफाई कर्मचारियों के भरोसे मरीज
अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा और गंभीर आरोप एक सफाई कर्मचारी की ओर से सामने आया है। कर्मचारी के अनुसार, नर्सों द्वारा उसे मरीजों की बोतलें निकालने और इंजेक्शन लगाने जैसे मेडिकल कार्यों के लिए भेजा जाता है। कर्मचारी का दावा है कि जब वह इन कामों के लिए मना करता है, तो उसे नौकरी से हटाने और “फ्री की तनख्वाह लेने” की बातें कही जाती हैं।
रात में डॉक्टरों और स्टाफ का अकाल
हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें
यूथ कांग्रेस नेता अनूप सिंह परिहार ने अस्पताल का दौरा कर व्यवस्थाओं की पोल खोली। उन्होंने आरोप लगाया कि 50 बेड वाले इस सिविल अस्पताल में दूर-दराज के गांवों से आने वाले मरीजों को भारी निराशा हाथ लग रही है। रात के समय अस्पताल में डॉक्टरों और प्रशिक्षित स्टाफ की बेहद कमी रहती है। शाम 6 बजे के बाद मेडिकल विभाग में ताला लटका नजर आता है और इमरजेंसी में आए मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
2 महीने से एक्स-रे फिल्म ही गायब
अस्पताल की मूलभूत जांच सुविधाएं भी पूरी तरह ठप हैं। एक्स-रे विभाग को लेकर सामने आया है कि पिछले लगभग दो महीनों से एक्स-रे फिल्म उपलब्ध न होने के कारण मरीजों की रिपोर्ट नहीं मिल पा रही है, जिससे मजबूरन गरीबों को निजी सेंटरों का रुख करना पड़ रहा है।
स्वास्थ्य मंत्री के जिले में उठते सवाल
स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग की कमान संभालने वाले मंत्री का संबंध इसी क्षेत्र से होने के बावजूद सिरमौर सिविल अस्पताल “भगवान भरोसे” चल रहा है।
बीएमओ और जिम्मेदार
अधिकारियों द्वारा स्टाफ की कमी का हवाला देकर पल्ला झाड़ा जा रहा है, जिससे क्षेत्रीय जनता में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
