Narottam Mishra Ticket Cut;सुलगता सवाल वजूद मिटाने की राजनीति या आत्मघाती कदम? अपनों को ही किनारे कर ‘डकैत’ बनने की राह पर नेता

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Narottam Mishra Ticket Cut; बड़ा सवाल: जो चेहरा सरकार बनाने और बचाने का दम रखता था, आज वह संगठन के लिए अचानक ‘बोझ’ कैसे हो गया रीवा सहित पूरे विंध्य में उबाल, 10 हजार से ज्यादा समर्थकों का फूटा गुस्सा मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों जो कुछ चल रहा है, उसने लोकतंत्र और सांगठनिक शुचिता के दावों की पोल खोलकर रख दी है। सत्ता के नशे में चूर राजनेता आज जिस तरह अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार रहे हैं, उसने जनता और कार्यकर्ताओं के बीच यह बड़ा विमर्श खड़ा कर दिया है कि क्या वाकई आज की राजनीति सिर्फ ‘इस्तेमाल करो और फेंको’ की नीति पर आ चुकी है बीते शुक्रवार को हुए एक बड़े सियासी फैसले के बाद उपजा जनआक्रोश इस बात का साफ गवाह है कि जब आप जमीन से जुड़े कद्दावर चेहरों का राजनीतिक कत्ल करने की कोशिश करते हैं, तो जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर हो जाती है।

Narottam Mishra Ticket Cut;निष्ठा का यह कैसा सिला? कद्दावर चेहरों को हाशिए पर धकेलने का खेल Bjp नेता बालेन्द्र शुक्ला का करारा जबाब

रीवा जिले जे गुढ़ विधानसभा क्षेत्र के प्रत्याशी व भाजपा नेता बालेन्द्र शुक्ला ने दतिया उपचानुव से नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद जमकर हमला बोला है भारतीय जनता पार्टी ने सूबे में 29 की 29 लोकसभा सीटें जीतकर इतिहास भले ही रच दिया हो, लेकिन इस इतिहास को खून-पसीने से लिखने वाले नायकों के साथ जो सलूक किया जा रहा है, वह बेहद हैरान करने वाला है। प्रदेश की राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले और ब्राह्मण समाज के सबसे बड़े चेहरों में शुमार नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटना महज़ एक सांगठनिक फैसला नहीं है, बल्कि यह निष्ठावान नेताओं को सियासी तौर पर ठिकाने लगाने की एक सोची-समझी क्रूर रणनीति का हिस्सा नजर आता है।

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यह वही नरोत्तम मिश्रा हैं जिन्होंने मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार गिराकर भाजपा की वापसी कराने में अपनी राजनैतिक बिसात बिछाई थी। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार बनवाने में जिनकी भूमिका सबसे केंद्रीय और निर्विवाद थी, आज सत्ता की मलाई चाटने वाले नए मठाधीशों ने उन्हें एक झटके में हाशिए पर धकेल दिया है।

Narottam Mishra Ticket Cut; सड़कों पर फूटा आक्रोश, जनता ने घेरा प्रशासन; पथराव की नौबत

नेताओं के बंद कमरों में लिए गए इस फैसले का नतीजा यह हुआ कि पूरे प्रदेश, खासकर विंध्य और बुंदेलखंड के इलाकों में जन-आक्रोश की ज्वाला भड़क उठी है। जहाँ प्रशासनिक हलकों में महज कुछ हजार समर्थकों के जुटने का अनुमान था, वहीं कल 10 हजार से ज्यादा आक्रोशित लोगों ने प्रशासन को घेर लिया, जिसके बाद स्थिति पथराव तक जा पहुँची। यह गुस्सा किसी एक टिकट के लिए नहीं है, यह गुस्सा उस तानाशाही सोच के खिलाफ है जो कार्यकर्ताओं और जनता की भावनाओं को अपने जूतों तले कुचलना चाहती है।

Narottam Mishra Ticket Cut; श्वेतपोशों के अहंकार पर भारी जनता का दर्द: ‘दादा’ के बिना सूना हुआ रीवा व भोपाल

मध्य प्रदेश की राजनीति में विंध्य के शेर कहे जाने वाले स्वर्गीय पंडित श्रीनिवास तिवारी के बाद अगर रीवा से भोपाल के वल्लभ भवन या मंत्रियों के बंगलों में आम जनता की कोई सीधी सुनवाई होती थी, तो वह नरोत्तम मिश्रा का ठिकाना था। विंध्य का कोई गरीब, शोषित या पीड़ित जब भोपाल जाकर कहता था कि—दादा हम रीवा से आए हैं—तो नरोत्तम मिश्रा उसे सामने बिठाते थे।

वे आज के उन ‘कागजी और मठाधीश नेताओं’ की तरह बहाने नहीं बनाते थे कि—”फलां कलेक्टर से हमारी नहीं बनती” या “स्थानीय विधायक या मंडल अध्यक्ष से पूछकर बताएंगे”। वे सीधे ऑन द स्पॉट फोन लगाकर आम आदमी का काम करवाते थे। आज ऐसे जननेता का पर कतरने से न सिर्फ रीवा की सभी 6 व मउगंज की 2 विधानसभा सीटों पर पार्टी के समीकरण ध्वस्त होने की कगार पर हैं, बल्कि उत्तर प्रदेश तक फैले ब्राह्मण समाज में एक तीखा और गलत संदेश गया है। इस फैसले से आहत होकर समर्थकों का कहना है कि कल कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले, यह नेताओं के पतन की शुरुआत है।

Narottam Mishra Ticket Cut; नेताओं को जनता की खुली चेतावनी

 

सत्ता के शीर्ष पर बैठे सूरमाओं को यह याद रखना होगा कि जनता सब देख रही है। जब बड़े चेहरों को किनारे किया जाता है, तो संगठन के भीतर की दरारें बड़ी खाई बन जाती हैं। अगर समय रहते इस तानाशाही और गुटबाजी की राजनीति पर लगाम नहीं कसी गई, तो आने वाले समय में जनता का यह आक्रोश बड़े-बड़ों के सिंहासन को हिलाकर रख देगा।

 

दिग्विजय सिंह को पार्टी से हटाना चाहिए , मध्य प्रदेश में कांग्रेस का अस्तित्व बरकरार रहे

2029 विधानसभा चुनाव में अगर कांग्रेस को मध्य प्रदेश में अपनी जगह पक्की करनी है तो कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह को पार्टी से ही हटाना पड़ेगा बालेन्द्र शुक्ला का कांग्रेस पार्टी पर करारा हमला उन्होंने कहा कि अजय सिंह राहुल जैसे नेता मध्य प्रदेश के बड़े चेहरे हैं उन्हें मध्य प्रदेश का चीफ  बना देना चाहिए क्योंकि दिग्विजय से के कहीं ना कहीं पार्टी में लगातार बने रहने से कांग्रेस को नुकसान है दिग्विजय सिंह के पार्टी में रहने से कई नेताओं में आपसी मनमोटाव भी रहता है जिसके चलते कांग्रेस पार्टी विधानसभा चुनाव में हार जाती है अजय सिंह राहुल को विन्ध्य की जनता नेता मानती है अगर अजय सिंह राहुल को मध्य प्रदेश कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष बना दिया जाए तो कांग्रेस 2029 विधानसभा चुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकता है मध्य प्रदेश में अजय सिंह राहुल जैसे नेता नहीं बचे हुए हैं क्योंकि मध्य प्रदेश में कोई  नेता है तो वह अजय सिंह राहुल है।Narottam Mishra Ticket Cut

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