Maihar news: मौत के जबड़े से खींच लाई खाकी: मैहर स्टेशन पर फरिश्ता बने रेल पुलिस के जवान
Maihar news: एमपी में बुधवार को मैहर रेलवे स्टेशन एक भयावह हादसे का गवाह बनते-बनते रह गया। रीवा से नागपुर (इतवारी) जा रही एक्सप्रेस ट्रेन में चढ़ने की जद्दोजहद एक महिला के लिए काल बन सकती थी, लेकिन वहां तैनात आरक्षकों की बिजली जैसी फुर्ती ने मौत को मात दे दी।
प्लेटफॉर्म और पटरी के बीच फंसी सांसे
घटना ट्रेन संख्या 11754 रीवा-इतवारी एक्सप्रेस की है। ट्रेन स्टेशन से रवाना हो ही रही थी कि छिंदवाड़ा जिले के गौरैया निवासी योगिता श्रीवास (38 वर्ष) ने चलते कोच में चढ़ने की कोशिश की। ट्रेन की रफ्तार और पैर फिसलने के कारण वह अपना संतुलन खो बैठीं।
अगले ही पल वह खौफनाक मंजर सामने था—महिला का आधा शरीर प्लेटफॉर्म और चलती ट्रेन के बीच के जानलेवा गैप की ओर जा गिरा। प्लेटफॉर्म पर मौजूद यात्रियों की चीखें निकल गईं।
‘देवदूत’ बनकर आए आरक्षक
जब मौत और जिंदगी के बीच चंद सेकंड का फासला बचा था, तभी ड्यूटी पर तैनात जीआरपी आरक्षक दिनेश कुमार पटेल और
आरपीएफ आरक्षक प्रमोद मिश्रा ने अदम्य साहस का परिचय दिया।
अपनी जान की परवाह किए बिना दोनों जवानों ने झपट्टा मारकर महिला को ट्रेन के नीचे जाने से ठीक पहले बाहर खींच लिया।
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो अगर आरक्षकों की प्रतिक्रिया में एक सेकंड की भी देरी होती, तो महिला ट्रेन के पहियों के नीचे होती। यह किसी चमत्कार से कम नहीं था।”
हादसे के बाद महिला को सुरक्षित बचा लिया गया। हालांकि वह इस घटना से बेहद सदमे में थीं, लेकिन उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई है। रेलवे प्रशासन ने इन जांबाज जवानों की तत्परता की सराहना की है, साथ ही यात्रियों के लिए सख्त हिदायत जारी की है:
चंद मिनटों की बचत के लिए अपनी जिंदगी दांव पर न लगाएं।
ट्रेन और प्लेटफॉर्म के बीच का हिस्सा बेहद खतरनाक होता है।
सतर्कता ही बचाव है ट्रेन छूटने की स्थिति में अगले स्टेशन का विकल्प चुनें, जोखिम न लें।
इस बहादुरी भरे कार्य ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वर्दी में तैनात ये जवान न केवल सुरक्षा, बल्कि मानवता के भी सच्चे रक्षक हैं।
