Rewa- जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं का दम घुटता नजर आ रहा है। गंगेव जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत बुढ़वा में आपातकालीन 108 एंबुलेंस सेवा की घोर लापरवाही के कारण एक शिक्षक की अकाल मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि समय पर सूचना देने के बावजूद एंबुलेंस करीब दो घंटे देरी से पहुंची, जिसके चलते प्राथमिक उपचार न मिलने से शिक्षक ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।
सांस लेने में हुई थी तकलीफ
मिली जानकारी के अनुसार, शासकीय प्राथमिक शाला गोदरी नंबर 2 में पदस्थ शिक्षक कमलेश कोल की अचानक तबीयत बिगड़ गई और उन्हें सांस लेने में गंभीर तकलीफ होने लगी। परिजनों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए तत्काल 108 आपातकालीन सेवा को कॉल किया। कंट्रोल रूम से परिजनों को ढांढस बंधाया गया कि एंबुलेंस 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंच रही है।
खाट पर लादकर मुख्य मार्ग तक लाए परिजन
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एंबुलेंस के इंतजार में समय बीतता देख और मरीज की बिगड़ती हालत को संभालते हुए परिजनों ने हिम्मत दिखाई। गांव में पक्के रास्ते के अभाव के चलते परिजन मरीज को खाट पर लादकर किसी तरह वेयरहाउस के पास मुख्य मार्ग तक ले आए। लेकिन वहां पहुंचने के बाद भी एंबुलेंस का इंतजार खत्म नहीं हुआ। परिजनों का कहना है कि बार-बार फोन लगाने के बावजूद गाड़ी डेढ़ से दो घंटे बाद पहुंची।
अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
देरी से पहुंची एंबुलेंस से जब शिक्षक को अस्पताल ले जाया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल में तैनात डॉक्टर ने स्वास्थ्य परीक्षण एवं सीपीआर देने के बाद शिक्षक कमलेश कोल को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर के मुताबिक, मरीज को जब अस्पताल लाया गया तब उनकी पल्स बंद थी और काफी समय पहले ही उनकी मृत्यु हो चुकी थी।
परिजनों में भारी आक्रोश,
कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
शिक्षक की मौत से परिजनों और स्थानीय ग्रामीणों में गहरा रोष व्याप्त है। परिजनों का साफ तौर पर कहना है कि यदि 108 एंबुलेंस समय पर आ जाती और उन्हें समय रहते चिकित्सीय सुविधा मिल जाती तो शिक्षक कमलेश की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना ने एक बार फिर जिले की बदहाल आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं और प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है।
अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
