Rewa news; रीवा जिले के गुढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत नगर परिषद गुढ़ में घनी बस्ती के बीचों-बीच कंपोजिट शराब दुकान खोले जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। रिहाइशी इलाके और शैक्षणिक संस्थान के पास संचालित हो रही इस दुकान को हटवाने की मांग को लेकर नगर परिषद गुढ़ के वार्ड क्रमांक 9 से शिकायत कर्ता जनसुनवाई में रीवा कलेक्टर के पास गुहार लगाने पहुंचे।
इस गंभीर समस्या को लेकर शैलेन्द्र कुमार बंसल पहले क्षेत्रीय विधायक नागेंद्र सिंह से भी मुलाकात कर चुके हैं। विधायक की ओर से मिले निर्देश के बाद वह नए कलेक्टर के समक्ष शिकायत दर्ज कराने जनसुनवाई में पहुंचे। इससे पहले भी वह पूर्व कलेक्टर प्रतिभा पाल के कार्यकाल में 27 मार्च 2026 को एडीएम को इस संबंध में आवेदन सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे मजबूर होकर उन्हें दोबारा जिला मुख्यालय आना पड़ा।
महिला सुरक्षा और युवाओं के भविष्य पर संकट
पार्षद शैलेंद्र कुमार बंसल ने शराब दुकान के कारण उत्पन्न हो रही गंभीर समस्याओं को उजागर किया। उन्होंने बताया कि जिस स्थान पर कंपोजिट शराब दुकान संचालित है, उसके ठीक पास एक सार्वजनिक नल है। वहां सुबह से शाम तक मोहल्ले की महिलाएं, बहन-बेटियां पानी भरने आती हैं। शराब दुकान के कारण वहां असामाजिक तत्वों और शराबियों का जमावड़ा लगा रहता है, जो पानी भरने आने वाली महिलाओं पर बुरी नजर डालते हैं।
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इसके अलावा, दुकान से महज 600 से 800 मीटर की दूरी पर जेके महाविद्यालय (कॉलेज) स्थित है। कॉलेज आने-जाने वाली छात्राओं को इस रास्ते से गुजरते समय भारी मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ती है, क्योंकि शराबी वहां पीकर खड़े रहते हैं और छात्राओं पर अभद्र और गंदे कमेंट्स करते हैं।
मोहल्ले में बढ़ रही मौतें, बर्बादी की कगार पर परिवार
शिकायतकर्ता ने एक और दर्दनाक पहलू सामने रखते हुए बताया कि बस्ती के बिल्कुल नजदीक शराब की उपलब्धता होने के कारण स्थानीय लोगों में नशे की लत तेजी से बढ़ रही है। अत्यधिक शराबखोरी के कारण हाल ही में मोहल्ले के दो युवकों की असामयिक मृत्यु भी हो चुकी है। रिहाइशी इलाके में इस दुकान के होने से पूरा मोहल्ला बर्बादी की कगार पर पहुंच रहा है।
राजस्व के चक्कर में जनता की सुरक्षा दांव पर
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि एक तरफ जहां गली-गली, मोहल्ले-मोहल्ले शराब की अवैध पैकारी और ओवररेटिंग का खेल धड़ल्ले से चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ सरकार को मिलने वाले राजस्व के चलते प्रशासन ऐसे संवेदनशील मामलों में सुस्ती बरतता है। पूर्व में भी रीवा जिले में शराब दुकानें हटाने को लेकर कई आंदोलन हुए, लेकिन नतीजों के नाम पर ढाक के तीन पात ही रहे। अब देखना यह होगा कि जनसुनवाई में पहुंचे इस संवेदनशील मामले पर नए कलेक्टर क्या रुख अपनाते हैं और गुढ़ की जनता को इस परेशानी से मुक्ति मिलती है या नहीं।
