Rewa news; सिस्टम के सीने पर मूंग दलते रसूखदार, क्या सिरमौर चौराहा फ्लाई-ओवर अब ‘अंधेर नगरी’ का नया केंद्र है, दुकान दार गुंडागर्दी पर उतारू

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Rewa news; रीवा। विंध्य की हृदय स्थली कहे जाने वाले रीवा शहर में कानून की धज्जियां उड़ाना अब शायद कुछ लोगों का शगल बन चुका है। शहर के सिरमौर चौराहे पर बना युमना प्रसाद फ्लाई-ओवर, जो कभी विकास का प्रतीक माना जाता था, आज भ्रष्टाचार, अतिक्रमण और खुलेआम गुंडागर्दी का अड्डा बन गया है।

सोशल मीडिया पर वायरल एक ताजा वीडियो ने रीवा के प्रशासनिक दाबो पर ऐसा तमाचा जड़ा है, जिसकी गूंज अब भोपाल के गलियारों तक सुनाई देनी चाहिए। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि दुकान दार अब वर्दी धारियों से ही गुंडई करते दिख रहे है वर्दी की धौंस दिखाने वाली पुलिस, चंद अवैध दुकानदारों के सामने कितनी बेबस और लाचार है।

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सवाल यह है कि क्या रीवा में अब खाकी का खौफ खत्म हो गया है या फिर इन अवैध दुकानदारों के पीछे सफेदपोशों का हाथ है, रीवा शहर के सिरमौर चौराहा में कई ऐसे दुकान संचालित है जो अवैध रूप से तीना टप्पर की दुकानें बनाकर कब्जा कर लिए हैं कहीं ना कहीं इनके  पीछे या तो रीवा जिले में पदस्त्थ रह चुके पुलिस विभाग के बड़े अधिकारियों का हाथ है या तो राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है हालांकि रीवा कलेक्टर  नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी जो रीवा में आते ही अपने एक्शन मोड पर आ चुके हैं और वह लगातार भ्रष्ट माफियाओं पर एक्शन ले रहे हैं अब देखना यह दिलचस्प तो होगा कि रीवा कलेक्टर डॉक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी की नजर रीवा शहर में फैले इस अवैध अतिक्रमण जल पर कब पड़ती है

Rewa news; फ्लाई ओवर का निकला निचला हिस्सा नगर निगम का अधिकार पार्किंग के अलावा नहीं हो सकता व्यापार

फ्लाई-ओवर के नीचे का हिस्सा तकनीकी रूप से नगर निगम के अधीन आता है, जहाँ वाहनों की पार्किंग का प्रावधान है ताकि सड़कों पर जाम न लगे। लेकिन हकीकत यह है कि यहाँ पार्किंग के नाम पर वसूली तो हो ही रही है, साथ ही दुकानों का एक ऐसा मायाजाल बिछा दिया गया है जो सीधे तौर पर यातायात के नियमों को चुनौती दे रहा है। जब ट्रैफिक पुलिस के जवान अपनी ड्यूटी निभाने और रास्ता साफ कराने पहुँचते हैं, तो उन्हें सहयोग के बजाय गालियां और धमकियां मिलती हैं।

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Rewa news; क्या आप रीवा पुलिस की कार्रवाई हेलमेट और चालान तक सीमित रह गई है

 

यह सिर्फ एक नोकझोंक नहीं है, बल्कि यह रीवा के उस ‘सिस्टम’ की हार है जो आम आदमी से तो हेलमेट और कागज मांगता है, लेकिन खुलेआम अतिक्रमण करने वालों के सामने घुटने टेक देता है।
नियमों की बात करें तो शहरी विकास मंत्रालय और सुरक्षा एजेंसियों के स्पष्ट निर्देश हैं कि फ्लाई-ओवर के नीचे किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि नहीं हो सकती। यह न केवल यातायात को बाधित करती है, बल्कि सुरक्षा की दृष्टि से भी एक बड़ा खतरा है।

अगर कल को यहाँ कोई बड़ी दुर्घटना या आगजनी होती है, तो क्या नगर निगम और पुलिस प्रशासन इसकी जिम्मेदारी लेंगे? नगर निगम एक तरफ पार्किंग का ठेका देकर अपनी जेबें भर रहा है, और दूसरी तरफ आँखों पर पट्टी बांधकर बैठा है कि उस पार्किंग की आड़ में कितनी अवैध दुकानें फल-फूल रही हैं।

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ट्रैफिक थाने के सूबेदार से गुंडागर्दी करते दुकानदार का वीडियो सामने आया

सबसे शर्मनाक पहलू तो यह है कि वर्दीधारी पुलिसकर्मियों के साथ दुकानदारों द्वारा की जा रही बदतमीजी पर अब तक कोई कठोर उदाहरण पेश नहीं किया गया। जब रक्षक ही सुरक्षित नहीं हैं और अपने आदेशों का पालन नहीं करवा पा रहे, तो आम जनता खुद को सुरक्षित कैसे महसूस करेगी? यह स्थिति दर्शाती है कि शहर में ‘जिसकी लाठी उसकी भैंस’ वाला कानून चल रहा है। क्या कलेक्टर और एसपी साहब को इस बात की खबर नहीं है कि शहर के सबसे व्यस्त चौराहे के नीचे अराजकता का साम्राज्य चल रहा है? या फिर प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

 

 

 

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कुंभकर्णी नींद से आखिर कब जागे गा नगर निगम

अब समय आ गया है कि रीवा प्रशासन अपनी कुंभकर्णी नींद से जागे। बुलडोजर सिर्फ गरीबों की झोपड़ियों पर ही नहीं, बल्कि उन रसूखदारों के अवैध ठिकानों पर भी चलना चाहिए जो कानून को अपनी जेब में लेकर घूमते हैं। अगर सिरमौर फ्लाई-ओवर के नीचे से यह अतिक्रमण तुरंत नहीं हटाया गया और पुलिस से बदसलूकी करने वालों को सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो जनता का इस व्यवस्था से विश्वास पूरी तरह उठ जाएगा। रीवा को विकास की चमक चाहिए, अतिक्रमण और गुंडागर्दी की कालिख नहीं। अब देखना यह है कि प्रशासन में बैठे आला अधिकारी इस वीडियो को देखने के बाद कार्रवाई की हिम्मत जुटा पाते हैं या फिर हमेशा की तरह फाइलें धूल फांकती रहेंगी।

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