Shera singh रीवा। मनगवां थाना पुलिस द्वारा वर्ष 2019 में दर्ज किए गए बहुचर्चित एनडीपीएस और आबकारी अधिनियम के मामले में रीवा की विशेष एनडीपीएस अदालत ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी राजेश सिंह सहित अन्य सभी अभियुक्तों को उनके खिलाफ लगे सभी गंभीर आरोपों से पूर्णतः दोषमुक्त कर दिया है।
न्यायालय ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस द्वारा तैयार की गई कहानी और अभियोजन पक्ष की दलीलें अदालत के समक्ष टिक नहीं सकीं। अभियोजन अपना मामला संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह नाकाम और असफल रहा, जिसके आधार पर कोर्ट ने आरोपियों को बरी करने का आदेश जारी किया।
मामला वर्ष 2019 का है, जब पुलिस थाना मनगवां ने दावा किया था कि उन्होंने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए अवैध नशे की भारी खेप बरामद की है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपियों के पास से 100 लीटर अवैध शराब
600 सीसी ऑनरेक्स कफ सीरप
8 किलोग्राम गांजा जब्त करने का दावा किया गया था। इस आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट और आबकारी अधिनियम की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत अपराध पंजीबद्ध कर मामला विशेष न्यायालय रीवा के समक्ष विचारण हेतु प्रस्तुत किया था।
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अदालत में धड़ाम हुई पुलिस की थ्योरी
मामले के विचारण के दौरान आरोपी पक्ष के वकीलों ने पुलिस की जब्ती और जांच प्रक्रिया पर कड़े सवाल उठाए। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव सिंह परिहार (शेरा सिंह) एवं गिरीश पटेल ने दमदार पैरवी की।
अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष पुलिसिया कार्रवाई की कमियों, साक्ष्यों के अभाव और कानूनी प्रक्रियाओं की अनदेखी को प्रमुखता से रखा। बचाव पक्ष के तर्कों और जिरह के आगे अभियोजन पक्ष का पक्ष बेहद कमजोर साबित हुआ।
मामले की गहन सुनवाई और प्रस्तुत साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद, रीवा के विशेष एनडीपीएस न्यायाधीश ने माना कि अभियोजन पक्ष लगाए गए आरोपों को साबित करने में पूर्णतः असफल रहा है। नतीजतन, अदालत ने राजेश सिंह एवं अन्य सभी सह-अभियुक्तों को बाइज्जत दोषमुक्त कर दिया।
कानून और न्याय की जीत
इस फैसले के बाद बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने इसे सत्य और न्याय की जीत बताया है। अधिवक्ता राजीव सिंह परिहार (शेरा सिंह) और गिरीश पटेल की इस प्रभावी पैरवी की न्यायालय परिसर में काफी सराहना हो रही है। इस फैसले ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि केवल सनसनीखेज दावों और प्राथमिक दर्जियों के बल पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता; अदालत में न्याय केवल ठोस और निष्पक्ष साक्ष्यों के आधार पर ही मिलता है।
अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
