Rewa news: रीवा में नायक मूवी की तरह कलेक्टर का बड़ा एक्शन , फिर लापरवाही पड़ी भारी छात्रावास अधीक्षकों को रीवा कलेक्टर का बड़ा झटका
Rewa news: रीवा जिले में प्रशासनिक कसावट लाने और सरकारी व्यवस्थाओं को पटरी पर लाने के लिए कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी इन दिनों बेहद सख्त नजर आ रहे हैं। उनके हालिया फैसलों ने जिले के सरकारी महकमों में खलबली मचा दी है। विशेष रूप से शिक्षा और समाज कल्याण से जुड़े संस्थानों में जिस तरह की लापरवाही सामने आई है, उस पर कलेक्टर ने कड़ा प्रहार किया है।
रीवा सहित अन्य जिले के क्षेत्र में कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी का नाम अब सबके जवान पर आ रहा है क्योंकि रीवा कलेक्टर ने ऐसा कर दिखाया जो अब तक रीवा जिले में आए हुए कलेक्टरों ने नहीं किया है आपको बता दे कि अभी सूर्यवंशी को रीवा की कमान सम्हाले एक महीने नहीं हुुुए कि रीवा कलेक्टर ने लापरवाह कर्मियों पर तत्काल एक्शन ले रहे हैं एक के बाद एक कर्मचारी को उनके किए की सजा भी दे रहे हैं आपको बता दे की रीवा कलेक्टर की इस कार्रवाई के चलते कुछ रीवा जिले के भ्रष्ट्र अधिकारी एवं कर्मचारी की सांस फूलने लगी है जो अब कलेक्टर के खिलाफ ही रीवा संभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत करना शुरू कर दिए हैं।
रीवा कलेक्टर ने साफ कह दिया है इन शिकायतों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वह जनता के सेवक है और जनता की सेवा के लिए उन्हें कुर्सी मिली है और वह अपना कार्य करना और अपने अधीनस्थ कर्मचारियों से कार्य कराना बखूबी जानते हैं उन्होंने साफ कह दिया है कि अगर रीवा में रहना है तो काम तो करना पड़ेगा क्योंकि हमें जनता के दिए हुए टैक्स से वेतन मिलती है और हमें जनता की सेवा के लिए ही कुर्सी दी गई है।
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प्रशासन की इस कार्रवाई ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अब सरकारी कुर्सियों पर बैठकर केवल समय काटना संभव नहीं होगा, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी।
पूरा घटनाक्रम कलेक्टर द्वारा किए गए औचक निरीक्षण से शुरू हुआ। दरअसल, कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी जिले के विभिन्न विकासखंडों का दौरा कर रहे हैं ताकि सरकारी योजनाओं और संस्थानों की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया जा सके। इसी कड़ी में जब वे अनुसूचित जनजाति कन्या आश्रम फूल पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर दंग रह गए। जिस आश्रम में आदिवासी बालिकाओं की सुरक्षा और शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार ने सौंपी है, वहां ताला लटका हुआ था। अधीक्षिका मैनाबाई साकेत बिना किसी सूचना के अपने कर्तव्य से नदारद थीं। एक संवेदनशील संस्थान में इस स्तर की लापरवाही न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि उन छात्राओं की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ भी है जो वहां रहकर पढ़ाई करती हैं।
इसी तरह का एक और मामला अनुसूचित जनजाति बालक आश्रम लालगांव में देखने को मिला। यहां भी जब कलेक्टर अचानक पहुंचे तो अधीक्षक गणेश प्रसाद शुक्ला गायब मिले। बिना पूर्व अनुमति या सूचना के मुख्यालय छोड़ना और ड्यूटी से अनुपस्थित रहना प्रशासनिक सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन है।
