Rewa news; दावों की ‘सफाई’ या वादों में ‘जलभराव’ रीवा में मानसून की आहट के बीच प्रशासनिक सुस्ती पर अविराज का बड़ा हमला

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Rewa news; रीवा नगर – हर साल आसमान में बादल घिरते ही रीवा वासियों के दिलों की धड़कनें बढ़ जाती हैं। वजह मानसून की खुशी नहीं, बल्कि उसके साथ आने वाली तबाही और जलभराव का डर है। इस बार भी मानसून की दस्तक के साथ ही शहर की बदहाल जल निकासी व्यवस्था की पोल खुलने लगी है। इस गंभीर मुद्दे पर मुखर होते हुए समाजसेवी अविराज ने प्रशासनिक तैयारियों को आड़े हाथों लिया है और जमीनी हकीकत को बेहद चिंताजनक बताया है।

 

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कागजों पर ‘चकाचक’ नाले, जमीन पर कचरे का अंबार

समाजसेवी अविराज ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि हर साल नगर निगम और प्रशासन द्वारा नालों की सफाई के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। भारी-भरकम बजट के आंकड़े पेश कर कागजों पर शहर को बाढ़ सुरक्षित घोषित कर दिया जाता है।

 

Aviraj

लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि:

अधूरी और कागजी सफाई:शहर के छोटे-बड़े नालों की सफाई या तो अधूरी छोड़ दी गई है या फिर सिर्फ मुख्य सड़कों के किनारे औपचारिकता पूरी कर ली गई है।

घंटों का जाम, मिनटों की बारिश में:स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि मात्र एक घंटे की सामान्य बारिश भी रीवा के प्रमुख चौराहों को तालाब में तब्दील करने के लिए काफी है।

प्रशासनिक तैयारियां सिर्फ फाइलों और बैठकों तक सीमित हैं। अगर जमीनी स्तर पर काम हुआ होता, तो पहली ही बारिश में शहर घुटनों तक पानी में न डूबता

निचले इलाकों में खौफ का माहौल: क्या फिर दोहराएगी पुरानी कहानी

अविराज ने शहर के संवेदनशील और निचले इलाकों की स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि हर साल बारिश का मौसम इन इलाकों में रहने वाले गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए आफत बनकर आता है।

भय के साये में लोग: जलभराव के कारण घरों में पानी घुसना, सामान की बर्बादी और संक्रामक बीमारियों का खतरा हर वक्त मंडराता रहता है।

स्थायी समाधान नदारद: सालों से यह समस्या जस की तस बनी हुई है। प्रशासन अस्थायी रूप से पानी निकालने के इंतजाम तो करता है, लेकिन ड्रेनेज सिस्टम को हमेशा के लिए दुरुस्त करने की इच्छाशक्ति आज तक नहीं दिखी।

बाढ़ जैसे हालात’ की चेतावनी: अब तो जागिए हुक्मरान

अविराज ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि प्रशासन ने अपनी कुंभकर्णी नींद नहीं तोड़ी, तो इस बार भी रीवा को बाढ़ जैसी भयावह स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने जनहित में प्रशासन के सामने 3 प्रमुख मांगें रखी हैं:

1.गहराई से सफाई और मॉनिटरिंग: नालों की केवल ऊपरी सफाई न कर, उनकी तली से सिल्ट निकाली जाए और इस काम की वीडियो-ग्राफिक निगरानी हो।

2. अतिक्रमण पर चले हथौड़ा:जल निकासी के मार्गों और नालों पर किए गए अवैध निर्माण व अतिक्रमण को तत्काल हटाया जाए, जो पानी रुकने का सबसे बड़ा कारण हैं।

3. इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम का गठन: जलभराव की स्थिति में त्वरित राहत पहुंचाने के लिए हर वार्ड स्तर पर आपदा प्रबंधन टीम को सक्रिय किया जाए।

दावों से नहीं, काम से थमेगा पानी

समाजसेवी अविराज की यह आवाज केवल एक बयान नहीं, बल्कि रीवा के आम नागरिकों की वो पीड़ा है जिसे वे हर साल भुगतते हैं। टैक्स देने वाली जनता को सिर्फ आश्वासन नहीं, बल्कि जलभराव से मुक्ति चाहिए। अब देखना यह है कि प्रशासन इस चेतावनी को कितनी गंभीरता से लेता है, या फिर इस बार भी रीवा की किस्मत को ‘राम भरोसे’ छोड़ दिया जाएगा।

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