मऊगंज में पुलिस पर हमला; 39 आरोपी गिरफ्तार 10 अभी भी फरार, पुलिस ने 88 दिन बाद पेश किया चालान

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मध्य प्रदेश का 53वां जिला मऊगंज अपनी एक घटना को लेकर तमाम बड़े न्यूज चैनलों के हेडलाइन में था। 15 मार्च को हुई इस घटना ने सीएम मोहन यादव सरकार को अलर्ट मोड पर ला दिया था। जिसके बाद डीआईजी कलेक्टर और एसपी के ट्रांसफर किए गए थे। शाहपुर थाना क्षेत्र के गडरा गांव में हुई इस पूरी वारदात के 88 दिन यानी कि तीन महीने बीत रहे है। जिसमें 39 आरोपी सलाखों के पीछे है। 10 आरोपियों को अभी भी पुलिस नहीं ढूंढ पाई है।

क्या था मऊगंज गडरा गांव कांड

दरअसल, 15 मार्च पुलिस को सूचना मिलती है कि गडरा गांव में एक युवक सनी द्विवेदी को कुछ ग्रामीण बंधक बनाए हुए है। जानकारी मिलते ही 10 की संख्या में पुलिस मौके पर पहुंची जिसमें डीएसपी, टीआई कई पुलिसकर्मी और वहां मौजूद तहसीलदार थे। ग्रामीणों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। इस दौरान पुलिस को भनक लगी कि जिन लोगों ने युवक सनी द्विवेदी को बंधक बनाया है उसकी पीटपीटकर हत्या कर दी है। पुलिस के एक्शन में आने से पहले तैयार आरोपियों ने पत्थरबाजी और मारपीट शुरू कर दी जिसमें तहसीलदार को बुरी तरह पीटा एक एसआई को इतना मार दिया कि उपचार के दौरान उनकी मृत्यु हो गई, डीएसपी अंकिता शुल्या अपनी जान बचाने के लिए खुद को एक कमरे में बंद कर लिया। इसके बाद हेड क्वार्टर को सूचना दी गई तत्काल भारी पुलिस बल गडरा गांव पहुंची और बचे हुए पुलिसकर्मियों का रेस्क्यू किया।

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मऊगंज गडरा गांव कांड में पुलिस ने पेश किया चालान

मऊगंज गडरा गांव कांड के 88 दिन यानी कि तीन महीने पूरे हो रहे है। जिसमें पुलिस ने एक्शन लेते हुए गांव के करीब 39 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में लिया था। जिसमें से 4 नाबालिग जमानत पर है। 10 को अभी भी पुलिस नहीं ढूंढ पाई है। एएसपी विक्रम सिंह 5:00 प्रेस वार्ता कर चालान पेश करने की पुष्टि की है। पुलिस अब फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर पूरा ध्यान कर रही। गांव में अभी भी धारा 144 लागू है। सेशन कोर्ट मऊगंज में यह मामला ट्रायल के लिए चलेगा।

सीएम मोहन यादव ने लिया था एक्शन

इस पूरी वारदात के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव एक्शन मोड में नजर आए। उन्होंने ने तत्कालीन मऊगंज कलेक्टर अजय श्रीवास्तव और पुलिस अधीक्षक रसना ठाकुर को हटाकर नई पदस्थापना की। इसके बाद उन्होंने डीआइजी और आईजी का भी ट्रांसफर कर दिया। और उन्होंने अधिकारियों को तत्काल निर्देश दिया कि ऐसी घटनाएं दोबारा ना घटे।

पुलिस मवेशियों की कर रही थे सेवा

मऊगंज गडरा कांड के बाद पूरा गांव खाली हो गया था। गांव के सभी मर्द फरार हो गए थे। घर के दरवाजों में ताले लगे हुए थे। ऐसे में घर और लोगों के मवेशियों की देखभाल पुलिस कर रही थी। मवेशियों के लिए खाना पानी की व्यवस्थाएं पुलिस के द्वारा की जा रही थी। पुलिस प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा था कि जो निर्दोष है वह अपने घर वापस लौट आए।

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