रीवा में भीषण गर्मी का असर: कलेक्टर का बड़ा आदेश, अब सुबह 7:30 से दोपहर 12 बजे तक चलेंगे सभी स्कूल
रीवा जिले में लगातार बढ़ते तापमान और भीषण गर्मी को देखते हुए जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लिया है। कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए जिले के सभी स्कूलों के संचालन समय में बदलाव का आदेश जारी किया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे हजारों विद्यार्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
जारी आदेश के अनुसार, रीवा जिले में संचालित सभी शासकीय, अशासकीय, अनुदान प्राप्त, मान्यता प्राप्त, सीबीएसई, आईसीएसई एवं माध्यमिक शिक्षा मंडल से संबद्ध स्कूलों का समय बदल दिया गया है। अब नर्सरी से लेकर कक्षा 12वीं तक के सभी छात्र-छात्राओं के लिए स्कूल सुबह 7:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक संचालित किए जाएंगे।
प्रशासन का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब जिले में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। तेज धूप और लू के कारण बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, दोपहर के समय बच्चों को स्कूल में रखने से डिहाइड्रेशन, थकान और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं, इसलिए समय में यह बदलाव आवश्यक माना जा रहा है।

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्कूलों के शैक्षणिक स्टाफ एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी सुबह 7:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक विद्यालय में उपस्थित रहेंगे। इस दौरान वे अपने सभी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों का निष्पादन करेंगे।
हालांकि, आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि शासन द्वारा पूर्व से निर्धारित परीक्षाएं और अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियां अपनी निर्धारित समय सारिणी के अनुसार ही संचालित होती रहेंगी। यानी परीक्षा कार्यक्रम में किसी प्रकार का बदलाव नहीं किया गया है।
इस आदेश के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर ने जिला शिक्षा अधिकारी, सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों और विद्यालयों के प्राचार्यों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो और उनका स्वास्थ्य सुरक्षित रह सके।
गौरतलब है कि हर साल गर्मी के मौसम में प्रशासन द्वारा स्कूलों के समय में बदलाव किया जाता है, लेकिन इस बार तापमान में तेजी से वृद्धि को देखते हुए यह निर्णय पहले ही लागू कर दिया गया है। अभिभावकों और विद्यार्थियों ने प्रशासन के इस फैसले का स्वागत किया है और इसे बच्चों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
