Rewa news; रीवा दावों की खुली पोल, बारदाने के अभाव में अन्नदाता बेहाल

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Rewa news; गंगापुर निपनिया खरीदी क्रमांक 2 के हालात, रीवा, मध्य प्रदेश। एक ओर सरकार किसान कल्याण के बड़े-बड़े विज्ञापनों से अखबार रंगे बैठी है, तो दूसरी ओर रीवा के गेहूं खरीदी केंद्रों से आई तस्वीरें व्यवस्था के मुँह पर तमाचा जड़ रही हैं। जिले के खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था का आलम यह है कि बारदाने बोरियां खत्म होने के कारण तौल पूरी तरह ठप पड़ गई है। भीषण गर्मी और खुले आसमान के नीचे किसान पिछले चार दिनों से अपने खून-पसीने की कमाई लेकर खड़े हैं, लेकिन प्रशासन की नींद टूटने का नाम नहीं ले रही।

जिला प्रशासन ने खरीदी शुरू होने से पहले बड़े-बड़े दावे किए थे कि किसानों को एक मिनट भी इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा। लेकिन हकीकत यह है कि एमपीएससीएससी के स्टेंसिल लगी पट्टियां तो केंद्रों पर पहुँच गई हैं, पर वह बारदाना नहीं पहुँचा जिसमें गेहूं भरकर सुरक्षित किया जा सके। तस्वीरों में साफ़ देखा जा सकता है कि खरीफ वर्ष 2026-27 के लिए तौल की तैयारी तो है, लेकिन खाली हाथ बैठे किसान केवल आसमान और अधिकारियों की बाट जोह रहे हैं।

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आधुनिक युग में जहाँ डिजिटल गवर्नेंस की बात होती है, वहीं रीवा का जिला प्रशासन सूचना मिलने के बाद भी पंगु बना हुआ है। किसानों का कहना है कि उन्होंने जिले के आला अधिकारियों को वॉट्सऐप और अन्य माध्यमों से सूचित करा दिया था कि बारदाना खत्म हो चुका है। इसके बावजूद, अब तक केंद्रों पर बोरियों की आपूर्ति नहीं की गई है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि किसानों के प्रति प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है।

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आसमान में बादलों की आवाजाही ने किसानों की धड़कनें बढ़ा दी हैं। यदि बारिश होती है, तो खुले में रखा हजारों क्विंटल गेहूं बर्बाद हो जाएगा। केंद्रों पर रुकने के कारण किसानों का खर्च बढ़ रहा है। ट्रैक्टर का किराया, मजदूरों की दिहाड़ी और घर-परिवार छोड़कर केंद्रों पर डेरा डालना उनकी कमर तोड़ रहा है। बारदाना न होने से तौल बंद है, जिससे आने वाले दिनों में केंद्रों पर भीड़ और अव्यवस्था बढ़ना तय है।

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रीवा जिले की गंगापुर, निपनिया क्रमांक 2 खरीदी केंद्रों पर लगा तौल विराम केवल तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक विफलता है। क्या प्रशासन किसी बड़े नुकसान का इंतज़ार कर रहा है? किसान अपना हक मांग रहे हैं, खैरात नहीं। जिला प्रशासन तुरंत बारदाने की खेप रवाना करे, ताकि किसान अपनी फसल बेचकर सम्मान के साथ घर लौट सकें।

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