Mp news: क्योटी जलप्रपात के प्रवेश द्वार पर कचरे का अंबार: कुदरत की खूबसूरती पर प्रशासनिक लापरवाही का दाग

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Mp news: मध्यप्रदेश के रीवा जिले का प्रसिद्ध ‘क्योटी जलप्रपात’ इन दिनों अपनी प्राकृतिक सुंदरता के कारण नहीं, बल्कि प्रशासनिक घोर लापरवाही और गंदगी के कारण चर्चा में है। रीवा शहर से करीब 37 किलोमीटर दूर स्थित और भारत के 24वें सबसे ऊंचे जलप्रपात के रूप में दर्ज इस स्थल पर आने वाले पर्यटकों का स्वागत प्राकृतिक दृश्यों के बजाय दुर्गंध और कचरे के ढेर से हो रहा है।
पार्किंग बनी डंपिंग यार्ड, महज 50 मीटर दूर लगा कचरे का पहाड़
क्योटी जलप्रपात के प्रवेश द्वार पर पर्यटकों के वाहनों के लिए बनाई गई पार्किंग जगह अब डंपिंग यार्ड में तब्दील हो चुकी है। पार्किंग स्थल में कई ट्रक कचरा डंप कर दिया गया है। मुख्य जलप्रपात से महज 50 मीटर की दूरी पर लगा यह कचरे का ढेर न केवल पर्यटकों के अनुभव को खराब कर रहा है, बल्कि स्वच्छता अभियानों के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

बारिश के मौसम में बीमारी और प्रदूषण का खतरा

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बारिश के दिनों में जहां चट्टानों के बीच से गिरता झरना और चारों ओर फैली हरियाली पर्यटकों को आकर्षित करती है, वहीं अब यही बारिश इस कचरे के लिए आफत बन गई है। आशंका है कि बारिश के पानी के साथ यह कचरा बहकर आसपास के इलाकों और जलस्रोत में फैलेगा, जिससे न केवल प्राकृतिक वातावरण दूषित होगा बल्कि संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ जाएगा।

वेबसाइट पर ‘प्रसिद्ध पर्यटन स्थल’, धरातल पर बदहाली

एक तरफ रीवा जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर क्योटी जलप्रपात को प्रमुख और लोकप्रिय पर्यटन स्थल के रूप में दर्शाया गया है, जहां सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य पर्यटकों का दिल जीत लेता है। वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि पर्यटन को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं और स्वच्छता का पूरी तरह अभाव है।

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