Crime news; बेंगलुरु- दौलत का नशा और लालच इंसान को किस हद तक अंधा और बेरहम बना सकता है, इसका सबसे खौफनाक उदाहरण है शकेरेह खलीली हत्याकांड कर्नाटक के सबसे अमीर और रईस परिवारों में से एक की वारिस, शकेरेह खलीली साल 1991 में अचानक गायब हो गईं। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि उनकी इस रहस्यमय गुमशुदगी के पीछे उनके ही दूसरे पति मुरली मनोहर मिश्रा उर्फ ‘स्वामी श्रद्धानंद’ का हाथ था।
तीन साल तक झूठ का जाल, फिर आँगन से निकला कंकाल
शकेरेह के गायब होने के बाद, करीब तीन साल तक श्रद्धानंद पुलिस और परिवार को गुमराह करता रहा और मनगढ़ंत कहानियाँ सुनाता रहा। लेकिन सच ज्यादा दिन नहीं छुप सका। 1994 में बेंगलुरु स्थित उनके आलीशान बंगले के आँगन की खुदाई की गई, तो वहाँ का नजारा देखकर पुलिस वालों के भी रोंगटे खड़े हो गए।
हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें
जांच में जो सच सामने आया, वह दिल दहला देने वाला था
श्रद्धानंद ने शकेरेह को पहले कोई नशीली दवा दी।
बेहोशी की हालत में उन्हें एक लकड़ी के ताबूत में बंद किया।
इसके बाद उन्हें जिंदा ही जमीन में दफन कर दिया गया।
सिर्फ अरबों की प्रॉपर्टी के लिए रची थी शादी की साजिश
अदालती कार्रवाई में यह साफ हो गया कि श्रद्धानंद को शकेरेह से कोई प्यार नहीं था। उसने केवल उनकी अरबों रुपये की संपत्ति और अकूत दौलत हड़पने के लिए उन्हें अपने जाल में फंसाया और शादी की थी। सजा-ए-मौत: 2003 में ट्रायल कोर्ट ने श्रद्धानंद को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई, जिसे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट का कड़ा रुख: सुप्रीम कोर्ट ने इसे “एक आदमी के नीच लालच और शैतानी चालाकी” का मामला कहा। हालांकि, कोर्ट ने उसकी फांसी को बिना किसी छूट के उम्रकैद में बदल दिया। हाल ही में सर्वोच्च अदालत ने उसकी पैरोल याचिका को भी खारिज कर दिया
नाम के पीछे की खौफनाक सच्चाई: इस शो का नाम ‘डांसिंग ऑन द ग्रेव’ (कब्र पर नाचना) इसलिए रखा गया है, क्योंकि कातिल श्रद्धानंद शकेरेह को दफनाने के बाद ठीक उसी जगह (आँगन) पर अक्सर आलीशान डांस पार्टियाँ आयोजित करता था, जिसके नीचे उसकी पत्नी की लाश दफन थी।
