Karadayan Nonbu: भारतीय संस्कृति में पति की लंबी आयु और सुखद वैवाहिक जीवन के लिए किए जाने वाले व्रतों का विशेष महत्व है। उत्तर भारत में जहाँ ‘करवा चौथ’ की मान्यता है, वहीं दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में ‘कारदैन नोन्बू’ (Karadayan Nonbu) का पर्व पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह पावन व्रत 14 मार्च (शनिवार) को मनाया जाएगा।
पौराणिक संदर्भ: सावित्री और सत्यवान की कथा
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यह पर्व पौराणिक सती सावित्री के अदम्य साहस और पतिव्रता धर्म की याद दिलाता है। कथा के अनुसार, जब यमराज सत्यवान के प्राण लेकर जाने लगे, तब सावित्री ने अपनी बुद्धिमानी और तपोबल से यमराज को पराजित कर अपने पति को पुनर्जीवित करवा लिया था। इसी अटूट विश्वास को जीवंत रखने के लिए महिलाएँ यह उपवास रखती हैं।
2026 के लिए शुभ मुहूर्त
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस वर्ष पूजा के लिए दो मुख्य समय अत्यंत फलदायी बताए जा रहे हैं:
प्रथम मुहूर्त: 14 मार्च 2026 (शनिवार) सुबह 06:48 बजे।
द्वितीय मुहूर्त: 15 मार्च 2026 (रविवार) 01:08 बजे।
विशेषज्ञों के अनुसार, मीन संक्रांति के इस संधिकाल में पूजा करना विशेष फलदायी होता है।
इस व्रत की सबसे विशिष्ट परंपरा ‘कारअडाई’ तैयार करना है। यह चावल के आटे, गुड़ (मिठाई के लिए) या नमक (नमकीन संस्करण के लिए) और लोबिया (Black-eyed peas) से बनाया जाता है। इसे पारंपरिक रूप से मक्खन के साथ देवी कामाक्षी को अर्पित किया जाता है।
‘सरडु’ (पीला धागा) धारण करने का महत्व
पूजा के समापन पर महिलाएँ एक विशेष पीला धागा, जिसे ‘सरडु’ कहा जाता है, अपने गले में धारण करती हैं। इस धागे के बीच में एक छोटा फूल पिरोया जाता है, जो अखंड सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। अविवाहित युवतियां भी एक सुयोग्य जीवनसाथी की प्राप्ति के लिए इस अनुष्ठान में भाग लेती हैं।
आज के आधुनिक युग में भी ‘कारदेय नोन्बू’ जैसे त्योहार पारिवारिक मूल्यों और समर्पण की भावना को मजबूत करते हैं। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह महिलाओं की शक्ति और उनके संकल्प की विजय का भी उत्सव है।
अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
