Rewaरीवा: पॉक्सो और SC/ST एक्ट के गंभीर आरोपों से बरी हुआ आरोपी

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रीवा। एक महत्वपूर्ण न्यायिक फैसले में, पॉक्सो एक्ट और अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act / एट्रोसिटीज एक्ट) के तहत दर्ज मामले में आरोपी मैनुद्दीन शाह को बरी कर दिया गया है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट), रीवा,  पद्मा जाटव की अदालत ने सुनाया, जो मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बेहद अहम माना जा रहा है।

क्या था पूरा मामला?

अभियोजन कहानी के अनुसार, आरोपी मैनुद्दीन शाह, निवासी बैकुंठपुर, जिला रीवा, पर एक नाबालिग पीड़िता के साथ छेड़छाड़, गाली-गलौज और मारपीट का आरोप था। इन आरोपों के आधार पर पुलिस थाना बैकुंठपुर में मैनुद्दीन शाह के विरुद्ध भारतीय दंड विधान की धारा 354 (छेड़छाड़), 294 (गाली-गलौज), 323 (मारपीट), पॉक्सो एक्ट की धारा 4, 8 (यौन उत्पीड़न), तथा एट्रोसिटीज एक्ट की धारा 3(1)(11) (अनुसूचित जाति/जनजाति के व्यक्ति के विरुद्ध अपराध) के तहत प्रकरण दर्ज किया गया था।

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यह मामला विचारण के लिए  विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट)  पद्मा जाटव की अदालत में प्रस्तुत किया गया।

दमदार अधिवक्ता की प्रभावी पैरवी

इस जटिल और संवेदनशील मामले में आरोपी की ओर से  अधिवक्ता विक्रम सिंह ने, अपने सहयोगी अधिवक्ता कृष्णेंद्र सिंह सेंगर के साथ मिलकर, सशक्त और दमदार पैरवी की। न्यायालय में प्रस्तुत किए गए तथ्यों, साक्ष्यों और कानूनी पहलुओं का गहराई से विश्लेषण करते हुए, उन्होंने अभियोजन पक्ष के तर्कों को सफलतापूर्वक चुनौती दी।

उनकी सूक्ष्म कानूनी समझ और प्रभावी बहस ने न्यायालय के समक्ष आरोपी के पक्ष को मजबूती से रखा, जिसके परिणामस्वरूप आरोपी मैनुद्दीन शाह को सभी आरोपों से बरी कर दिया गया

यह फैसला दर्शाता है कि गंभीर से गंभीर मामलों में भी, एक अनुभवी और समर्पित अधिवक्ता की सही कानूनी रणनीति और दमदार पैरवी किस तरह न्याय की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। अधिवक्ता विक्रम सिंह और कृष्णेंद्र सिंह सेंगर की इस सफलता ने एक बार फिर यह साबित किया है कि कानूनी लड़ाई में कुशल प्रतिनिधित्व कितना आवश्यक होता है।

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