Rewa news: अस्पतालों में मरीज को ब्लड देने के लिए परिजन डोनेटर खोजते खोजते अपना मरीज तो खो देते हैं पर उन्हें डोनेटर नहीं मिलता है और यहां शासन प्रशासन की नजर में हीरो बनने के लिए एक से बढ़कर एक एनजीओ और समाज सेवी फोटो खींचाने सामने आकर ब्लड डोनेशन का ढोंग दिखाते हैरीवा में समाज सेवा के नाम पर फोटो खिंचवाने और अधिकारियों की नजरों में हीरो बनने का नया ट्रेंड शुरू हुआ है। हाल ही में ऐसा ही नजारा देखने को मिला, जहाँ ‘तत्काल सेवा’ का ढोल पीटते हुए समाजसेवियों का एक दल प्रशासनिक ध्यानाकर्षण के लिए रक्तदान करने पहुँच गया। कैमरे चमके, सोशल मीडिया पर तारीफों के पुल बांधे गए और ‘महानता’ का प्रमाण पत्र हासिल कर लिया गया।
लेकिन सिक्के का दूसरा पहलू उतना ही काला और खौफनाक है।
शहर के सरकारी व निजी अस्पतालों में रोजाना ऐसे दर्जनों बेबस परिजन भटकते नजर आते हैं, जिनके मरीज जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे होते हैं। एक-एक यूनिट खून के लिए तीमारदार ब्लड बैंक से लेकर सड़कों तक ठोकरें खाते हैं। अक्सर हालात इतने दर्दनाक हो जाते हैं कि परिजन खून का इंतजाम करते-करते अपने अपनों को हमेशा-हमेशा के लिए खो देते हैं। उस वक्त ये बड़े-बड़े दावे करने वाले ‘मददगार’ और ‘समाजसेवी’ ढूँढे से भी नजर नहीं आते।
दिखावे का दान या असली इंसानियत
रक्तदान बेशक महादान है, लेकिन जब यह केवल प्रशासनिक वाहवाही, नेताओं की नजदीकी और अखबारों की सुर्खियां बटोरने का जरिया बन जाए, तो यह सेवा नहीं बल्कि विशुद्ध ‘नौटंकी’ बन जाती है।
सुर्खियों तक सीमित संवेदना जब किसी आयोजन या वीआईपी के सामने रक्तदान की बात आती है, तो होड़ मच जाती है। लेकिन जब किसी अनजान, गरीब या असहाय मरीज को रात के अंधेरे में खून की सख्त जरूरत होती है, तब सारे फोन बंद मिलते हैं।
इंसानियत के नाम पर छलावा कैमरों के सामने चमकने वाली यह ‘मानवता’ किसी जरूरतमंद के काम न आए, तो इसे समाज सेवा का नाम देना बंद कर देना चाहिए।
अब दिखावे का नाटक बंद होना चाहिए!
अगर दिल में वाकई इंसानियत जिंदा है और समाज सेवा का जज्बा है, तो इस तरह के खोखले आडंबरों को बंद करना होगा।
रीवा के सजग नागरिकों का स्पष्ट संदेश है कि रक्तदान को केवल अपने स्वार्थ या पब्लिसिटी का जरिया मत बनाइए। वास्तविक हीरो वह नहीं जो कैमरों के सामने खून दे, बल्कि असली मददगार वह है जो किसी असहाय और जरूरतमंद मरीज की पुकार सुनकर बिना किसी स्वार्थ के अस्पताल पहुँचे और किसी की ढलती हुई जिंदगी को नई साँसें दे सके।
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अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
