Chitrakoot : दीपदान मेले से पहले मंदाकिनी नदी पर तैयार हो रहा पीपे का पुल, राजमहल नयागांव ने दी अनुमति

Share With Others

Chitrakoot: पक्का पुल बहने से ठप हुई थी आवाजाही; अब श्रद्धालुओं को 8 से 10 किलोमीटर के फेरे से मिलेगी राहत। भगवान राम की तपोभूमि धर्मनगरी चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के जलप्रलय में नयागांव का पक्का पुल बह गया था। अब आवागमन बहाल करने के लिए मध्य प्रदेश प्रशासन द्वारा नदी पर पीपे का पुल तैयार किया जा रहा है। इस निर्माण कार्य के लिए भूमि स्वामी ‘राजमहल नयागांव’ से प्रशासन ने अनुमति मांगी थी, जिसे सहर्ष स्वीकार करते हुए राजमहल ने चित्रकूट के विकास में हरसंभव सहयोग का भरोसा दिया है। इसके साथ ही, आगामी पांच दिवसीय दीपदान मेले से पहले पुल के तैयार होने की पूरी संभावना बढ़ गई है।

बीते 29 अगस्त को मंदाकिनी में आए उफान ने नयागांव के पास बने पक्के पुल को क्षतिग्रस्त कर बहा दिया था। इससे धर्मनगरी चित्रकूट से नयागांव और प्रसिद्ध धार्मिक स्थल हनुमान धारा का संपर्क टूट गया था। वर्तमान में नयागांव के लोगों को हनुमान धारा होते हुए मोहकमगढ़ पुल के रास्ते चित्रकूट आना पड़ता है, जिससे उन्हें 8 से 10 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ रहा है।

हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें

आगामी पांच दिवसीय दीपदान मेले में आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए, एमपी प्रशासन मंदाकिनी नदी पर अस्थायी पीपे का पुल बनवा रहा है।

Chitrakoot : राजमहल ने दी लिखित अनुमति

पुल निर्माण स्थल की भूमि निजी तौर पर राजमहल नयागांव के स्वामित्व में आती है। इस संबंध में नायब तहसीलदार चित्रकूट ने पत्र भेजकर राजमहल से अनुमति मांगी थी। भैरव बाबा के पास से बाबा घाट तक बनाए जा रहे इस अस्थायी पीपा पुल के लिए राजमहल ने लिखित अनुमति प्रदान कर दी है।
राजमहल नयागांव के हेमराज सिंह चौबे ने पत्र में कहा कि वे धर्मनगरी चित्रकूट के विकास में हमेशा से सहयोगी रहे हैं। राजमहल ने हर आपदा में प्रशासन का साथ दिया है और मंदाकिनी के जलप्रलय के दौरान भी प्रभावित परिवारों की मदद की थी। दीपदान मेले को देखते हुए इस पीपा पुल के निर्माण से श्रद्धालुओं को भारी सुविधा मिलेगी।

Chitrakoot :युद्ध स्तर पर चल रही हैं तैयारियां

वर्तमान स्थिति: पुल निर्माण के लिए मंदाकिनी में भैरव घाट के पास 13 पीपे रखवाए जा चुके हैं, जिन्हें एमपी लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की टीम आपस में जोड़ रही है। पुल के ऊपर लोहे की चादरें (पटरे) बिछाई जानी हैं। इसके अलावा, दोनों सिरों पर पुल तक पहुंचने के लिए संपर्क मार्ग (एप्रोच रोड) का निर्माण कार्य शेष है, जिसे प्रशासन जल्द पूरा करेगा। मेला शुरू होने से पहले इसे हर हाल में आवागमन के लिए दुरुस्त करने का प्रयास जारी है।
संचालन अवधि: एमपी प्रशासन ने पीपे के पुल की प्रस्तावित निर्माण अवधि 15 अक्टूबर से 15 जून तक निर्धारित की है। जब तक मंदाकिनी में नए पक्के पुल का निर्माण नहीं हो जाता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इसी पीपे के पुल से आवागमन की सुविधा मिलेगी। प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह पुल 15 जून तक संचालित रहेगा, क्योंकि इसके बाद मानसून सक्रिय होने पर नदी का जलस्तर बढ़ जाता है।

Leave a Comment