Rewa news: रीवा- इन दिनों रीवा जिले की पुलिस के लिए सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है रीवा पुलिस सोशल मीडिया पर वायरल होने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रही है आपको बता दे की रीवा शहर के सिविल लाइन थाने के बाहर समाज सेवी व थाना प्रभारी की तीखी बहस का वीडियो वायरल हुआ था उस वायरल वीडियो की आग अभी ठंडी नहीं हुई कि फिर एक नया वीडियो वायरल हो गय जिसमे आज ट्रैफिक थाने के एक पुलिसकर्मी ऑटो चालक से भिड़ गया आखिर इन पुलिसकर्मी को किसने अधिकार दे दिया है । किसी ऑटो चालक को सवारी उतारने के दौरान उसका ऑटो रोककर उसकी सीट पर खुद चालक की तरह बैठने का अधिकार किसने दे दिया है रीवा पुलिस इन दिनों काफी अनुशासनहीनता के रवैये में दिखाई दे रही है आपको बता दे की लगातार सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद भी रीवा जिले के आला अधिकारी मौन साधे बैठे हुए हैं आखिर रीवा जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की चुप्पी का क्या मतलब है क्या अब रीवा की कानून व्यवस्था इसी तरह चलेगी ।
एक समय था कि जब रीवा जिले के पुलिस अधीक्षक विवेक सिंह और पूर्व पुलिस अधीक्षक आबिद खान हुआ करते थे जरा सी पुलिस की लापरवाही पर तत्काल संज्ञान लेते थे और उन पुलिस कर्मियों को उनकी गलतियों का उन्हें एहसास दिलाते थे या तो उन्हें लाइन हाजिर किया जाता था या फिर सीधे निलंबन आदेश जारी कर दिया जाता था मगर अब देखा जाता है कि रीवा पुलिस लगातार अनुशासनहीनता करती जा रही है जहां जिले के आला अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हुए हैं ।
हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें
सोशल मीडिया पर ट्रैफिक पुलिस के एक पुलिस कर्मी का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और आम जनता के बीच अधिकारों की जंग को बहस के केंद्र में ला खड़ा किया है।
वायरल वीडियो में एक ई-रिक्शा के भीतर बैठे पुलिसकर्मी से एक ऑटो चालक तीखे सवाल-जवाब करता नजर आ रहा है। वीडियो बना रहा युवक पुलिसकर्मी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहता है कि “गाड़ी के कागजात जांचना और नियम लागू कराना आरटीओ और अधिकृत अधिकारियों का काम है, बिना वजह डंडा मारकर आम जनता को परेशान करना या गाड़ी से उतारना सही नहीं है
कानून की समानता पर उठे सवाल
सड़कों पर अक्सर आम नागरिकों पर जरा-सी लापरवाही के लिए चालान की गाज गिराने वाला महकमा जब खुद सवालों के घेरे में आता है, तो जनता का आक्रोश भड़कना स्वाभाविक है । क्या वर्दी की आड़ में आम चालकों और यात्रियों पर अनुचित दबाव बनाना न्यायसंगत है?
डिजिटल सजगता की ताकत: आज के दौर में स्मार्टफोन और सोशल मीडिया आम जनता का वह हथियार बन चुके हैं, जो कानून के रखवालों को भी उनकी मर्यादा और सीमा याद दिलाने में सक्षम हैं।
अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
