Rewa news: रीवा: जल सत्याग्रह के जरिए न्याय की गुहार, ‘कल्पना के लिए न्याय’ अभियान के तहत FIR दर्ज करने की मांग

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Rewa news: रीवा में स्वास्थ्य तंत्र और पुलिस और प्रशासन के खिलाफ विरोध का एक अनोखा और गंभीर रूप देखने को मिला, जहां पीड़ित परिवार और समाजसेवियों ने नदी के पानी में उतरकर जल सत्याग्रह पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों ने ‘कल्पना के लिए न्याय की आवाज बनिए’ लिखे हुए पोस्टर हाथों में थामकर चिकित्सा एवं प्रशासन से निष्पक्ष जांच और तत्काल एफआईआर दर्ज करने की मांग की।

प्रदर्शनकारियों और पीड़ित परिवार का आरोप है कि ‘कल्पना’ की मृत्यु संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी, जिसे वे सोची-समझी हत्या करार दे रहे हैं। उनका आरोप है कि घटना के 13 से 15 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस द्वारा कोई प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई है और प्रशासन केवल जांच का आश्वासन देकर टालमटोल कर रहा है।

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जल सत्याग्रह कर रहे परिजनों ने कहा”जब किसी भी अज्ञात शव या घटना के मामले में प्राथमिक तौर पर जीरो पर कायमी की जा सकती है, तो फिर इस मामले में एफआईआर दर्ज कर जांच क्यों नहीं की जा रही हम पिछले 13-15 दिनों से न्याय के लिए भटक रहे हैं।”

डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप

प्रदर्शनकारियों ने विशेष रूप से अस्पताल और संबंधित डॉक्टरों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, वर्ष 2023 में आयोग द्वारा अयोग्य घोषित की जा चुकीं डॉ. सोनम अग्रवाल द्वारा ड्यूटी करने और इलाज में घोर लापरवाही बरतने के कारण यह हादसा हुआ। परिजनों ने मांग की है कि दोषी डॉक्टरों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर उन्हें तत्काल निलंबित किया जाए।
‘राजनीति नहीं, सिर्फ न्याय चाहिए’
सत्याग्रह में शामिल लोगों ने स्पष्ट किया कि उनका यह आंदोलन किसी राजनीतिक पार्टी या चुनाव से प्रेरित नहीं है। वे ना तो कोई मुआवजा चाहते हैं और ना ही कोई नौकरी; उनकी एकमात्र मांग दोषियों पर एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई करना है। सत्याग्रहियों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री व मुख्यमंत्री से भी इस मामले में हस्तक्षेप कर पीड़ित पिता को न्याय दिलाने की अपील की है।
मौके पर मौजूद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी जल सत्याग्रह कर रहे लोगों को समझाने और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं, हालांकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक एफआईआर दर्ज नहीं होगी, उनका न्याय के लिए संघर्ष जारी रहेगा।

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