Mp news; मध्य प्रदेश में शासकीय कर्मचारियों की पदोन्नति को लेकर सरकार भले ही बड़े-बड़े दावे कर रही हो, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के भीतर नर्सिंग कैडर के साथ एक बड़ा ‘सिस्टमैटिक छलावा’ सामने आ रहा है। राज्य के सभी संवर्गों में पदोन्नति का दौर जारी है, लेकिन नर्सिंग कैडर के मामले में स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने एक ऐसा पत्र जारी किया है, जिसने पूरे नर्सिंग स्टाफ को आक्रोशित कर दिया है।
यह सवाल उठना लाजिमी है कि साल 2014 के बाद से पिछले 12 वर्षों से जिस कैडर को प्रमोशन का इंतजार था, आज जब उसकी बारी आई, तो इसे महज एक ‘खानापूर्ति’ में क्यों बदला जा रहा है?
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Mp news;बड़े पद खाली, फिर भी पदोन्नति से परहेज क्यों?
विभाग द्वारा जारी हालिया पत्र से साफ है कि नर्सिंग कैडर में सभी स्वीकृत पदों पर पदोन्नति नहीं की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि वर्तमान में राज्य स्तर पर संचालक ,उपसंचालक नर्सिंग से लेकर संयुक्त संचालक स्तर तक के महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। ये पद बाकायदा सरकारी गजट में शामिल हैं, इसके बावजूद इन उच्च पदों को भरने में विभाग रुचि क्यों नहीं दिखा रहा? आखिर किसके इशारे पर नर्सिंग कैडर के शीर्ष पदों को खाली रखकर इस पूरे संवर्ग को नेतृत्वविहीन किया जा रहा है?
*Post office: डायरेक्ट सेल्स एजेंटों के चयन के लिए 27 से 31 जुलाई तक होंगे वॉक-इन-इंटरव्यू*
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Mp news; सिस्टर ट्यूटर के पद ही गायब: नर्सिंग कॉलेजों को बर्बाद करने की साजिश
विगत वर्षों में मध्य प्रदेश का सबसे चर्चित और विवादित मामला नर्सिंग महाविद्यालयों का रहा है। उच्च न्यायालय की सख्त टिप्पणियों के बाद भी शासकीय नर्सिंग महाविद्यालयों और स्कूल ऑफ नर्सिंग में शैक्षणिक स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है।
वर्तमान में सिस्टर ट्यूटर के अधिकांश पद केवल प्रभार के भरोसे चल रहे हैं।
नियम और योग्यता के अनुसार, इस पदोन्नति प्रक्रिया में सबसे पहले योग्य नर्सिंग ऑफिसर्स को सिस्टर ट्यूटर बनाया जाना चाहिए था।
लेकिन विभाग ने जो ‘सहमति पत्र’ जारी किया है, उसमें से सिस्टर ट्यूटर के पदों को ही गायब कर दिया गया है
यह कदम न केवल आत्मघाती है, बल्कि राज्य की नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था को गर्त में धकेलने जैसा है। जब पद ही विलोपित कर दिए गए, तो शासकीय नर्सिंग कॉलेजों को स्थाई और योग्य शिक्षक कैसे मिलेंगे?
Mp news; गजट अधिनियम को ठेंगा और शासन की मंशा पर पानी
मुख्यमंत्री और राज्य सरकार की मंशा साफ है कि हर संवर्ग को समय पर उसका हक और प्रमोशन मिले। लेकिन स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारी अपनी मनमानी पर उतारू हैं। नर्सिंग कैडर के लिए बकायदा गजट अधिनियम लागू है, लेकिन अधिकारी अपने मनमुताबिक नियम बनाकर इस अधिनियम को खुली चुनौती दे रहे हैं।
Mp news: नर्सिंग एसोसिएशन का आक्रोश:
यह पदोन्नति नहीं, बल्कि नर्सिंग कैडर के साथ किया जा रहा भद्दा मजाक है। 12 साल के लंबे इंतजार के बाद विभाग केवल औपचारिकता पूरी करके अपना पल्ला झाड़ना चाहता है। अगर सभी पदों पर, विशेषकर सिस्टर ट्यूटर और संचालनालय स्तर के पदों पर न्यायसंगत प्रमोशन नहीं हुआ, तो यह लड़ाई सड़कों तक जाएगी।”
Mp news; बड़े सवाल, जिनका जवाब विभाग को देना होगा:
. जब अन्य सभी संवर्गों में शत-प्रतिशत पदों पर पदोन्नति हो रही है, तो नर्सिंग कैडर के साथ यह सौतेला व्यवहार क्यों?
गजट में शामिल संचालक, उपसंचालक और जेडी स्तर के पदों को प्रमोशन प्रक्रिया से बाहर क्यों रखा गया?
नर्सिंग कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी के बावजूद सिस्टर ट्यूटर के पदों को विलोपित करने के पीछे अधिकारियों की क्या मंशा है
स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों का यह रवैया न केवल नर्सिंग स्टाफ के मनोबल को तोड़ने वाला है, बल्कि प्रदेश की चरमराती स्वास्थ्य और नर्सिंग शिक्षा व्यवस्था पर एक और बड़ा प्रहार है। सरकार को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप करना चाहिए, अन्यथा कागजी खानापूर्ति के खिलाफ नर्सिंग कैडर का यह असंतोष किसी बड़े आंदोलन का रूप ले सकता है।
अमर मिश्रा ‘हरित प्रवाह’ समाचार पत्र के संपादक और वरिष्ठ पत्रकार हैं। इन्हें डिजिटल मीडिया और समाचार संपादन का लंबा अनुभव है।
