Rewa News: रीवा के अविराज ने 3 साल की उम्र में बनाया विश्व रिकॉर्ड, छोटी सी उम्र बड़ा कारनामा जान हो जायेंगे हैरान 

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रीवा के 3 साल के अविराज तिवारी ने अंग्रेजी के सबसे कठिन और लंबे शब्द बोलकर वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स लंदन में जगह बनाई। जानिए कैसे इतनी छोटी उम्र में हासिल की यह बड़ी उपलब्धि।

मध्य प्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो न सिर्फ स्थानीय लोगों बल्कि पूरे देश को गर्व महसूस करा रही है। अक्सर हम बड़े बच्चों या युवाओं की उपलब्धियों के बारे में सुनते हैं, लेकिन इस बार कहानी एक ऐसे नन्हे बच्चे की है, जिसने अपनी उम्र से कहीं आगे जाकर इतिहास रच दिया है।

रीवा के बनकुइयां गायत्री नगर में रहने वाले महज 3 साल के अविराज तिवारी ने अंग्रेजी भाषा के सबसे कठिन और लंबे शब्दों को बोलकर एक ऐसा मुकाम हासिल किया है, जिसे पाना हर किसी के बस की बात नहीं होती। इस उपलब्धि के साथ अविराज का नाम World Book of Records (लंदन) में दर्ज हो चुका है।

 इतनी छोटी उम्र में बड़ा कारनामा Rewa News

आमतौर पर 3 साल के बच्चे बोलना, खेलना और दुनिया को समझना सीख रहे होते हैं। लेकिन अविराज ने इस उम्र में अंग्रेजी के उन जटिल शब्दों को न सिर्फ पहचाना बल्कि उन्हें सही उच्चारण के साथ बोलकर सबको हैरान कर दिया।

जानकारी के मुताबिक, अविराज ने दुनिया के पांच सबसे कठिन अंग्रेजी शब्दों को बहुत कम समय में बोलने की क्षमता विकसित की। यह उपलब्धि केवल याददाश्त का खेल नहीं है, बल्कि इसमें उच्चारण, ध्यान और अभ्यास का भी बड़ा योगदान होता है।

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 माता-पिता की भूमिका बनी सफलता की कुंजी Rewa News

अविराज की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता की मेहनत और समझदारी साफ नजर आती है। उनकी मां आकांक्षा तिवारी बताती हैं कि बच्चे में असाधारण प्रतिभा के संकेत उन्हें तब ही मिलने लगे थे, जब वह महज 1 साल का था।

“वह शब्दों को जल्दी पकड़ता था और अलग तरीके से प्रतिक्रिया देता था। तभी हमें लगा कि इसे सही दिशा दी जाए,” उन्होंने बताया।

इसके बाद माता-पिता ने बच्चे पर किसी तरह का दबाव डालने के बजाय उसकी रुचि के अनुसार उसे सीखने का माहौल दिया। धीरे-धीरे अविराज ने कठिन अंग्रेजी शब्दों को समझना और बोलना शुरू कर दिया।

 रिकॉर्ड तक पहुंचने का सफर Rewa News

यह उपलब्धि अचानक नहीं आई। इसके पीछे महीनों की तैयारी और प्रक्रिया शामिल रही।

परिवार के मुताबिक, करीब 4 महीने पहले उन्होंने रिकॉर्ड के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू की। इसमें जरूरी दस्तावेज और वीडियो सबूत तैयार करने में लगभग 3 महीने का समय लगा। सभी औपचारिकताओं को पूरा करने के बाद आखिरकार World Book of Records (London) की ओर से अविराज को विश्व रिकॉर्ड सर्टिफिकेट जारी किया गया।

 रीवा से दुनिया तक पहुंची प्रतिभा

रीवा, जो आमतौर पर अपने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, अब एक नन्हे बच्चे की उपलब्धि के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में है।

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अविराज की इस उपलब्धि के बाद पूरे जिले में खुशी का माहौल है। स्थानीय लोग, रिश्तेदार और जानने वाले परिवार को बधाई दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी यह खबर तेजी से वायरल हो रही है।

 क्या खास बनाता है अविराज को?

विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी कम उम्र में भाषा की जटिलता को समझना और उसे सही तरीके से बोल पाना असाधारण क्षमता का संकेत है।

तेज याददाश्त

स्पष्ट उच्चारण

जल्दी सीखने की क्षमता

लगातार अभ्यास

ये सभी गुण अविराज को अन्य बच्चों से अलग बनाते हैं।

समाज के लिए एक संदेश

अविराज की कहानी सिर्फ एक रिकॉर्ड की कहानी नहीं है, बल्कि यह हर माता-पिता के लिए एक सीख भी है। बच्चों में छिपी प्रतिभा को पहचानना और उसे सही दिशा देना कितना जरूरी है, यह इस उदाहरण से साफ समझ आता है।

हर बच्चा अलग होता है, और सही माहौल मिलने पर वह कुछ भी हासिल कर सकता है।

पड़ोसियों ने अविराज को सराहा 

अविराज की इस उपलब्धि के बाद सिर्फ परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे मोहल्ले में खुशी का माहौल है। बांकुइया गायत्री नगर के पड़ोसियों का कहना है कि अविराज बचपन से ही कुछ अलग था।

पड़ोस में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया, “हमने उसे बहुत छोटी उम्र से ही शब्दों को जल्दी पकड़ते हुए देखा है। जब दूसरे बच्चे सामान्य बोलना सीख रहे होते हैं, तब अविराज कठिन शब्दों को दोहराता था। अब उसका नाम रिकॉर्ड में आया है, तो हमें बिल्कुल भी हैरानी नहीं हुई, बल्कि गर्व महसूस हो रहा है।”

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वहीं एक अन्य पड़ोसी महिला ने कहा, “इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करना आसान नहीं है। अविराज ने पूरे इलाके का नाम रोशन किया है। हम सभी उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं।”

स्थानीय लोगों का मानना है कि अगर बच्चों को सही मार्गदर्शन और माहौल मिले, तो वे किसी भी क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल कर सकते हैं। अविराज की सफलता इसी बात का जीता-जागता उदाहरण बनकर सामने आई है।

आगे क्या?

परिवार अब अविराज की प्रतिभा को और निखारने की योजना बना रहा है। उनका कहना है कि वे बच्चे पर किसी तरह का दबाव नहीं डालेंगे, बल्कि उसकी रुचि के अनुसार उसे आगे बढ़ने देंगे।

संभव है कि आने वाले समय में अविराज और भी बड़े रिकॉर्ड बनाए और देश का नाम रोशन करे।

रीवा के छोटे से इलाके से निकलकर दुनिया के मंच तक पहुंचने वाले अविराज तिवारी ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। सही मार्गदर्शन, धैर्य और मेहनत के साथ कोई भी बच्चा असाधारण ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।

यह कहानी सिर्फ एक रिकॉर्ड की नहीं, बल्कि सपनों, मेहनत और विश्वास की कहानी है जो हर किसी को प्रेरित करती है।

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