Rewa news: मध्य प्रदेश के रीवा ज़िले में किसानों के साथ हुई एक शर्मनाक घटना ने सरकारी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। करहिया मंडी में घंटों से खाद के लिए इंतज़ार कर रहे किसानों पर पुलिस ने बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया, जिससे पूरे इलाक़े में तनाव फैल गया है।
यह घटना तब हुई जब सैकड़ों किसान सुबह से ही खाद लेने के लिए लंबी कतारों में खड़े थे। किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने समय पर खाद की व्यवस्था नहीं की, जिसके कारण उन्हें भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। अधिकारियों की इस लापरवाही और वितरण में हो रही देरी से किसानों का सब्र टूट गया और उनका गुस्सा भड़क उठा।
हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया, लेकिन यह बल प्रयोग जल्द ही बर्बर लाठीचार्ज में बदल गया। कई किसानों को बेरहमी से पीटा गया, जिससे वे ज़मीन पर गिर पड़े। इस अमानवीय कृत्य ने किसानों में और भी ज़्यादा आक्रोश भर दिया।
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सरकार की बेरुखी और किसानों का दर्द
किसानों का कहना है कि वे अपनी फसलों के लिए खाद की कमी से जूझ रहे हैं और जब वे अपनी समस्या अधिकारियों को बताना चाहते हैं तो उन्हें हिंसा का सामना करना पड़ता है। एक किसान ने रोते हुए बताया, “हमारा खून-पसीना अन्न उपजाता है, जिससे इन अधिकारियों और आम लोगों का पेट भरता है, लेकिन मदद के बजाय हम पर लाठी चलाई जा रही है।”
यह घटना मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार की छवि पर भी बड़ा दाग लगा रही है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री इस घटना से बेहद नाराज़ हैं और जल्द ही रीवा के अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई कर सकते हैं।
क्या प्रशासनिक वादे सिर्फ दिखावा हैं
लाठीचार्ज के बाद मौके पर पहुंचे एक अधिकारी ने किसानों को शांत रहने की अपील की और आश्वासन दिया कि खाद का वितरण सुबह 8 बजे से कूपन के ज़रिए किया जाएगा। हालाँकि, किसानों के मन में सवाल है कि जब व्यवस्था पहले से ही इतनी लचर है, तो क्या ये नए वादे सिर्फ़ स्थिति को शांत करने का एक दिखावा मात्र हैं?
यह घटना सिर्फ़ रीवा की नहीं, बल्कि देश भर के किसानों की उस बदहाली को दर्शाती है, जहाँ उन्हें अपनी बुनियादी ज़रूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है और सिस्टम उनकी आवाज़ सुनने के बजाय उन पर लाठी बरसाता है। इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सरकार और प्रशासन की नज़र में अन्नदाता की क्या अहमियत है।
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