Rewa news: रीवा: एसएस मेडिकल कॉलेज के जूनियर डॉक्टरों के बाद अब रीवा शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं एवं इंटर्न डॉक्टरों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ‘वन नेशन, वन स्टाइपेंड’ और नियमित पीएससी (PSC) भर्ती की मांग को लेकर उग्र छात्रों ने कलेक्ट्रेट का घेराव कर ज्ञापन सौंपा और जल्द मांगें पूरी न होने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है।
मजदूरी से भी कम मिल रहा मानदेय
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प्रदर्शन में शामिल इंटर्न डॉक्टर मयंक त्रिपाठी और छात्रा सोनाली ने बताया कि एलोपैथी (MBBS) इंटर्न्स का स्टाइपेंड बढ़ाकर हाल ही में 21,500 रुपये कर दिया गया है। इसके विपरीत आयुर्वेद इंटर्न्स को महज 9,383 रुपये दिए जा रहे हैं, जो कि दैनिक मजदूरी की दर से भी कम है।
छात्रों का कहना है कि वे भी अस्पतालों में दिन-रात बराबर ड्यूटी निभाते हैं। NCISM नियमों का हवाला देते हुए छात्रों ने तेलंगाना व उत्तर प्रदेश की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी “वन नेशन, वन स्टाइपेंड” लागू कर एमबीबीएस के समान मानदेय देने की मांग की है।
वर्षों से बंद पड़ी है पीएससी भर्ती
छात्रों ने दूसरा बड़ा मुद्दा आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारियों की भर्ती का उठाया। छात्रों का कहना है कि सालों से मध्य प्रदेश में पीएससी के माध्यम से आयुर्वेद डॉक्टरों की नियमित भर्ती नहीं निकाली गई है। पढ़ाई पूरी करने के बाद भी रोजगार का कोई ठोस अवसर न होने से उनका भविष्य अंधकारमय बना हुआ है।
23 को आयुर्वेद दिवस पर पूरे प्रदेश में आंदोलन
छात्रों ने स्पष्ट किया कि यह विरोध केवल रीवा तक सीमित नहीं है, बल्कि भोपाल, उज्जैन, जबलपुर, ग्वालियर और बुरहानपुर समेत पूरे मध्य प्रदेश के शासकीय आयुर्वेद कॉलेजों में जारी है। यदि उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला तथा सरकार द्वारा उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तो आने वाले आयुर्वेद दिवस पर पूरे प्रदेश में संयुक्त रूप से विशाल रैली निकालकर उग्र आंदोलन किया जाएगा।
अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
