Rewa news; रीवा: नेशनल हाईवे 30 पर एनएचएआई और टोल प्रबंधन की लापरवाही, बेजुबान की मौत के बाद शर्मनाक रवैया

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Rewa news; ​रीवा। नेशनल हाईवे 30 पर सफर करना अब पूरी तरह से भगवान भरोसे हो चुका है। भारी-भरकम टोल टैक्स वसूलने वाली भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और टोल प्लाजा प्रबंधन जनता की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह संवेदनहीन बना हुआ है। ताजा मामला जुगनिहाई टोल प्लाजा से महज 2 किलोमीटर दूर बेलबाग गांव के पास सामने आया है, जहां एक भीषण सड़क हादसे में एक बेजुबान बछड़े की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कार सवार बाल-बाल बच गए।

​जानकारी के मुताबिक, जबलपुर की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार कार के सामने अचानक एक बछड़ा आ गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और एयर बैग खुलने व सीट बेल्ट लगे होने के कारण कार सवार सुरक्षित बच गए। हालांकि, मासूम बछड़े ने मौके पर ही तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

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​Rewa news; पेट्रोलिंग टीम का अमानवीय चेहरा

हादसे की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची टोल प्लाजा की पेट्रोलिंग टीम का रवैया बेहद शर्मनाक रहा। स्टाफ ने सड़क पर तड़प रहे बछड़े को किनारे करने या उपचार दिलाने के बजाय सबसे पहले कार के टूटे हुए हिस्सों को समेटना शुरू कर दिया ताकि मार्ग साफ दिखे। हद तो तब हो गई जब टीम मृत बछड़े को बीच सड़क पर ही छोड़कर वहां से चली गई। बाद में राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों ने मानवता दिखाते हुए मृत मवेशी को सड़क से किनारे हटाया ताकि कोई दूसरा वाहन दुर्घटनाग्रस्त न हो।

हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें

Rewa news; ​जिम्मेदारों का गैर-जिम्मेदाराना बयान

जब इस पूरी लापरवाही को लेकर टोल पेट्रोलिंग टीम के प्रभारी नरेंद्र प्रताप सिंह से बात की गई, तो उन्होंने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दीं। उन्होंने मीडिया के सामने कहा कि “बछड़े को रोड पर ही पड़ा रहने दो, रात में उठाकर फिकवाऊंगा।” यह बयान साफ दर्शाता है कि करोड़ों का टैक्स वसूलने वाली इन कंपनियों के लिए जान की कोई कीमत नहीं है।

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ग्रामीणों में भारी आक्रोश; Rewa news

स्थानीय लोगों और राहगीरों का कहना है कि डिवाइडरों पर बैरिकेडिंग न होने के कारण मवेशी आए दिन बीच सड़क पर आ जाते हैं, जिससे आए दिन हादसे हो रहे हैं। ग्रामीणों ने एनएचएआई और लापरवाह टोल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्यवाही की मांग की है। प्रयागराज से आ रहे पीड़ित कार सवार राकेश सोनी ने भी मध्य प्रदेश सरकार और प्रशासन से मांग की है कि हाईवे पर जाली या बैरिकेडिंग की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।

​सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन और एनएचएआई किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं? आखिर कब तक टोल कंपनियों की इस तानाशाही और लापरवाही का खामियाजा आम जनता और बेजुबान मवेशियों को भुगतना पड़ेगा?

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