MP News; SP के वीडियो कांफ्रेसिंग में जोर – जोर से हस पड़ ASI, पुलिस अधीक्षक ने कर दिया सस्पेंड
बालाघाट जिले में प्रशासनिक अनुशासन को लेकर एक सख्त कार्रवाई सामने आई है, जहां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान अनुचित व्यवहार के कारण एक पुलिस कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। यह कार्रवाई उस समय की गई जब सीएम हेल्पलाइन में लंबित शिकायतों की समीक्षा की जा रही थी।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 17 अप्रैल 2026 को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सीएम हेल्पलाइन में लंबित मामलों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई थी। इस दौरान थाना कोतवाली से उप निरीक्षक संजय किरार से लंबित शिकायतों के संबंध में जानकारी ली जा रही थी। इसी बीच उनके मोबाइल वीडियो में कार्यवाहक सहायक उपनिरीक्षक (सउनि) रामकिशोर रहांगडाले हंसते हुए दिखाई दिए।
बैठक के दौरान जब रामकिशोर रहांगडाले से उनके हंसने का कारण पूछा गया, तो वे कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इस व्यवहार को वरिष्ठ अधिकारियों ने गंभीरता से लिया और इसे अनुशासनहीनता का स्पष्ट उदाहरण माना गया।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद थाना प्रभारी कोतवाली से भी स्पष्टीकरण लिया गया। उन्होंने भी माना कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग जैसे गंभीर और आधिकारिक मंच पर बिना किसी कारण के हंसना अनुचित है और यह पुलिस विभाग की गरिमा के विपरीत है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल विभागीय कार्रवाई शुरू की गई। आदेश जारी करते हुए कार्यवाहक सउनि रामकिशोर रहांगडाले को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उन्हें रक्षित केन्द्र बालाघाट से संबद्ध किया गया है।
निलंबन आदेश में स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि संबंधित अधिकारी रक्षित केन्द्र में प्रत्येक गणना (परेड/हाजिरी) में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। इस व्यवस्था को सुनिश्चित करना रक्षित निरीक्षक की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की गई है।
इसके अलावा, निलंबित अधिकारी को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि वे बिना सक्षम अधिकारी (अधोहस्ताक्षरकर्ता) की लिखित अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। नियमों के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान उन्हें जीवन निर्वाह भत्ता (subsistence allowance) प्रदान किया जाएगा।
प्रशासन की इस कार्रवाई को विभाग में अनुशासन बनाए रखने के लिए एक सख्त संदेश के रूप में देखा जा रहा है। अधिकारियों का मानना है कि सरकारी कार्यों के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनुचित आचरण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, चाहे वह कितना ही छोटा क्यों न लगे।
यह घटना इस बात को भी दर्शाती है कि वर्तमान समय में डिजिटल माध्यमों से होने वाली बैठकों में भी उतनी ही गंभीरता और अनुशासन अपेक्षित है, जितना कि भौतिक बैठकों में होता है। प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि भविष्य में इस प्रकार की किसी भी लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
