Rewa News: “एक आदेश से सिस्टम हिला! रीवा में कलेक्टर की सख्त कार्रवाई”

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जिले में प्रशासनिक सख्ती का एक बड़ा उदाहरण सामने आया है। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने जिला पंचायत के अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि अब कोई भी अधिकारी बिना सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के कार्यालय या मुख्यालय से बाहर नहीं रहेगा। यह आदेश हाल ही में हुई एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक के बाद जारी किया गया है, जिसमें कई जिम्मेदार अधिकारी अनुपस्थित पाए गए थे।

दरअसल, जिला पंचायत से संबंधित योजनाओं की समीक्षा के लिए आयोजित बैठक में यह देखने को मिला कि मनरेगा के परियोजना अधिकारी (पीओ) को छोड़कर अधिकांश योजना प्रभारी अधिकारी उपस्थित नहीं थे। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने इसे प्रशासनिक लापरवाही मानते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए। उन्होंने साफ कहा कि इस तरह की कार्यशैली से योजनाओं की मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन पर सीधा असर पड़ता है, जो स्वीकार्य नहीं है।IMG 20260428 WA0009

जारी आदेश के अनुसार, जिला पंचायत में पदस्थ सभी अधिकारी चाहे वे परियोजना अधिकारी हों, सहायक अधिकारी हों या अन्य योजना प्रभारी उन्हें बिना पूर्व अनुमति के कार्यालय से बाहर रहने की अनुमति नहीं होगी। यदि किसी अधिकारी को किसी कारणवश मुख्यालय से बाहर जाना हो, तो इसके लिए सक्षम अधिकारी से पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति अनुपस्थित पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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कलेक्टर ने मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) जिला पंचायत को विशेष रूप से निर्देशित किया है कि वे इस आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराएं। साथ ही यह भी कहा गया है कि भविष्य में इस प्रकार की लापरवाही दोहराई नहीं जानी चाहिए। सभी अधिकारियों की उपस्थिति नियमित रूप से दर्ज की जाए और यदि कोई अधिकारी अनुपस्थित पाया जाता है तो उसकी जानकारी तत्काल उच्च स्तर पर दी जाए।

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि में 27 अप्रैल 2026 को आयोजित समीक्षा बैठक को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस बैठक में विभिन्न विकास योजनाओं की प्रगति का आकलन किया जाना था, लेकिन संबंधित अधिकारियों की अनुपस्थिति के कारण समीक्षा प्रक्रिया प्रभावित हुई। कलेक्टर ने इसे प्रशासनिक जिम्मेदारी की अनदेखी बताते हुए कड़ी नाराजगी जाहिर की।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आदेश प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए जरूरी होते हैं। जब अधिकारी अपने मुख्यालय पर उपलब्ध रहते हैं, तभी वे योजनाओं की निगरानी, जनता की समस्याओं का समाधान और समयबद्ध कार्य सुनिश्चित कर सकते हैं। खासकर ग्रामीण विकास और पंचायत स्तर की योजनाओं में अधिकारियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।

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जिला पंचायत से जुड़े कई महत्वपूर्ण विभाग जैसे मनरेगा, स्वच्छता मिशन, ग्रामीण आजीविका मिशन और अन्य विकास योजनाएं सीधे तौर पर जनता से जुड़ी होती हैं। ऐसे में यदि अधिकारी अपने कार्यस्थल पर मौजूद नहीं रहते, तो योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी और गड़बड़ी की संभावना बढ़ जाती है। कलेक्टर का यह कदम इसी दिशा में एक सुधारात्मक पहल के रूप में देखा जा रहा है।

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि भविष्य में कोई अधिकारी बिना अनुमति के अनुपस्थित पाया जाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें नोटिस जारी करना, वेतन रोकना या अन्य वैधानिक कदम शामिल हो सकते हैं। इस सख्ती का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

स्थानीय स्तर पर इस आदेश को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जहां कुछ लोग इसे प्रशासनिक अनुशासन के लिए जरूरी कदम मान रहे हैं, वहीं कुछ अधिकारियों का कहना है कि कई बार फील्ड वर्क के कारण उन्हें अचानक बाहर जाना पड़ता है। हालांकि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आपात स्थिति में भी सूचना देना और अनुमति लेना आवश्यक होगा।

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कुल मिलाकर, रीवा जिले में यह आदेश प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही का संकेत देता है। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी का यह कदम यह दर्शाता है कि अब अधिकारियों की लापरवाही किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आने वाले समय में इस आदेश का कितना प्रभाव पड़ता है, यह देखना दिलचस्प होगा, लेकिन फिलहाल इतना तय है कि जिला पंचायत के अधिकारियों को अब अपने कर्तव्यों के प्रति और अधिक सजग रहना होगा।

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