Rewa news; खाकी की साख पर बट्टा: नकली सबूत, जाली जब्ती और फर्जी CDR का कोर्ट में हुआ भंडाफोड़; डेढ़ साल जेल में कटवाने वाली पुलिस की उघड़ी पोल अधिवक्ता राजीव सिंह शेरा व उनकी टीम की दमदार पैरवी से बेगुनाह को मिला इंसाफ
मध्य प्रदेश के रीवा शहर के अमहिया थाना क्षेत्र से जुड़े चर्चित वैभव सिंह हत्या कांड में कोर्ट में बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजीव सिंह शेरा ने पुलिस की जांच प्रणाली की धज्जियां उड़ा दी जर्स पर अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अमहिया पुलिस द्वारा गढ़ी गई ‘हत्या की कहानी’ कोर्ट के कटघरे में पूरी तरह बेनकाब हो गई। न्यायालय ने पुलिसिया कार्रवाई में घोर जालसाजी, साक्ष्यों से छेड़छाड़ और भारी विरोधाभास पाते हुए मुख्य आरोपी राजू सिंह बघेल, अजीत पटेल और उनकी साथी महिला को पूर्ण रूप से बाइज्जत बरी कर दिया है।
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वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव सिंह परिहार शेरा ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताएं कि घटना 22 मई 2023 की थी। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अमहिया के अर्जुन नगर ग्राउंड में वैभव सिंह नामक युवक की पत्थरों से कुचलकर और डंडों से हमला कर निर्मम हत्या कर दी गई थी। अमहिया पुलिस ने आनन-फानन में मामला दर्ज कर धारा 302 यानी हत्या के तहत अपराध दर्ज किया और क्षेत्र के प्रतिष्ठित नागरिक राजू सिंह बघेल, अजीत पटेल व एक अन्य को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
Rewa news; कोर्ट में कैसे हुआ पुलिस की मक्कारी का भंडाफोड़?
आरोपियों की तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता शेरा सिंह व उनकी टीम ने कोर्ट में जब पुलिस के सबूतों की परतें खोलीं, तो पूरी पुलिसिया थ्योरी ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।
फर्जी जब्ती और बदला हुआ ‘हत्या का हथियार’
अमहिया पुलिस ने दावा किया था कि आरोपियों के पास से एक बोलेरो वाहन, डंडा और खून से सने कपड़े जब्त कर FSL जांच के लिए भेजे गए थे, जहां ‘मानव रक्त’ की पुष्टि हुई थी। लेकिन जब कोर्ट में जब्ती का डंडा और कपड़े पेश किए गए, तो उनकी लंबाई, चौड़ाई, रंग और बनावट FSL रिपोर्ट से वापस आए सामान से बिल्कुल अलग निकली! कोर्ट ने स्पष्ट माना कि पुलिस ने साक्ष्य खुद गढ़े और टेंपर किए हैं।
Rewa news; CDR और टावर लोकेशन का फर्जीवाड़ा
पुलिस ने आरोपियों को घटनास्थल पर साबित करने के लिए कॉल डिटेल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन का सहारा लिया था। लेकिन जब CAF रिपोर्ट खंगाली गई, तो जिस मोबाइल नंबर की लोकेशन पुलिस दिखा रही थी, वह सिम किसी तीसरे ही व्यक्ति के नाम पर दर्ज निकली! ताज्जुब की बात यह है कि पुलिस ने उस असली सिम मालिक को इस केस में गवाह तक नहीं बनाया।

डेढ़ साल सलाखों के पीछे… आखिर कौन लौटाएगा इनकी बेगुनाही के दिन
आरोपियों के वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव सिंह परिहार ने बताया कि राजू सिंह बघेल का पूर्व में कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं रहा है और वे एक प्रतिष्ठित परिवार से आते हैं। अमहिया पुलिस ने झूठे मुकदमे में फंसाकर बेगुनाहों को करीब डेढ़ साल तक जेल की सलाखों के पीछे रखा। जमानत के बाद चले लंबे ट्रायल के बाद आखिरकार अदालत ने सच्चाई पर मुहर लगाते हुए सभी आरोपियों को दोषमुक्त करार दे दिया।
बचाव पक्ष की मजबूत अधिवक्ता टीम:
इस ऐतिहासिक केस में पीड़ितों की ओर से पैरवी अधिवक्ता राजीव सिंह परिहार, साक्षी सिंह बघेल, गिरीश पटेल, अनिल पाण्डेय, सम्मी शुक्ला, प्रवीन्द्र, प्रतीक और सुरेश विश्वकर्मा द्वारा की गई।
अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
