Rewa Power House History; भारत में बिजली का इतिहास बेहद दिलचस्प रहा है। जहां एक तरफ साल 1879 में कलकत्ता में देश की पहली बिजली चमकी थी, वहीं मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र का इतिहास भी कुछ कम अनोखा नहीं है। आज से करीब 119 साल पहले, यानी साल 1907 में विंध्य की ऐतिहासिक धरती रीवा में पहली बार एक बल्ब जला था।
Rewa Power House History; सात समंदर पार से आया था अनोखा बॉयलर
रीवा के महाराज की तकनीकी दूरदर्शिता का ही नतीजा था कि उस दौर में सात समंदर पार ब्रिटेन से एक खास बॉयलर मंगवाकर रीवा में बिजली युग की शुरुआत की गई थी।
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Rewa Power House History; व्यंकट भवन में जली थी रीवा की पहली लाइट
आइए जानते हैं रीवा के उस ऐतिहासिक पावर हाउस और व्यंकट भवन की कहानी, जो आज भी इतिहास के पन्नों में अमर है व्यंकट भवन में जली थी रीवा की पहली लाइट साल 1907 में जब रीवा में पहली बार बिजली आई, तो यह आम जनता के लिए नहीं बल्कि रीवा रियासत के महाराजा के निजी उपयोग के लिए थी। कोठी कंपाउंड में स्थित ऐतिहासिक व्यंकट भवन वह खुशनसीब इमारत थी, जो सबसे पहले बिजली की रोशनी से नहाई थी।
इस भव्य भवन का निर्माण महाराजा व्यंकट रमण सिंह ने ‘त्रिलोक’ आकाश, पाताल और धरती की अनूठी आध्यात्मिक अवधारणा पर करवाया था। महाराजा की इच्छा थी कि इस महल की भव्यता रात के अंधेरे में भी फीकी न पड़े। महल की छत पर कांच के बेहद खूबसूरत चांद और सितारे बनाए गए थे।
जब 1907 में पहली बार बिजली चालू हुई, तो इन कांच के चांद-सितारों से छनकर आती रोशनी ने पूरे परिसर को किसी जादुई दुनिया में बदल दिया था।
Rewa Power House History; बिछिया नदी का पानी और ब्रिटेन का बॉयलर
उस दौर में बिजली बनाना आज की तरह आसान नहीं था। रीवा रियासत के पास न तो कोई बड़ा ग्रिड था और न ही संसाधन। लेकिन महाराजा व्यंकट रमण सिंह की तकनीकी सोच बहुत आगे की थी। उन्होंने बिजली उत्पादन के लिए विशेष रूप से ब्रिटेन से एक आधुनिक बॉयलर मंगवाया।
इस तकनीक को चालू रखने के लिए पानी की जरूरत थी। इसके लिए रीवा की जीवनदायिनी बिछिया नदी के पानी का इस्तेमाल किया गया। नदी के पानी से भाप (Steam) बनाई जाती थी और उसी भाप के जरिए ब्रिटेन से आए बॉयलर को चलाकर बिजली पैदा की जाती थी। तत्कालीन समय में इस थर्मल पावर सेटअप को बेहद आधुनिक और क्रांतिकारी माना गया था।
Rewa Power House History; इतिहास का गवाह: आज भी मौजूद है वह पावर हाउस
भले ही आज रीवा एक आधुनिक शहर बन चुका है और घर-घर में बिजली चौबीसों घंटे रहती है, लेकिन इस सफर की शुरुआत जहां से हुई थी, वह धरोहर आज भी सुरक्षित है। उस दौर का बना हुआ वह पहला पावर हाउस आज भी रीवा में मौजूद है। यह जर्जर भले हो रहा हो, लेकिन इसकी दीवारें आज भी रीवा के गौरवशाली इतिहास, राजाओं की सूझबूझ और उनकी तकनीकी दूरदर्शिता की कहानी खुद बयां करती हैं।
भले ही साल 1907 में बिजली सिर्फ राजमहल और व्यंकट भवन तक ही सीमित थी और रीवा की आम जनता के घरों तक लालटेन से बिजली के बल्ब का सफर तय करने में कई दशक लग गए, लेकिन विंध्य क्षेत्र में आधुनिकता की वह पहली नींव इसी पावर हाउस ने रखी थी।

रीवा का व्यंकट भवन और पुराना पावर हाउस सिर्फ ईंट-पत्थरों का ढांचा नहीं हैं, बल्कि ये विंध्य के गौरव, कला और विज्ञान के मिलन के जीवंत प्रतीक हैं। व्यंकट भवन की छत पर चमके वे पहले कांच के सितारे आज भी इतिहास के पन्नों में अपनी चमक बिखेर रहे हैं। यदि आप रीवा के इतिहास को करीब से देखना चाहते हैं, तो कोठी कंपाउंड के इस इतिहास को महसूस करना एक अनोखा अनुभव होगा।
अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