बालक आश्रम जैसे महत्वपूर्ण संस्थान में अधीक्षक की अनुपस्थिति यह दर्शाती है कि वहां की व्यवस्थाएं कितनी रामभरोसे चल रही होंगी। इन दोनों मामलों को कलेक्टर ने गंभीरता से लिया और इसे कर्तव्य के प्रति घोर लापरवाही और कदाचार की श्रेणी में रखा।
प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत पहले दोनों ही अधीक्षकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। उनसे पूछा गया था कि उनकी इस लापरवाही के लिए उन पर कार्रवाई क्यों न की जाए। सूत्रों के अनुसार, दोनों की ओर से जो जवाब प्रस्तुत किए गए, वे प्रशासन को बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं लगे। जवाबों में तार्किकता की कमी और अपनी गलती को छिपाने का प्रयास नजर आया।
इसके बाद कलेक्टर सूर्यवंशी ने दंडात्मक रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश सिविल सेवा वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील अधिनियम 1966 की शक्तियों का प्रयोग किया और दोनों अधिकारियों की दो-दो वार्षिक वेतन वृद्धियां असंचय प्रभाव से रोकने का आदेश जारी कर दिया।
वेतन वृद्धि रोकना किसी भी सरकारी कर्मचारी के लिए एक बड़ा आर्थिक और सेवा संबंधी झटका होता है। यह दंड इस बात का प्रतीक है कि भविष्य में उनकी पदोन्नति और वेतनमान पर इसका असर पड़ेगा। कलेक्टर की इस कार्रवाई ने जिले के अन्य लापरवाह कर्मचारियों के मन में डर पैदा कर दिया है। रीवा कलेक्टर का यह अंदाज उन लोगों के लिए एक चेतावनी है जो फील्ड ड्यूटी के नाम पर कार्यालयों या संस्थानों से गायब रहते हैं। खासकर आदिवासी क्षेत्रों में चल रहे छात्रावासों और आश्रमों पर प्रशासन की पैनी नजर है क्योंकि इन संस्थानों का सीधा संबंध समाज के सबसे पिछड़े वर्ग के उत्थान से है।
कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी के इस एक्शन के बाद जिले में मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। आम नागरिक और अभिभावक इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। उनका मानना है कि जब तक बड़े अधिकारियों पर गाज नहीं गिरेगी, तब तक निचले स्तर पर सुधार संभव नहीं है। स्कूलों और आश्रमों में शिक्षकों और अधीक्षकों की मनमानी के कारण अक्सर गरीब बच्चों की पढ़ाई और पोषण पर बुरा असर पड़ता है। वहीं दूसरी ओर, कर्मचारी संगठनों में इस सख्ती को लेकर थोड़ी बेचैनी है।
रीवा कलेक्टर ने यह साफ कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता जिले में सुशासन स्थापित करना है। सरकारी खजाने से वेतन पाने वाले हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी से निभानी होगी। आने वाले समय में जिले के अन्य विभागों जैसे स्वास्थ्य, राजस्व और पंचायत स्तर पर भी इस तरह के औचक निरीक्षण और कड़ी कार्रवाइयां देखने को मिल सकती हैं। यह कार्रवाई केवल दंड नहीं है, बल्कि प्रशासनिक कार्यसंस्कृति को बदलने का एक प्रयास है, ताकि आम आदमी को सरकारी सेवाओं का लाभ बिना किसी बाधा के मिल सके।
रीवा कलेक्टर इन दिनों नायक मूवी की तरह आते ही एक्शन मोड पर हैं उनकी रीवा जिले की तमाम सोशल मीडिया में उनके कार्यों की जमकर तारीफ हो रही है बच्चे से लेकर बड़े बुजुर्ग तक सोशल मीडिया पर कलक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी की सराहना कर रहे हैं । कुछ लोगों ने तो यहां तक सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया कि ऐसा कलेक्टर रीवा जिले को कभी नहीं मिले हैं और ना मिलेंगे । कलेक्टर लापरवाह भ्रष्टाचार को खत्म करके ही मानेंगे ।
