रीवा में सजा था मंडप आने वाली थी बेटी कि बारात; अचानक पहुंच गई लाल बत्ती, प्रभारी कलेक्टर को देख उड़ गए सभी के होश
जवा विकासखण्ड से एक बड़ी और संवेदनशील खबर सामने आई है, जहां प्रशासन और स्वयंसेवी संस्थाओं की सतर्कता के चलते एक बाल विवाह को समय रहते रोक दिया गया। यह कार्रवाई न सिर्फ कानून के पालन का उदाहरण है, बल्कि समाज को एक मजबूत संदेश भी देती है कि बाल विवाह जैसी कुप्रथा को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दरअसल, प्रभारी कलेक्टर श्रीमती सपना त्रिपाठी को जवा क्षेत्र में एक नाबालिग बच्ची के विवाह की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल महिला एवं बाल विकास विभाग, पुलिस विभाग और राजस्व अधिकारियों को संयुक्त रूप से कार्रवाई करने के निर्देश दिए। प्रशासन की टीम बिना देरी किए मौके पर पहुंची और हालात का जायजा लिया।
इस दौरान स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाओं ने भी अहम भूमिका निभाई। अहिंसा वेलफेयर सोसाइटी और समग्र जन चेतना विकास परिषद की टीम ने सक्रिय सहयोग करते हुए परिजनों से संवाद स्थापित किया। टीम ने परिवार को बाल विवाह के दुष्परिणामों और इसके कानूनी पहलुओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
अधिकारियों ने परिजनों को बताया कि बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 के तहत 18 वर्ष से कम आयु की किसी भी बच्ची का विवाह कराना कानूनन अपराध है, जिसके लिए सख्त सजा का प्रावधान है। समझाइश और कानूनी जानकारी के बाद परिजन अपनी गलती समझ गए और उन्होंने विवाह को रोकने पर सहमति जता दी।
मौके पर ही प्रशासनिक टीम ने पंचनामा तैयार किया और परिजनों से लिखित में यह आश्वासन लिया गया कि वे बच्ची के बालिग होने तक उसका विवाह नहीं करेंगे। अधिकारियों ने यह भी सुनिश्चित किया कि बच्ची सुरक्षित है और उसके अधिकारों का संरक्षण किया जा रहा है।
प्रशासन ने परिजनों को स्पष्ट चेतावनी भी दी है कि भविष्य में यदि इस प्रकार का कोई प्रयास किया गया, तो उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह पूरा घटनाक्रम एक सकारात्मक उदाहरण है कि कैसे समय पर मिली सूचना, प्रशासन की तत्परता और समाज के जागरूक वर्ग के सहयोग से एक बच्ची का भविष्य सुरक्षित किया जा सकता है। साथ ही यह समाज के लिए एक संदेश भी है कि बाल विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ सभी को मिलकर आवाज उठानी होगी, तभी एक सुरक्षित और जागरूक समाज का निर्माण संभव है।
