Mp news; सीधी को नया संभाग बनाने के लिए बीजेपी विधायक विश्वामित्र पाठक ने मुख्यमंत्री के सामने रखा प्रस्ताव, सिंगरौली और मऊगंज को शामिल करने की मांग मध्य प्रदेश में एक बार फिर नए प्रशासनिक विभाजन की मांग ने राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। इस बार यह मांग रीवा संभाग के विभाजन और सीधी जिले को नया संभाग बनाने को लेकर उठी है।
सिहावल से भाजपा विधायक विश्वामित्र पाठक ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर इस संबंध में एक औपचारिक प्रस्ताव सौंपा है। विधायक का तर्क है कि सीधी को संभाग केंद्र बनाने से क्षेत्र की जनता को बेहतर प्रशासनिक सुविधाएं मिल सकेंगी।
मुख्यमंत्री को सौंपे गए प्रस्ताव में विधायक पाठक ने सीधी, सिंगरौली और नवनिर्मित जिले मऊगंज को मिलाकर एक नया संभाग गठित करने की बात कही है। उन्होंने मुख्यमंत्री को बताया कि वर्तमान व्यवस्था में इन तीनों जिलों के निवासियों को संभाग मुख्यालय रीवा पहुंचने में अत्यधिक दूरी और समय का सामना करना पड़ता है, जबकि सीधी भौगोलिक रूप से इन क्षेत्रों के काफी करीब स्थित है।
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Mp news; दूरी का गणित और जनता की परेशानी
विधायक विश्वामित्र पाठक ने भौगोलिक आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि सिंगरौली से सीधी की दूरी करीब 100 किलोमीटर है, जबकि रीवा संभाग मुख्यालय तक पहुंचने के लिए सिंगरौली के लोगों को लगभग 200 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है। इसी तरह, मऊगंज से सीधी की दूरी मात्र 40 किलोमीटर के आसपास है, जबकि रीवा जाने के लिए उन्हें 100 किलोमीटर की दूरी तय करनी होती है। ऐसे में यदि सीधी को नया संभाग मुख्यालय बनाया जाता है, तो आम नागरिकों को कमिश्नर, आईजी और अन्य संभागीय अधिकारियों तक पहुंचने में बड़ी राहत मिलेगी।
Mp news; दशकों पुरानी मांग को मिली राजनीतिक ताकत
सीधी को संभाग बनाने की मांग विंध्य क्षेत्र में वर्षों से उठती रही है, लेकिन पहली बार सत्ता पक्ष के किसी जनप्रतिनिधि द्वारा खुलकर मुख्यमंत्री के सामने इस मुद्दे को इतने मजबूत तरीके से रखने के बाद इसे नई राजनीतिक ताकत मिलती दिखाई दे रही है। स्थानीय निवासियों का भी मानना है कि नया संभाग बनने से न केवल प्रशासनिक कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि दूरदराज के अंचलों में सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन भी बेहतर ढंग से हो सकेगा। फिलहाल मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव पर विचार करने का आश्वासन दिया है, लेकिन इस मांग ने प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था और विंध्य की सियासत में एक नई बहस जरूर छेड़ दी है।
