Rewa jel: रीवा: सावन की रिमझिम फुहारों और सुरक्षा के कड़े पहरों के बीच शुक्रवार को रीवा केंद्रीय जेल में रक्षाबंधन का पर्व बेहद भावुक माहौल में मनाया गया। सुबह से ही जेल के मुख्य द्वार पर अपने बंदी भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधने पहुंचीं बहनों की लंबी कतारें लग गईं। अपनों से मिलने की खुशी और फिर बिछड़ने के दर्द के बीच जेल परिसर का हर कोना बहनों की नम आंखों और भावुकता का गवाह बना।
इस बार जेल परिसर में एक अलग ही मानवीय तस्वीर देखने को मिली, जब 70 से 80 वर्ष की बुजुर्ग बहनें भी लाठी का सहारा लेकर अपने भाइयों को राखी बांधने और उनका हाल-चाल जानने जेल पहुंचीं। भाइयों के माथे पर तिलक लगाते ही बहनों के आंसू छलक पड़े, तो वहीं भाइयों ने भी अपनी बहनों का सिर सहलाकर जेल से बाहर निकलकर सही राह पर चलने का वचन दिया।
बाहर से मिठाई पर बैन, जेल के भीतर मिले रोली-अक्षत और मिष्ठान
जेल प्रशासन ने रक्षाबंधन के इस पावन पर्व को देखते हुए बहनों के लिए व्यापक और विशेष इंतजाम किए थे। सुरक्षा कारणों और सख्त प्रोटोकॉल के चलते बाहर से मिठाई, सामग्री या कोई भी सामान ले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया था। हालांकि, बहनों को कोई असुविधा न हो, इसके लिए जेल परिसर के भीतर ही शुद्ध मिठाई, रोली, अक्षत और चंदन की पूरी व्यवस्था जेल प्रबंधन द्वारा की गई थी।
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पोते से मिलकर कलेजा ठंडा हुआ..
जेल में अपने पोते को राखी का धागा देने पहुंची एक वृद्ध दादी की आंखें भी भर आईं। उन्होंने रुंधे गले से कहा— उम्र के इस पड़ाव पर भी अपनों की याद खींच लाती है। बस यही दुआ है कि मेरा बच्चा जल्द बाहर आए और सही रास्ते पर चले।
सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद रखते हुए हर बहन की चेकिंग के बाद ही उसे मिलने की इजाजत दी गई।
रीवा केंद्रीय जेल अधीक्षक सतीश उपाध्याय ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताएं कि रक्षाबंधन को लेकर जेल में विशेष इंतजाम किए गए हैं। बहनों को कोई परेशानी न हो, इसका पूरा ध्यान रखा गया है। परिसर के भीतर ही मिठाई और पूजा सामग्री उपलब्ध कराई गई है। दोपहर तक लगभग 6 हजार लोग अपने बंदी परिजनों से मिल चुके थे। शाम तक यह आंकड़ा 10 हजार के करीब पहुंचने की संभावना है।”
अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
