Rewa news : रीवा। विंध्य की धरा पर बहने वाली बीहर और बिछिया केवल दो नदियां नहीं हैं, बल्कि यह रीवा के इतिहास, संस्कृति, लोक-विश्वास और प्राकृतिक सौंदर्य का मूलाधार हैं। सदियों पहले इन्हीं नदियों के पावन तटों पर बस्तियां बसनी शुरू हुईं, जिसने कालंतर में एक ऐतिहासिक शहर ‘रीवा’ का रूप लिया। हाल ही में आई भीषण बाढ़ के बाद जहां रीवा का एक बड़ा हिस्सा जलमग्न हो गया, वहीं इन नदियों के मूल प्रवाह, उद्गम और इतिहास को लेकर जनमानस में एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
Rewa news: कैमूर की पहाड़ियों से निकला बीहर का शांत प्रवाह
बीहर नदी का उद्गम मैहर जिले की अमरपाटन तहसील के खरमसेड़ा गांव के समीप कैमूर पर्वत श्रृंखलाओं से होता है। अमरपाटन से लगभग 10 किलोमीटर दूर मोहास पटपर के समीप छोटी-छोटी जलधाराएं एकत्र होकर नदी का आकार लेती हैं। जनश्रुतियों के अनुसार, प्राचीन काल में यहां आल्हा-ऊदल के मामा महल परिहार का झुनझुनगढ़ किला हुआ करता था।
अमरपाटन से निकलकर बीहर मुकुंदपुर के जंगलों को सींचते हुए उत्तर दिशा की ओर रीवा शहर में प्रवेश करती है। बीहर का स्वभाव शुरू से ही गहरा और शांत रहा है।
मऊगंज की झिर्री से सदा नीरा बनती बिछिया
दूसरी ओर, बिछिया नदी का सफर मऊगंज जिले के खैरा कनकेसरा गांव से एक छोटी सी जल-झिर्री के रूप में शुरू होता है। पास स्थित बिछियान गांव के नाम पर इसका नाम बिछिया पड़ा। शुरुआती दौर में इसका अस्तित्व एक छोटे नाले जैसा था, जहां लोग खेती तक करते थे। परंतु, गुढ़ के समीप पहुंचते ही कैमूर की पहाड़ियों से रिसने वाली जलधाराओं से मिलकर यह ‘सदा नीरा’ बन जाती है।
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रीवा पहुंचने से पहले यह नदी कलचुरी कालीन प्राचीन नगरी गुर्गी के भग्नावशेषों को छूते हुए गुजरती है। रीवा शहर की सीमा में प्रवेश करते ही ऐतिहासिक लक्ष्मण बाग के समीप यह नदी अर्ध-धनुषाकार मोड़ बनाती है, जो इस क्षेत्र को मनोरम स्वरूप प्रदान करता है।

Rewa news: राजघाट पर अद्भुत संगम: चंचल बिछिया, शांत बीहर
रीवा किले के पीछे स्थित राजघाट वह ऐतिहासिक स्थल है, जहां पूर्व दिशा से तेजी से आती चंचल और उथली बिछिया नदी, गहरी व शांत बीहर से आकर मिल जाती है।
दोनों नदियों का स्वभाव और रंग एक-दूसरे से पूरी तरह भिन्न है—बिछिया का पानी हरापन लिए चंचलता दिखाता है, जबकि बीहर का मटमैला जल शांत भाव से बहता है। राजघाट संगम के बाद बिछिया का अस्तित्व बीहर में समाहित हो जाता है और यहां से केवल बीहर नदी अपनी आगे की यात्रा तय करती है।
Rewa news: शंकराचार्य का प्रवास और विश्व प्रसिद्ध चचाई प्रपात
संगम से आगे बढ़कर बीहर पंचमठा मंदिर के समीप से गुजरती है। मान्यता है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने ओंकारेश्वर से काशी की यात्रा के दौरान इस तट पर विश्राम किया था। पंचमठा के आगे बीहर दो धाराओं में बंटकर एक टापू का निर्माण करती है, जहां वर्तमान में ‘इको पार्क’ स्थापित है।
शहर से आगे निकलकर बीहर नदी सिरमौर क्षेत्र में 372 फीट की ऊंचाई से गिरकर भारत के प्रसिद्ध ‘चचाई जलप्रपात’ का निर्माण करती है। इस प्रपात के मनोरम दृश्य को देखकर भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू भी मुग्ध हो गए थे। सिरमौर के आगे मरेला के घने जंगलों से गुज़रते हुए लगभग 90 किलोमीटर की यात्रा तय कर बीहर नदी अंततः ‘टमस’ नदी में विलीन हो जाती है।
Rewa news: विनाशकारी बाढ़ और प्राकृतिक संतुलन का संदेश
बीहर और बिछिया नदियां रीवा के लिए पेयजल, सिंचाई और टोंस परियोजना के माध्यम से बिजली उत्पादन का प्रमुख जरिया हैं। हालांकि, प्राकृतिक जल ग्रहण क्षेत्रों में अतिक्रमण और बहाव में बाधा के कारण इन नदियों का रौद्र रूप भी समय-समय पर देखने को मिला है। इतिहास गवाह है कि वर्ष 1882, 1962, 1997, 2003, 2016 और हाल ही में आई भीषण बाढ़ों ने शहर को भारी नुकसान पहुंचाया है।
अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
