Rewa news; गुढ़ पुलिस का ‘क्रूर’ चेहरा: रक्षक ही बने भक्षक, पत्रकार को शराब माफियाओं के इशारे पर भेजा जेल लगा दी गंभीर धारा, न्यायलय से मिली जमानत

Rewa news; रीवा। जिले में कानून व्यवस्था की बागडोर संभालते ही पुलिस अधीक्षक गुरकरन सिंह की टीम विवादों के घेरे में आ गई है। गुढ़ थाना पुलिस द्वारा स्थानीय पत्रकार निखिल पाठक के खिलाफ की गई कार्रवाई ने न केवल प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला किया है, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि जिले में खाकी और माफिया का गठजोड़ किस कदर गहरा चुका है।
Rewa news; नियमों की धज्जियां, माफिया को संरक्षण
गृह मंत्रालय के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि किसी भी पत्रकार पर एफआईआर दर्ज करने या गिरफ्तारी से पहले आईजी रैंक के अधिकारी से जांच अनिवार्य है। लेकिन गुढ़ थाना प्रभारी शैल यादव ने इन आदेशों को ठेंगे पर रखकर पत्रकार को अपराधी की तरह सलाखों के पीछे भेज दिया। आरोप है कि शराब माफियाओं के काले कारनामों को उजागर करने की सजा निखिल पाठक को इस फर्जी मुकदमे के रूप में दी गई है।
Rewa news; पुलिस का ‘शर्मनाक’ प्रेस नोट और सोशल मीडिया ड्रामा
पुलिस की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल तब खड़ा हुआ जब उन्होंने पत्रकार निखिल पाठक को एक जिला बदर अपराधी के साथ खड़ा करके फोटो खिंचवाई और उसे ‘आदतन अपराधी’ बताकर सोशल मीडिया पर वायरल कर साथ मे उसी धारा में आरोपी भी बना दिया।
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रिकॉर्ड्स को आधार बनाकर पुलिस यह सिद्ध करने की कोशिश कर रही है कि पत्रकार अपराधी है, जबकि ये पुराने मामले भी पुलिसिया रंजिश का ही हिस्सा बताए जा रहे हैं।
कड़वा सवाल:क्या पुलिस अधीक्षक गुरकरन सिंह के आते ही अब पत्रकारों को अपराधियों की श्रेणी में खड़ा किया जाएगा? क्या रीवा में माफियाओं के खिलाफ लिखना अब ‘अड़ीबाजी’ और ‘वसूली’ कहलाएगा।
Rewa news; सामाजिक संगठनों की ‘चुप्पी’ पर प्रहार
जब अपनी वाहवाही छपवानी होती है, तो यही सामाजिक संगठन मीडिया के पास दौड़ते हैं, लेकिन जब सच की लड़ाई लड़ रहा एक पत्रकार षड्यंत्र का शिकार होता है, तो ये संगठन मौन साधे रहते हैं। यह चुप्पी अपराधियों और भ्रष्ट पुलिसकर्मियों के हौसले बुलंद कर रही है।
Rewa news; लोकतंत्र का गला घोंटती रीवा जिले की खाकी
रीवा पुलिस का यह कदम लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा प्रहार है। अगर रक्षक ही शराब माफियाओं के आगे नतमस्तक होकर कलम के सिपाहियों को जेल भेजेंगे, तो आम जनता का न्याय से भरोसा उठना लाजमी है। समय आ गया है कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच हो और दोषी अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
Rewa news;गुढ़ थाने में ये लगाई गई धारा
गुढ़ पुलिस ने पत्रकार निखिल पाठक के विरुद्ध हालिया मामला अपराध क्रमांक 133/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की नई धाराओं में दर्ज किया है।
296(ख)| अश्लील कृत्य/गाली-गलौज | सार्वजनिक स्थान पर किसी को अपशब्द कहना या मां-बहन की गाली देना जिससे दूसरों को असुविधा हो।
119(2) गंभीर चोट पहुँचाना किसी व्यक्ति को स्वेच्छा से ऐसी चोट पहुँचाना जो गंभीर प्रकृति की हो
