Rewa news: अल्ट्राटेक माइंस में सुरक्षा मानकों की अनदेखी ने ली महिला की जान, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
Rewa news: रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के ग्राम पंचायत बैजनाथ क्षेत्र से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ अल्ट्राटेक माइंस के पत्थर खदान क्षेत्र में काम कर रही एक महिला की पत्थर की चपेट में आने से दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब महिला खदान के निचले हिस्से में पत्थर निकालने का कार्य कर रही थी। इस घटना ने एक बार फिर खनन क्षेत्रों में सुरक्षा प्रबंधों की पोल खोल दी है और स्थानीय प्रशासन व खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतका की पहचान सुमित्रा साकेत के रूप में हुई है, जो रीवा के ही बैजनाथ गांव की निवासी थी। बताया जा रहा है कि मंगलवार सुबह सुमित्रा अपने पति और ससुर के साथ रोजाना की तरह काम पर गई थी। वे लोग एक ट्रैक्टर लेकर खदान के भीतर पत्थर लोड करने का प्रयास कर रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सुमित्रा खदान के निचले तल पर खड़ी थी, तभी अचानक खदान के सबसे ऊपरी हिस्से से एक विशालकाय पत्थर भरभरा कर नीचे गिरा। पत्थर इतना बड़ा और भारी था कि सुमित्रा को संभलने या वहां से भागने का जरा भी मौका नहीं मिला। पत्थर सीधे महिला के ऊपर गिरा, जिससे वह उसके नीचे पूरी तरह दब गई। मौके पर ही उसकी सांसें थम गईं।
हादसे के बाद खदान क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सुमित्रा के पति और ससुर, जो महज कुछ फीट की दूरी पर थे, अपनी आंखों के सामने अपनी बहू और पत्नी को मलबे में दबता देख बदहवास हो गए। चीख-पुकार सुनकर आसपास काम कर रहे अन्य मजदूर वहां पहुंचे, लेकिन पत्थर इतना भारी था कि उसे बिना मशीनों के हटाना असंभव था। परिजनों का आरोप है कि हादसे के तुरंत बाद वहां मौजूद खनन कंपनी के कर्मचारी और मशीन ऑपरेटर मदद करने के बजाय डंपर और मशीनें लेकर मौके से फरार हो गए। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और गांव में मातम छाया हुआ है।
इस हादसे ने क्षेत्र में फैले अवैध और असुरक्षित खनन के मुद्दे को एक बार फिर गर्मा दिया है। स्थानीय ग्रामीणों ने खनिज माफियाओं और संबंधित कंपनी प्रबंधन पर नियमों की धज्जियां उड़ाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि खदानों में वैज्ञानिक तरीके से स्टेप-कटिंग (सीढ़ीनुमा खुदाई) करने के बजाय सीधे घाट खड़े कर दिए गए हैं। नियमानुसार खदान की दीवारें ढलान पर होनी चाहिए, ताकि पत्थर गिरने का खतरा कम रहे, लेकिन यहाँ अधिक मुनाफे के चक्कर में नियमों को ताक पर रखकर सीधी खुदाई की जा रही है।
इसके अलावा, ग्रामीणों ने ‘हैवी ब्लास्टिंग’ (भारी विस्फोट) को इस हादसे का मुख्य कारण बताया है। लोगों का कहना है कि माइंस क्षेत्र में निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक शक्तिशाली विस्फोट किए जाते हैं। इन धमाकों की वजह से पूरी जमीन और आसपास की पहाड़ियां अस्थिर हो चुकी हैं। ब्लास्टिंग के कारण पत्थरों में दरारें आ जाती हैं और कई बड़े-बड़े पत्थर पहाड़ियों के ऊपर खतरनाक रूप से झूलते रहते हैं, जो कभी भी नीचे गिर सकते हैं। आज सुमित्रा के साथ हुआ हादसा इसी लापरवाही का नतीजा है।
ग्रामीणों में पुलिस और प्रशासन के प्रति भी गहरा रोष देखा गया। परिजनों का आरोप है कि हादसा सुबह करीब 7 बजे हुआ था, लेकिन सूचना देने के बावजूद पुलिस और प्रशासनिक अमला करीब दो से ढाई घंटे की देरी से पहुंचा। जब तक पुलिस मौके पर पहुंची, तब तक निजी कंपनी के कर्मचारी वहां से साक्ष्य मिटाने या भागने में सफल हो चुके थे।
सूचना मिलने के बाद पुलिस ने शव को कड़ी मशक्कत के बाद पत्थर के नीचे से निकाला और पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भिजवाया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जांच शुरू कर दी गई है। हालांकि, स्थानीय लोगों की मांग है कि केवल केस दर्ज करना काफी नहीं है, बल्कि खदान मालिक और सुरक्षा अधिकारियों पर हत्या का मामला दर्ज होना चाहिए।
यह कोई पहली बार नहीं है जब रीवा या आसपास के खनन क्षेत्रों में इस तरह का हादसा हुआ हो। खदानों में काम करने वाले मजदूरों को न तो हेलमेट दिए जाते हैं और न ही अन्य सुरक्षा उपकरण। अधिकांश मजदूर दिहाड़ी पर काम करते हैं और उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेने वाला कोई नहीं होता। खदानों में काम करने के दौरान सुरक्षा ऑडिट की खानापूर्ति केवल कागजों पर की जाती है, जबकि जमीनी हकीकत आज सुमित्रा की मौत के रूप में सामने आई है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासन और खनिज विभाग की मिलीभगत से यहाँ नियमों के विपरीत काम हो रहा है। अगर समय रहते लटकते हुए पत्थरों को हटाया गया होता या खदान की दीवारों को सही आकार दिया गया होता, तो आज एक मासूम महिला की जान नहीं जाती।
सुमित्रा साकेत की मौत केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि व्यवस्था की विफलता का परिणाम है। क्या प्रशासन उन खनिज माफियाओं पर लगाम कसेगा जो चंद रुपयों के लिए इंसानी जान से खेल रहे हैं? क्या सुमित्रा के परिवार को उचित मुआवजा और न्याय मिल पाएगा? यह घटना एक चेतावनी है कि यदि अब भी खनन क्षेत्रों में सुरक्षा और नियमों को लेकर सख्ती नहीं बरती गई, तो आने वाले समय में ऐसे और भी कई बेगुनाह मजदूर इन खदानों की भेंट चढ़ जाएंगे। फिलहाल पूरे बैजनाथ गांव में सन्नाटा है और ग्रामीण खदान बंद करने तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
