mangawan-hospital : रीवा: वेंटिलेटर पर मनगवां स्वास्थ्य व्यवस्था, अस्पताल में तालेबंदी से मरीज की जान जोखिम में

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mangawan-hospital: मध्य प्रदेश के रीवा जिले से स्वास्थ्य सेवाओं की एक बेहद डरावनी तस्वीर सामने आई है। मनगवां विधानसभा क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं किस कदर बदहाल हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ मरीजों के लिए अस्पताल के दरवाजे तक नहीं खुल रहे। ताजा घटनाक्रम में एक गंभीर शुगर पीड़ित मरीज को इलाज के अभाव में दर-दर भटकना पड़ा, जिससे प्रशासन और स्थानीय जनप्रतिनिधियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

 

 

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तालेबंदी ने बढ़ाई मरीज की मुसीबत

 

 

रीवा जिला मुख्यालय से दूर स्थित मनगवां का सरकारी अस्पताल एक सुनसान स्थान पर बना हुआ है। हाल ही में जब एक शुगर पीड़ित व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ गंभीर हालत में यहाँ पहुँचा, तो अस्पताल परिसर में सन्नाटा पसरा था और मुख्य द्वारों पर ताले लटके हुए थे। पीड़ित परिवार घंटों तक सहायता के लिए गुहार लगाता रहा, लेकिन वहाँ कोई भी जिम्मेदार कर्मचारी या डॉक्टर मौजूद नहीं था जो उनकी बात सुन सके।

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इस स्थिति की गंभीरता को इस तरह समझा जा सकता है कि शुगर जैसी बीमारी में समय पर उपचार न मिलना जानलेवा साबित हो सकता है। यदि मरीज को जिला मुख्यालय रीवा ले जाने की कोशिश की जाती, तो रास्ते की लंबी दूरी और खराब स्वास्थ्य के कारण कोई भी बड़ी अनहोनी घट सकती थी। यह घटना दर्शाती है कि क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं केवल कागजों तक सीमित रह गई हैं।

 

 

प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तीखे सवाल

 

 

मनगवां अस्पताल की इस दयनीय स्थिति ने सीधे तौर पर स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल और रीवा कलेक्टर की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था वाकई वेंटिलेटर पर पहुँच चुकी है? मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सुशासन के दावों के बीच, क्या जनता को बुनियादी इलाज के लिए भी इसी तरह संघर्ष करना पड़ेगा?

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स्थानीय लोगों का आक्रोश मनगवां विधायक नरेन्द्र प्रजापति के खिलाफ भी फूट रहा है। जनता का आरोप है कि विधायक के उदासीन रवैये के कारण अस्पताल एक खंडहर में तब्दील होता जा रहा है। यदि समय रहते सामाजिक कार्यकर्ता व कांग्रेस पार्टी मनगवा विधानसभा क्षेत्र में उभरते हुए युवा नेता प्रकाश तिवारी का हस्तक्षेप न हुआ होता और मरीज को गंगेव अस्पताल न ले जाया गया होता, तो परिणाम घातक हो सकते थे।

 

क्षेत्र के जागरूक नागरिकों का कहना है कि जब भी ऐसी अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाई जाती है, तो उन्हें पुलिस प्रशासन और झूठी कार्यवाहियों का डर दिखाया जाता है। एसपी रीवा से यह सवाल पूछा जा रहा है कि क्या अपनी टीम के साथ अस्पताल की बदहाली का जायजा लेना अपराध है? क्या सच बोलने पर जनता को एफआईआर का सामना करना पड़ेगा?

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कांग्रेस पार्टी के युवा नेता प्रकाश तिवारी ने मीडिया को जानकारी देते हुए कहा कि मनगवां विधानसभा की इस बिगड़ती स्थिति को सुधारने के लिए अब आम जनता को एकजुट होना होगा। चाहे वह किसी भी वर्ग या समुदाय से हो, स्वास्थ्य सेवाएं सबका मौलिक अधिकार हैं। अगर आज हम इन समस्याओं के समाधान के लिए साथ नहीं आए, तो आने वाले समय में यह व्यवस्था और भी ज्यादा घातक सिद्ध होगी। शासन-प्रशासन को चाहिए कि वे तत्काल मनगवां अस्पताल में पर्याप्त स्टाफ और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करें ताकि भविष्य में किसी की जान पर न बन आए ।

 

 

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