Sidhi News; सब्जीमंडी में आम आदमी बनकर पहुंचे कलेक्टर, यहां सच्चाई सामने आते ही कर्मचारी सस्पेंड

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मध्य प्रदेश के सीधी जिले में इन दिनों कलेक्टर IAS विकास मिश्रा का कार्यशैली चर्चा का केंद्र बनी हुई है। प्रशासनिक सख्ती और आम जनता के प्रति संवेदनशीलता का संतुलन उन्हें अलग पहचान दिला रहा है। वे लगातार ऐसे स्थानों पर पहुंच रहे हैं, जहां आमतौर पर अधिकारियों की मौजूदगी कम देखने को मिलती है। यही वजह है कि जहां एक ओर आम लोग उन्हें राहत देने वाला अधिकारी मान रहे हैं, वहीं लापरवाह कर्मचारियों के लिए उनका रुख बेहद सख्त नजर आ रहा है।

गेहूं उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण

कलेक्टर विकास मिश्रा ने जिले में संचालित गेहूं उपार्जन केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया। किसानों को मिलने वाली सुविधाओं, तौल व्यवस्था, भुगतान प्रक्रिया और भंडारण की स्थिति पर विशेष ध्यान दिया गया।

निरीक्षण के दौरान चौफाल उपार्जन केंद्र में गंभीर अव्यवस्थाएं सामने आईं। किसानों को समय पर सुविधा नहीं मिल रही थी और रिकॉर्ड में भी गड़बड़ियां पाई गईं। इस पर कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से केंद्र प्रभारी को निलंबित करने के निर्देश दिए। इस कार्रवाई से साफ संदेश गया कि किसानों के हितों से समझौता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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बेहतर काम करने वालों को सम्मान

जहां एक ओर लापरवाही पर सख्ती दिखाई गई, वहीं उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहित भी किया गया। माटा उपार्जन केंद्र में व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं। किसानों को बिना किसी परेशानी के सुविधाएं मिल रही थीं और रिकॉर्ड भी व्यवस्थित था।

इससे प्रभावित होकर कलेक्टर ने केंद्र के ऑपरेटर को “स्टार ऑफ द मंथ” का सम्मान देने की घोषणा की। यह पहल न केवल कर्मचारियों का मनोबल बढ़ाने वाली है, बल्कि अन्य केंद्रों के लिए भी प्रेरणा का काम करेगी।

सब्जी मंडी में भी पहुंचा प्रशासन

कलेक्टर विकास मिश्रा ने आज स्थानीय सब्जी मंडी का भी निरीक्षण किया। आमतौर पर नजरअंदाज किए जाने वाले इस क्षेत्र में पहुंचकर उन्होंने व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को समझा।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्वच्छता व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया। मंडी में जगह-जगह गंदगी पाई गई, जिस पर उन्होंने तत्काल सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। साथ ही शौचालयों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं मिली, जिसे सुधारने के लिए संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध निर्देश दिए गए।

पानी निकासी और पार्किंग पर फोकस

सब्जी मंडी में पानी निकासी की समस्या भी सामने आई। बारिश के दौरान जलभराव की स्थिति बनती है, जिससे व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को परेशानी होती है। कलेक्टर ने इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए योजना तैयार करने के निर्देश दिए।

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पार्किंग प्रबंधन भी अव्यवस्थित पाया गया। वाहनों की अनियमित पार्किंग से जाम की स्थिति बन रही थी। इस पर कलेक्टर ने सुव्यवस्थित पार्किंग व्यवस्था लागू करने और ट्रैफिक मैनेजमेंट बेहतर करने के निर्देश दिए।

रेंट कलेक्शन व्यवस्था की जांच

निरीक्षण के दौरान दुकानों से किराया वसूली (रेंट कलेक्शन) की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। इसमें पारदर्शिता की कमी और अनियमितताएं सामने आईं। कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए और डिजिटल माध्यमों का अधिक से अधिक उपयोग किया जाए।

आम लोगों के बीच बढ़ती लोकप्रियता

कलेक्टर विकास मिश्रा की इस सक्रिय कार्यशैली का असर अब साफ तौर पर दिखाई देने लगा है। आम लोग उन्हें एक ऐसे अधिकारी के रूप में देख रहे हैं, जो सिर्फ दफ्तरों तक सीमित नहीं है बल्कि जमीनी स्तर पर जाकर समस्याओं को समझता और उनका समाधान करता है।20260504 113340

गरीब और जरूरतमंद वर्ग के बीच उनकी छवि एक “मसीहा” की तरह बनती जा रही है। वहीं सरकारी कर्मचारियों में जवाबदेही बढ़ी है, क्योंकि अब निरीक्षण कभी भी हो सकता है।

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प्रशासनिक सख्ती का स्पष्ट संदेश

कलेक्टर की लगातार कार्रवाई से यह संदेश साफ है कि काम में लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। चाहे उपार्जन केंद्र हो या नगर की मंडी, हर जगह व्यवस्था सुधारने पर जोर दिया जा रहा है।

उनकी कार्यशैली में एक खास बात यह भी है कि वे सिर्फ खामियां निकालने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सुधार के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश भी देते हैं। इससे प्रशासनिक व्यवस्था में स्थायी सुधार की उम्मीद बढ़ी है।सीधी जिले में कलेक्टर विकास मिश्रा का काम करने का तरीका प्रशासनिक दक्षता और मानवीय संवेदनशीलता का बेहतरीन उदाहरण बनकर उभर रहा है। एक ओर वे किसानों और आम जनता की समस्याओं को प्राथमिकता दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सिस्टम को भी दुरुस्त करने में लगे हुए हैं।

उनकी यही कार्यशैली आने वाले समय में जिले के विकास और प्रशासनिक सुधार के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। फिलहाल, सीधी में एक ऐसा प्रशासनिक मॉडल देखने को मिल रहा है, जहां सख्ती और संवेदनशीलता दोनों साथ-साथ चल रही हैं।

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