Rewa news; बघेली यूट्यूबर मनीष पटेल की जेल यात्रा पर अधिवक्ता आलोक तिवारी का बड़ा खुलासा मनीष1 माह या ज्यादा दिनों तक रह सकता है सलाखों के पीछे

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Rewa news; विवादित रील्स के बाद खुले पुराने केस; वकील बोले— ‘सड़क जाम करने से नहीं, कोर्ट से मिलेगी बेल’ रीवा। सोशल मीडिया पर अपनी रील्स और वीडियो के जरिए सुर्खियों में रहने वाले बघेली कंटेंट क्रिएटर मनीष पटेल इन दिनों सलाखों के पीछे हैं। अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने और फिर न्यायालय में सरेंडर करने के बाद यह मामला पूरे विंध्य क्षेत्र में गर्माया हुआ है। इस पूरे कानूनी घटनाक्रम में ब्राह्मण समाज की ओर से पक्ष रखने वाले जबलपुर हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक तिवारी ने मामले की कानूनी बारीकियों और मनीष पटेल के जेल जाने के असली कारणों का खुलासा किया है।

विवादित वीडियो से हुई शुरुआत

मामले की शुरुआत मनीष पटेल द्वारा सोशल मीडिया पर पोस्ट किए गए एक विवादित वीडियो से हुई, जिसका शीर्षक “ब्राह्मण लड़की पटाने के बाद…” जैसी आपत्तिजनक पंक्तियों से जुड़ा था। विरोध बढ़ने पर मनीष ने वीडियो डिलीट करने के बजाय उसका शीर्षक बदलकर पहले “व्हेन यू डेट ब्राह्मण” और फिर “व्हेन यू डेट संस्कारी” कर दिया। इस पर अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के पदाधिकारियों की शिकायत पर मनीष पटेल के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196(1)(A) और 353(B) के तहत मामला दर्ज किया गया।

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हाई कोर्ट ने क्यों खारिज की अग्रिम जमानत?

जिला अदालत से अर्जी खारिज होने के बाद मामला जबलपुर हाई कोर्ट पहुंचा था। हाई कोर्ट के जस्टिस रामकुमार चौबे ने मेरिट के आधार पर मनीष की अग्रिम जमानत याचिका को पूरी तरह से खारिज कर दिया। रीवा जिले के रहने बाले अधिवक्ता आलोक तिवारी जो जबलपुर हाईकोर्ट में वकालत करते है उन्होंने बताया कि जमानत खारिज होने के पीछे दो मुख्य कारण रहे:

सामाजिक गरिमा का हनन: अदालत का स्पष्ट मानना था कि किसी भी कंटेंट क्रिएटर को व्यूज या लोकप्रियता बढ़ाने के लिए किसी समाज विशेष को अपमानित करने का अधिकार नहीं है।

पुराना आपराधिकइतिहास:अदालत के सामने मनीष पटेल का पुराना रिकॉर्ड पेश किया गया, जिसमें वर्ष 2016-17 के दौरान बाइक चोरी और मोबाइल लूट/चोरी के करीब 5 मामले शामिल थे, जो वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन हैं।

दो अलग-अलग मामलों में हुई गिरफ्तारी

अधिवक्ता आलोक तिवारी ने साफ किया कि मनीष पटेल की जेल यात्रा के पीछे सिर्फ हालिया विवाद नहीं है। मनीष वर्ष 2016- 17 के एक पुराने लूट के मामले में पिछले डेढ़ साल से ‘स्थाई वारंट’ पर फरार चल रहे थे। कानूनन जमानत की शर्त होती है कि आरोपी हर तारीख पर कोर्ट में पेश होगा, लेकिन मनीष पटेल लंबे समय से कोर्ट से नदारद थे। जब उन्होंने सरेंडर किया, तो पुलिस ने इन दोनों मामलों में गिरफ्तार करके उन्हें जेल भेज दिया। चीफ जुडिशियल मजिस्ट्रेट (CJM) पन्ना नागेश की अदालत ने भी उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है।

पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

इस पूरे प्रकरण में स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। पुलिस का दावा था कि मनीष पटेल लंबे समय से फरार चल रहे थे, जबकि वे रीवा शहर में खुलेआम घूम रहे थे, क्रिकेट लीग खेल रहे थे और स्थानीय कलाकारों के साथ रील्स बना रहे थे। अधिवक्ता आलोक तिवारी ने कहा कि सोशल मीडिया पर लगातार सक्रिय रहने वाले व्यक्ति को न पकड़ पाना पुलिस की उदासीनता या संरक्षण की ओर इशारा करता है। अगर आरोपी को खुद आकर सरेंडर करना पड़े, तो यह पुलिस की नाकामी है।

मनीष पटेल की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थकों द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों और “कलेक्ट्रेट घेराव” जैसी चेतावनियों पर अधिवक्ता आलोक तिवारी ने स्पष्ट कानूनी सलाह दी है। उन्होंने कहा—

जमानत देना या न देना किसी कलेक्टर या सेक्रेटरी के अधिकार क्षेत्र में नहीं है, बल्कि यह केवल जज का विवेकाधिकार है। सड़क जाम करने या माहौल खराब करने से कोई राहत नहीं मिलेगी, बल्कि उल्टा कोर्ट की अवमानना और अन्य कानूनी धाराएं लग सकती हैं। यदि समर्थक राहत चाहते हैं, तो उन्हें एक मजबूत लीगल टीम के साथ अदालत में ही कानूनी लड़ाई लड़नी होगी।”

एक महीने से अधिक समय तक रहना पड़ सकता है जेल में
अदालती प्रक्रियाओं और हाई कोर्ट में चल रहे ग्रीष्मकालीन अवकाश के मद्देनजर अधिवक्ता आलोक तिवारी का अनुमान है कि मनीष पटेल को कम से कम एक महीना या उससे अधिक का समय जेल में बिताना पड़ सकता है। उन्होंने अंत में कहा कि अगर मनीष ने जातिगत टिप्पणी वाली ऐसी विवादित रील्स न बनाई होतीं, तो शायद उनके पुराने मामले इस तरह दोबारा उजागर नहीं होते और वे जेल जाने से बच सकते थे।

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