Rewa news; रीवा से झकझोर देने वाला वीडियो: “साहब गरीब हैं, 1500 नहीं हैं…गिड़गिड़ाता रहा बाप, मुंह पर फेंके कागज ,, आधिकारिक बयान आना बाकी

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Rewa news; रीवा के बाल सुधार गृह का काला सच: जमानत के बाद भी मासूम को छोड़ने के लिए मांगी 1500 की घूस, पैसे न मिलने पर मुंह पर  कागज फेकने के लगे गंभीर आरोप

रीवा। मध्य प्रदेश में सुशासन और कानून व्यवस्था के दावों की धज्जियां उड़ाता हुआ एक बेहद शर्मनाक और दिल दहला देने वाला मामला रीवा के बाल सुधार गृह से सामने आया है। इस संस्थान की चौखट पर जो हुआ, उसने मानवता और प्रशासनिक ईमानदारी को तार-तार कर दिया है।
एक तरफ सूबे के मुखिया भ्रष्टाचार पर ‘जीरो टॉलरेंस’ का ढिंढोरा पीटते हैं, वहीं दूसरी तरफ रीवा के बाल सुधार गृह में एक बेबस, गरीब बाप अपने मासूम बच्चे की रिहाई के लिए गिड़गिड़ाता रहा, लेकिन सिस्टम के संवेदनहीन नुमाइंदों का दिल नहीं पसीजा।

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1500 के लिए 2 घंटे तक बंधक बना रहा किशोर, गिड़गिड़ाते रहे परिजन

घटना का एक लाइव वीडियो सामने आया है जिसमें पीड़ित पिता  और स्थानीय लोग प्रशासनिक गुंडागर्दी और खुलेआम चल रही अवैध वसूली की पोल खोल रहे हैं। पीड़ित  ने रोते हुए बताया कि उनके 16 वर्षीय बेटे को एक लड़ाई-झगड़े के मामले में
बाल सुधार गृह लाया गया था।

अदालत ने बकायदा बच्चे की जमानत के आदेश जारी कर दिए थे।
जमानत की कॉपी रिहाई आदेश हाथ में होने के बावजूद, बाल संप्रेक्षण गृह
(बाल सुधार गृह) के कर्मचारियों ने बच्चे को छोड़ने के एवज में 1500 की रिश्वत मांग ली।

साहब! हम गरीब आदमी हैं, तीन दिन से भूखे-प्यासे दौड़ रहे हैं। हमारे पास पैसे नहीं हैं।

पीड़ित पिता की मिन्नत बाल सुधार गृह

के बाबुओं के सामने मिन्नतें। लेकिन रिश्वतखोरों पर इस बेबसी का कोई असर नहीं हुआ। जब पिता ने पैसे देने में असमर्थता जताई, तो कर्मचारियों ने सारी हदें पार करते हुए जमानत के कागजात पिता के मुंह पर वापस फेंक दिए और साफ कह दिया कि जाओ, अब काम नहीं होगा!”
शाम 5:00 बजे से लेकर रात 8:00 बजे तक, पूरे 2 घंटे तक परिजन बाल सुधार गृह के बाहर अधिकारियों और कर्मचारियों के सामने हाथ जोड़कर बच्चे को छोड़ने की भीख मांगते रहे, लेकिन बिना पैसे के सिस्टम टस से मस नहीं हुआ।

मीडिया का कैमरा देखते ही फूले हाथ-पांव, आनन-फानन में बिना पैसे के 3 घंटे बाद छोड़ा बच्चा

भ्रष्टाचार का यह खेल तब तक चलता रहा जब तक कि वहां मीडिया नहीं पहुंचे। जैसे ही मीडियाकर्मियों ने इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाना शुरू किया और कर्मचारियों को यह चेतावनी दी कि “यह वीडियो सीधे न्यूज़ चैनल पर जाएगा”, वैसे ही रिश्वतखोरों के होश उड़ गए।

कार्रवाई के डर से सहमे कर्मचारियों ने अंदर ले जाकर बिना एक भी रुपया लिए चुपचाप नाबालिक बच्चे को रिहा कर दिया। यह इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि किशोर कारागार के भीतर किस कदर अवैध वसूली का सिंडिकेट सक्रिय है।

स्थानीय निवासियों का फूटा गुस्सा:

“न पानी की व्यवस्था, न बैठने की कुर्सी… ऊपर से खुली लूट! मौके पर मौजूद स्थानीय नागरिक ने बताया कि यह बाल न्यायालय रीवा के रिहाइशी इलाके गड़रिया में स्थित है, जहां दूर-दूर से गरीब लोग आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि:
यहाँ आने वाले पीड़ितों के लिए पीने के पानी तक की कोई व्यवस्था नहीं है।
दूर-दराज से आने वाले बुजुर्गों और महिलाओं के लिए बैठने के लिए एक कुर्सी तक मयस्सर नहीं है।
सबसे गंभीर आरोप यह कि यहाँ आने वाले हर एक बच्चे के परिजन से अलग-अलग किश्तों में अवैध वसूली की जाती है।

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