Rewa news; बिना वर्दी के ‘सिंघम’ बनने की कोशिश,आरक्षक अमित चौहान को ‘वर्दी’ से परहेज क्यों? इको पार्क विवाद के बाद उठे गंभीर सवाल Sp थाना प्रभारी वर्दी पर

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Rewa news; रीवा मध्य प्रदेश पुलिस के आला अधिकारी अक्सर मातहतों को अनुशासन, जनता से शालीन व्यवहार और ड्यूटी के दौरान अनिवार्य रूप से पूर्ण वर्दी पहनने की नसीहत देते हैं। लेकिन रीवा के कोतवाली थाने में पदस्थ आरक्षक अमित चौहान पर शायद विभाग के इन कड़े नियमों का कोई असर नहीं पड़ता। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इको पार्क विवाद के एक वीडियो फुटेज ने पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली और अनुशासन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बिना वर्दी के ‘सिंघम’ बनने की कोशिश

 

हरित प्रवाह के साथ अपडेट रहें

वायरल फुटेज रीवा के  पार्क का है, जहां एंट्री को लेकर जमकर विवाद और धक्का-मुक्की हो रही थी। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि जहां एक तरफ कोतवाली थाना प्रभारी TI निशा मिश्रा और जिले के अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अपनी गरिमापूर्ण शासकीय वर्दी में मुस्तैद रहकर स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कोतवाली थाने के ही आरक्षक अमित चौहान हमेशा की तरह सिविल ड्रेस बिना वर्दी में घूम रहे हैं।

विवाद के दौरान आरक्षक अमित चौहान आम लोगों के बीच जाकर एक व्यक्ति से बुरी तरह उलझते, बहस करते और उसे दबाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं। बिना वर्दी के इस तरह के आक्रामक व्यवहार को देखकर वहां मौजूद लोग भी असमंजस में पड़ गए कि यह कोई पुलिसकर्मी है या कोई आम विवादकारी।

साहब’ पहनते हैं स्टार, तो आरक्षक को क्यों है छूट

यह कोई पहली बार नहीं है। आरक्षक अमित चौहान को शायद ही कभी ऑन-ड्यूटी वर्दी में देखा जाता है। जब उनके सीनियर अधिकारी, यहां तक कि थाना प्रभारी और पुलिस अधीक्षक  खुद कड़े अनुशासन का पालन करते हुए हमेशा वर्दी में नजर आते हैं, तो आखिर आरक्षक अमित चौहान को किसके संरक्षण में बिना वर्दी के ड्यूटी करने की खुली छूट मिली हुई है?

बड़ा सवाल:यदि कोई पुलिसकर्मी बिना वर्दी के जनता के बीच जाकर किसी विवाद में उलझता है, तो आम नागरिक कैसे विश्वास करे कि वह कानून का रक्षक है या कोई अराजक तत्व

कानून व्यवस्था और पुलिस की छवि पर दाग

इको पार्क जैसी सार्वजनिक और पारिवारिक जगह पर पुलिस की मौजूदगी में इस तरह का हाई-वोल्टेज ड्रामा होना और उसमें एक गैर-वर्दीधारी पुलिसकर्मी का आक्रामक रूप से शामिल होना रीवा पुलिस की छवि को धूमिल करता है। वीडियो में बैकग्राउंड से यह आवाज भी साफ सुनी जा सकती है कि *”प्रशासन की मौजूदगी में यहां मारपीट चालू हो गई…।
नियमों के मुताबिक, कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए तैनात हर छोटे-बड़े पुलिसकर्मी को अपनी पहचान स्पष्ट रखने के लिए वर्दी में होना अनिवार्य है, ताकि जनता में सुरक्षा का भाव रहे। लेकिन आरक्षक अमित चौहान का यह ‘बिना वर्दी वाला अंदाज’ अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा को दर्शाता है।क्या अपने ही विभाग के वरिष्ठों के आदेशों को ठेंगे पर रखने वाले इस आरक्षक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी?
क्या रीवा एसपी इस गंभीर लापरवाही और अनुशासनहीनता का संज्ञान लेकर कोई कड़ा कदम उठाएंगे?
जनता अब यह देखना चाहती है कि कानून का पाठ पढ़ाने वाली पुलिस अपने महकमे के भीतर फैल रही इस मनमानी पर कब और कैसे लगाम लगाती है।

वायरल वीडियो

 

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