10 सरकारी गवाहों की फौज भी नहीं डिगा सकी डिफेंस की दीवार; अधिवक्ता साक्षी सिंह बघेल और उनकी टीम की धारदार पैरवी से ढह गया पुलिस का केस ,
रीवा; इसे कहते हैं कानून के मैदान पर असली ‘मास्टरस्ट्रोक’ रीवा के जिला एवं सत्र न्यायालय में चले एक बेहद हाई-प्रोफाइल और सनसनीखेज मुकाबले में अदालत ने टाटा मोटर फाइनेंस कंपनी और ग्राहकों से लाखों की ठगी के आरोपी विपुल को सभी संगीन आरोपों से पूरी तरह दोषमुक्त कर दिया है। सिविल लाइन पुलिस की महीनों की जांच और सरकारी पक्ष के सारे दावे उस वक्त धरे के धरे रह गए, जब बचाव पक्ष की महिला अधिवक्ताओं की फौज ने कोर्ट रूम में तर्कों की ऐसी बौछार की कि अभियोजन पक्ष पस्त हो गया।
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Rewa news; पुलिस का दावा: ‘लाखों का फर्जीवाड़ा और नकली रसीदें’
सिविल लाइन थाना पुलिस के मुताबिक, यह मामला रीवा के सबसे शातिर वित्तीय अपराधों में से एक माना जा रहा था। पुलिस का आरोप था कि विपुल ने अपने साथी के साथ मिलकर खुद को ‘टाटा मोटर फाइनेंस कंपनी’ का फर्जी अफसर घोषित कर दिया था। इसके बाद:
वाहन लोन लेने वाले सीधे-साधे ग्राहकों को जाल में फंसाया गया।
किस्तों (EMI) के नाम पर उनसे लाखों रुपये कैश वसूले गए।
उन्हें शांत रखने के लिए कंपनी के नाम की फर्जी रसीदें थमा दी गईं।
जब इस नेक्सस का भंडाफोड़ हुआ, तो पुलिस ने आरोपी को दबोचकर उसके खिलाफ IPC की धारा 420, 467, 468 और 471जैसी बेहद कड़ी और गैर-जमानती धाराओं के तहत केस दर्ज किया था।
10 गवाह भी नहीं बचा पाए सरकारी पक्ष की साख!
मामले की गंभीरता को देखते हुए इसका ट्रायल सीधे जिला एवं सत्र न्यायाधीश राकेश मोहन प्रधान की अदालत में चला। आरोपी को सलाखों के पीछे भेजने के लिए सरकारी वकील ने पूरी ताकत झोंक दी और कोर्ट रूम में 10 चश्मदीद और सरकारी गवाह पेश किए।
अदालत का टर्निंग पॉइंट: लेकिन कटघरे में खड़ी रीवा की दिग्गज महिला अधिवक्ताओं की टीम के इरादे कुछ और ही थे। मुख्य अधिवक्ता साक्षी सिंह बघेल के नेतृत्व में डिफेंस टीम ने पुलिस की चार्जशीट और गवाहों के बयानों की धज्जियां उड़ा दीं। कानून की ऐसी बारीकियां और अकाट्य तर्क पेश किए गए कि न्यायाधीश के सामने अभियोजन पक्ष अपना गुनाह साबित करने में 100% नाकाम रहा।
जीत के सूत्रधार: कोर्ट रूम की ‘सुपर-5’ टीम
विपुल को इस कानूनी दलदल से बाहर निकालने और एक ऐतिहासिक जीत दर्ज करने का सेहरा इन महिला कानूनी विशेषज्ञों के सिर बंधा:
1.अधिवक्ता साक्षी सिंह बघेल (मुख्य रणनीतिकार)
2. अधिवक्ता सुभी सिंह
3. अधिवक्ता साक्षी सिंह परिहार
4. अधिवक्ता माधवी शुक्ला
5. अधिवक्ता तृषा कुशवाहा।
फैसला: इंसाफ की तराजू पर भारी पड़ा डिफेंस
दोनों पक्षों की मैराथन बहस सुनने के बाद, जिला सत्र न्यायाधीश ने माना कि संदेह से परे आरोपी पर दोष साबित नहीं होता। नतीजतन, आरोपी विपुल को धोखाधड़ी के कलंक से पूरी तरह मुक्त करते हुए बाइज्जत बरी करने का आदेश सुनाया गया। यह फैसला रीवा के कानूनी इतिहास में बेहतरीन पैरवी और वकीलों की सूझबूझ की एक जलती हुई मिसाल बन गया है।
