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Rewa news: खाकी का ‘लुका-छिपी’ खेल: जब पुलिस ही हो गई पुलिस की नजरों में ‘फरार’

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Rewa news: न्याय के कठघरे में ‘खाकी’: मनगवां थाने के पुलिसकर्मी खुद की नजरों में ‘लापता’, कोर्ट के वारंट बेअसर आरोपी को जमानत ना मिले इसलिए पुलिस गवाह गायब, कानून की रक्षा करने वाली पुलिस जब खुद कानून से भागने लगे, तो न्याय व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। मनगवां थाने का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जहाँ पुलिस विभाग पिछले 6 महीनों से अपने ही उन कर्मचारियों को ‘तलाश’ नहीं पा रहा है, जो थाने में ही बैठकर ड्यूटी कर रहे हैं। मामला अमित सिंह रघुराजगढ़ से जुड़ा है, जिसमें न्यायालय द्वारा बार-बार गिरफ्तारी वारंट जारी करने के बाद भी पुलिस तामीली करने में नाकाम रही है।

केस डायरी जहरीली शराब और पुलिस की गवाही

नवंबर 2025 में मनिकवार चौकी पुलिस ने अमित सिंह को जहरीली शराब के साथ पकड़ने का दावा किया था। पुलिस ने आबकारी अधिनियम की धारा 49-ए के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को जेल भेजा और चालान पेश किया। इस केस की खास बात यह है कि इसमें सभी गवाह पुलिसकर्मी विजय यादव, रवि एवं अन्य ही हैं, जिन्हें हमराह स्टाफ बताया गया था।

2 कि.मी का फासला तय करने में लगे 6 महीने

मनगवां मजिस्ट्रेट कोर्ट और थाने के बीच की दूरी महज 2 किलोमीटर है। ट्रायल शुरू होने के बाद से कोर्ट लगातार इन पुलिसिया गवाहों को तलब कर रहा है। गवाहों के उपस्थित न होने पर माननीय न्यायालय ने उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किए और थाना प्रभारी को तामीली के निर्देश दिए। नियमानुसार, वारंट की रिपोर्ट 15 दिनों में कोर्ट को देनी होती है, लेकिन 6 महीने बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

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https://youtu.be/11jYbtMDoM0

बड़ा सवाल: ड्यूटी पर तैनात गवाह ‘फरार’ कैसे

हैरानी की बात यह है कि जिन पुलिसकर्मियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी हैं, वे प्रतिदिन थाने में अपनी आमद दे रहे हैं और सरकारी कामकाज निपटा रहे हैं। लेकिन जब बात कोर्ट के वारंट की तामीली की आती है, तो पुलिस रिकॉर्ड में वे नहीं मिलते। 25 नवंबर 2025 से शुरू हुआ यह ‘लुका-छिपी’ का खेल अप्रैल 2026 मल के अंत तक जारी है।

न्याय में देरी की साजिश

पुलिसकर्मियों द्वारा गवाही से बचना सीधे तौर पर न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है। यदि गवाह समय पर उपस्थित नहीं होते, तो मामला लंबा खिंचता है आरोपी अमित सिंह की हाई कोर्ट से जमानत भी नहीं हो पा रही है अगर पुलिसकर्मी न्यायालय में तलब होकर गवाही दे दे तो हाई कोर्ट से आरोपी की जमानत हो जाए मगर पुलिसकर्मी इसी वजह कोर्ट में पेश होकर बयान नहीं दे रहे हैं सवाल यह उठता है कि क्या थाना प्रभारी अपने ही मातहतों को बचा रहे हैं या फिर न्यायालय के आदेशों को हल्के में लिया जा रहा है?

“जब पुलिस ही वारंट की तामीली नहीं करेगी, तो आम अपराधी से कानून का डर खत्म हो जाएगा। यह सीधे तौर पर न्यायालय की अवमानना का मामला है।

अब देखना यह है कि रीवा पुलिस अधीक्षक इस मामले में क्या संज्ञान लेते हैं। क्या पुलिसकर्मी कोर्ट में पेश होंगे या मनगवां पुलिस की यह ‘लापरवाही’ जारी रहेगी?

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