Ndps रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले से कानून और न्याय प्रणाली से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। नशे के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर बनाए गए एनडीपीएस (NDPS) केस में रीवा की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाते हुए आरोपी आशुतोष पांडेय को बाइज्जत दोषमुक्त (बरी) कर दिया है। अदालत ने पाया कि अभियोजन (पुलिस) पक्ष आरोपी के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों को साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा।
क्या था पूरा मामला
मामला वर्ष 2022 का है, जब जिला रीवा के पुलिस थाना चाकघाट की टीम ने आशुतोष पांडेय को गिरफ्तार किया था। पुलिस का दावा था कि आरोपी के पास से 120 शीशी प्रतिबंधित नशीली सिरप (कोरेक्स) जब्त की गई है।
हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें
इसके आधार पर पुलिस ने आरोपी पर एनडीपीएस अधिनियम (NDPS Act) की धारा 8, 21 और 22 के तहत मामला दर्ज कर जेल भेज दिया था और विवेचना के बाद न्यायालय में चालान पेश किया था।
वकीलों की दलीलों के आगे पस्त हुआ अभियोजन
मामले की सुनवाई रीवा स्थित एनडीपीएस के विशेष न्यायाधीश की अदालत में हुई। न्यायालय में सुनवाई के दौरान आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव सिंह परिहार शेरा सिंह और अधिवक्ता गिरीश पटेल ने पैरवी की।
बचाव पक्ष के अधिवक्ताओं ने पुलिस की जब्ती, गवाहों के बयानों और कानूनी प्रक्रियाओं में मौजूद गंभीर खामियों को अदालत के सामने मजबूती से रखा। वकीलों ने तर्क दिया कि पुलिस द्वारा बनाई गई कहानी निराधार है और जब्ती की पूरी कार्रवाई संदेह के घेरे में है।अभियोजन पक्ष ऐसा कोई भी ठोस या निष्पक्ष साक्ष्य पेश नहीं कर सका, जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी के पास से कथित नशीली दवाएं बरामद हुई थीं।”
अदालत का फैसला: सबूतों के अभाव में दोषमुक्त
दोनों पक्षों की दलीलें और पेश किए गए दस्तावेजों का गहन अवलोकन करने के बाद विशेष न्यायाधीश (एनडीपीएस) ने माना कि पुलिस का पक्ष कमजोर है और अभियोजन अपना मामला संदेह से परे साबित करने में असफल रहा है।अदालत ने आरोपी आशुतोष पांडेय को सभी धाराओं से बरी करने का आदेश जारी कर दिया।
अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
