Rewa news; रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा का प्रसिद्ध इको पार्क इन दिनों सैलानियों के लिए मनोरंजन से ज्यादा आर्थिक शोषण का केंद्र बनता जा रहा है। पार्क प्रबंधन द्वारा ली जा रही भारी-भरकम फीस और उसके बदले में मिलने वाली शून्य सुविधाओं को लेकर सैलानियों में भारी आक्रोश है। हालत यह है कि सुरक्षा के नाम पर यहां केवल खानापूर्ति हो रही है, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है।
वॉटर पार्क के नाम पर प्रति व्यक्ति 500 रुपये की भारी-भरकम राशि वसूली जा रही है। बाणसागर कॉलोनी निवासी आस्था कुशवाहा ने बताया कि उनके चार सदस्यीय परिवार को सिर्फ वॉटर पार्क में एंट्री के लिए 2000 रुपये चुकाने पड़े। सबसे बड़ी मनमानी तो यह है कि जो लोग वॉटर पार्क नहीं जाना चाहते और केवल परिसर, सस्पेंशन ब्रिज घूमना चाहते है , उनसे भी 100 रुपये प्रति व्यक्ति की दर से एंट्री फीस ली जा रही है। पूर्व में यह फीस 50 रुपये थी, जिसे बिना किसी अतिरिक्त सुविधा के सीधे दोगुना कर दिया गया है।
टिकट काउंटर पर मोटी रकम ऐंठने के बाद पर्यटकों को अंदर की व्यवस्थाओं या सुरक्षा नियमों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी जाती। परिसर में नदी और गहरे पानी का क्षेत्र होने के बावजूद सुरक्षा की कोई पुख्ता गाइडलाइन नहीं है। पर्यटकों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि परिसर के भीतर स्थित प्राचीन मंदिर सर्वसामान्य के लिए है, वहां जाने के लिए 100 रुपये का टैक्स वसूलना पूरी तरह अनुचित है। प्रबंधन द्वारा टिकट के बदले कैफे में स्नैक्स देने का दावा किया जाता है, लेकिन वहां के दाम इतने महंगे हैं कि मध्यमवर्गीय परिवारों की जेब कट रही है। आम जनता ने प्रशासन से मांग की है कि रीवा के इस प्रमुख पर्यटन स्थल पर हो रही खुली लूट पर तत्काल रोक लगाई जाए, फीस की दरें कम की जाएं और सुरक्षा के कड़े इंतजाम सुनिश्चित हों।
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