351(3) आपराधिक धमकी | किसी व्यक्ति को जान से मारने या गंभीर नुकसान पहुँचाने की धमकी देना। |
3(5) संयुक्त जवाबदेही | जब दो या दो से अधिक व्यक्ति मिलकर किसी अपराध को अंजाम देते हैं, तो उन सभी पर समान रूप से केस दर्ज होता है। |
Rewa news; पुराने रिकॉर्ड में दिखाई गई अन्य मुख्य धाराएं
पुलिस ने निखिल पाठक के ‘आपराधिक रिकॉर्ड’ की जो सूची पेश की है, उनमें कुछ अन्य महत्वपूर्ण प्रावधान भी शामिल हैं:
धारा 107, 116(3) जा.फौ. (CrPC) यह दंडात्मक धारा नहीं बल्कि प्रतिबंधात्मक कार्रवाई है।
इसका उपयोग शांति भंग होने की आशंका होने पर किया जाता है, जहाँ व्यक्ति को शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड (जमानतनामा) भरने का निर्देश दिया जाता है।
धारा 188, 269, 270, 271 ता.हि. (IPC):ये धाराएं आमतौर पर महामारी (जैसे कोरोना काल) के दौरान सरकारी आदेशों के उल्लंघन, संक्रमण फैलाने की लापरवाही और क्वारंटाइन नियमों को तोड़ने से संबंधित हैं।
धारा 323, 506, 34 (IPC): मारपीट करना, जान से मारने की धमकी देना और सामूहिक रूप से अपराध करना।
पुलिस का दावा है कि ये अपराध “प्रमाणित” पाए गए हैं, जबकि पत्रकारिता जगत इसे एक साजिश बता रहा है। ध्यान देने वाली बात यह है कि BNS (भारतीय न्याय संहिता) की धाराएं हाल ही में लागू हुए नए कानूनों का हिस्सा हैं, जिनका उपयोग पुलिस ने इस केस में तेजी से किया है।
जाहिर सी बात है कि जिस क्षेत्र में पत्रकार कवरेज करने जाएगा वहां की लोकेशन, टावर लोकेशन रहेगी , अगर cctv कैमरे लगे है तो फुटेज भी रहेगी फिर वह कवरेज करने गया था न कि अपराध करने कहीं ना कहीं गुढ़ पुलिस की यह कार्रवाई सवालों के घेरे में है क्या अब पुलिस ने अपना ही इमान गिरवी रख दिया शराब माफियाओं को अपना जमीर बेच दिया है रीवा जिले में जल्द ही पत्रकार संगठन एकत्रित होकर ऐसे पुलिस वालों के खिलाफ रीवा जिले के आईजी को ज्ञापन सौप कर दर्ज किए गए फर्जी मुकदमे की निष्पक्ष जांच की मांग करेंगे और दोषी पुलिस कर्मी को तत्काल निलंबित करने की मांग की जाएगी । और रही बात पत्रकार को असली नकली बताने की तो पत्रकार को संस्थान नियुक्त करता है न कोई जनसंपर्क उसे पत्रकार बनाता है न कोई सामाजिक संगठन न कोई पुलिस अधिकारी और न कोई प्रशासन अगर एक अखबार या चैनल का संपादक किसी को पत्रकार नियुक्त कर दिया है तभी वह फील्ड में कवरेज करेगा ना कि वह जनसंपर्क विभाग से परमिशन लेगा और कवरेज करने जाएगा जनसंपर्क विभाग में लेटर इसलिए दिया जाता है जिससे जनसंपर्क शासन प्रशासन की खबरें हम तक पहुंचाता रहे किसी प्रकार पत्रकार को जनसंपर्क रजिस्टर्ड करके उसे पत्रकारिता का सर्टिफिकेट नही देता ।
Rewa news; रीवा न्यायालय से पत्रकार निखिल पाठक को मिली जमानत
रीवा न्यायालय ने भ्रष्ट पुलिस कर्मियों के मंसूबे पर फेरा पानी पत्रकार निखिल पाठक सहित अन्य को दी जमानत वही पत्रकार निखिल पाठक व उनके साथ जेल भेजे गए युवाओ को आज दिन बुधवार को रीवा न्यायालय से जमानत मिल चुकी है निखिल पाठक जेल से बाहर आते ही भ्रष्ट पुलिस कर्मियों के खिलाफ रीवा आईजी से मिलकर ज्ञापन सौंपेंगे उनके खिलाफ किए गए षड्यंत्र एवं शराब ठेकेदार से गठजोड़ के मामले की गंभीरता से जांच कराई जाएगी और अगर पुलिस वाले या थाना प्रभारी की संलिप्तता ठेकेदारों से होती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी ।

