Rewa news; रीवा में ‘सिंडिकेट राज’: आबकारी विभाग कुंभकर्णी नींद में, शराब माफिया सरेआम लूट रहा जनता की जेब

Share With Others

Rewa news; रीवा। विंध्य की हृदयस्थली रीवा इन दिनों एक नए और खौफनाक खेल का गवाह बन रही है। यह खेल है शराब की ‘ओवर रेटिंग’ का, जिसे रीवा के रसूखदार शराब व्यापारी खुलेआम अंजाम दे रहे हैं। शहर के चप्पे-चप्पे पर स्थित मदिरा दुकानों में प्रिंट रेट (MRP) महज एक कागजी टुकड़ा बनकर रह गया है। सरकार की नाक के नीचे जनता की जेब पर खुलेआम डाका डाला जा रहा है, और इस पूरे महालूट के खेल पर जिले का आबकारी विभाग गहरी नींद का नाटक कर चादर ताने सोया हुआ है।

सवाल यह उठता है कि क्या रीवा जिला प्रशासन ने शराब माफियाओं के आगे घुटने टेक दिए हैं? या फिर इस बेखौफ लूट में खाकी और खादी की मूक सहमति शामिल है?

हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें

लूट’ का नया ठिकाना बनीं रीवा की ये दुकानें

रीवा शहर का शायद ही कोई ऐसा कोना बचा हो, जहाँ शराब ठेकेदारों की मनमानी न चल रही हो। शहर के प्रमुख चौराहों और इलाकों से लगातार आ रही शिकायतें इस बात का सबूत हैं कि यहाँ कानून का नहीं, बल्कि माफियाओं का सिक्का चलता है:
ट्रांसपोर्ट नगर और ढेकहा:यहाँ रात होते ही मजदूरी करने वालों और आम जनता से तय कीमत से 80 से 100 रुपये अतिरिक्त वसूले जा रहे हैं।
जय स्तंभ और सिरमौर चौक: शहर के इन सबसे व्यस्त इलाकों में काउंटर पर सरेआम बहस होती है, लेकिन ठेकेदारों के लठैतों के आगे ग्राहक बेबस हैं।
करहिया, झिरिया और उर्रहट: इन क्षेत्रों की दुकानों में तो जैसे एमआरपी (MRP) का कोई वजूद ही नहीं बचा है।
समान तिराहा, रतहरा और पीटीएस:यहाँ की दुकानों पर प्रिंट रेट पूछना ही गुनाह माना जाता है। विरोध करने पर सीधे मारपीट और अभद्रता की जाती है।

See also  Rewa news; सेमरिया तहसील में सुशासन तार-तार: सीमांकन के बदले15,000 की घूस, मना करने पर महिला पटवारी ने दी 'फर्जी केस' की धमकी बृद्ध ने लगाए गंभीर आरोप

सरकार को करोड़ों का चूना, जनता की जेब खाली

यह सिर्फ आम जनता की जेब पर डाका नहीं है, बल्कि सीधे तौर पर मध्य प्रदेश सरकार के राजस्व को लगाया जा रहा एक बड़ा चूना है। नियम के मुताबिक, हर बोतल की बिक्री का पक्का बिल मिलना चाहिए और उसे तय एमआरपी पर ही बेचा जाना चाहिए। लेकिन रीवा में:
किसी भी दुकान पर कैश मेमो (बिल) नहीं दिया जा रहा है ताकि टैक्स चोरी की जा सके।

. डिजिटल पेमेंट (PhonePe/UPI) लेने से साफ मना किया जाता है या फिर उस पर एक्स्ट्रा चार्ज मांगा जाता है, ताकि ब्लैक मनी का यह खेल आसानी से चलता रहे।
रीवा के सूरा प्रेनी  का दर्द:”दुकान पर रेट लिस्ट गायब रहती है। जो शराब 150 रुपये की है, वह 180 से 200 रुपये में बेची जा रही है। अगर कोई विरोध करता है, तो काउंटर के पीछे खड़े गुंडे धमकाते हैं। आखिर हम शिकायत लेकर कहाँ जाएँ, जब सुनने वाला ही बिका हुआ हो?”

आबकारी विभाग की ‘रहस्यमयी’ खामोशी

इस पूरी खेल में सबसे शर्मनाक भूमिका जिला आबकारी विभाग की है। जिस विभाग का काम इन दुकानों पर निगरानी रखना और अवैध वसूली को रोकना है, वह शुतुरमुर्ग की तरह रेत में सिर छिपाए ac की हवा लेते बैठा है।
क्या आबकारी अधिकारी और जिला प्रशासन को शहर के बीचो-बीच चल रही इस खुली लूट की भनक नहीं है? या फिर हर महीने ‘सुविधा शुल्क’ के नाम पर मोटी रकम तिजोरियों तक पहुँच रही है, जिसके बदले रीवा की जनता को ठेकेदारों के रहमोकरम पर छोड़ दिया गया है?

See also  Rewa news: कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता मध्य प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्यक्ष श्री युक्त श्रीनिवास तिवारी की 100वी शताब्दी जयंती के रूप में मनाया जाएगा

जिला प्रशासन के लिए चेतावनी

रीवा की जनता अब इस गुंडागर्दी और आर्थिक शोषण को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। अगर जिला प्रशासन और सूबे की सरकार ने तत्काल इन सिंडिकेटबाजों पर नकेल नहीं कसी, तो वह दिन दूर नहीं जब यह आक्रोश सड़कों पर उतरेगा।
मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और आबकारी मंत्री ध्यान दें–रीवा में कानून का राज है या शराब माफियाओं का? इन दुकानों का लाइसेंस तुरंत रद्द किया जाए, औचक निरीक्षण हो, और दोषी आबकारी अधिकारियों को तत्काल सस्पेंड किया जाए। रीवा की जनता अब आर-पार की लड़ाई के मूड में है! देखा जाए तो रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ला मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री भी हैं उनके ही क्षेत्र में शराब माफियाओं के द्वारा रीवा की जनता को लूटा जा रहा है हर शराब  को बोतल में ₹50 से लेकर 100 रुपये की लूट की जा रही है ।

Leave a Comment