Rewa News; रीवा में आज सूर्य ढलने के बाद तहसीलदार – नायब तहसीलदार हो सकते हैं सस्पेंड, कलेक्टर के अल्टीमेटम से दहशत

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रीवा: जिला मुख्यालय में आयोजित जनसुनवाई इस बार सख्ती, जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई। कलेक्टर ने स्पष्ट संदेश दिया कि अब सिर्फ आवेदन लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि हर शिकायत का समयबद्ध और जमीनी समाधान जरूरी है। वर्षों से लंबित मामलों और अधिकारियों की लापरवाही पर कलेक्टर का गुस्सा खुलकर सामने आया और कई मामलों में मौके पर ही सख्त कार्रवाई की गई।

तहसीलदार-नायब तहसीलदार को सख्त अल्टीमेटम Rewa News

जनसुनवाई के दौरान सबसे चर्चित मामला ग्राम गढ़वा (कनौजा) से सामने आया। शिकायतकर्ता राम शिरोमणि मिश्रा ने बताया कि गांव में स्थित शासकीय हैंडपंप पर दबंगों ने दीवार बनाकर कब्जा कर लिया है, जिससे आसपास के लोगों को पानी के लिए भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

फरियादी ने यह भी बताया कि इस मामले की शिकायत कई बार तहसीलदार और नायब तहसीलदार से की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला, कार्रवाई नहीं हुई।

इस पर कलेक्टर ने कड़ा रुख अपनाते हुए मौके पर मौजूद तहसीलदार और नायब तहसीलदार को जमकर फटकार लगाई और साफ शब्दों में आदेश दिया:

“आपको सूरज ढलने तक का समय दिया जा रहा है। आज ही दीवार गिरनी चाहिए और हैंडपंप आम जनता के लिए मुक्त होना चाहिए। अगर शाम तक कार्रवाई नहीं हुई, तो सस्पेंशन के लिए तैयार रहें।”

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कलेक्टर के इस अल्टीमेटम के बाद प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और तत्काल कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई।

पेंशन और GPF मामले में बड़ी कार्रवाई Rewa News

जनसुनवाई में जिला शिक्षा केंद्र से जुड़ा एक गंभीर मामला भी सामने आया। फरियादी जितेंद्र सिंह ने शिकायत की कि उन्होंने पांच बार आवेदन देने के बावजूद उनकी भविष्य निधि (GPF) राशि जमा नहीं की गई, जिसके कारण उनकी पेंशन अटकी हुई है।

इस लापरवाही को गंभीर मानते हुए कलेक्टर ने संबंधित बाबू को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए। साथ ही संबंधित डीपीसी (DPC) के खिलाफ भी अनुशासनात्मक कार्रवाई करने को कहा।

कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि कर्मचारियों के अधिकारों के साथ खिलवाड़ किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

दो बाबुओं पर गिरी निलंबन की गाज Rewa News

जनसुनवाई के दौरान नामांतरण, अनुकंपा नियुक्ति और अन्य महत्वपूर्ण मामलों में फाइलें दबाकर बैठने की शिकायतें भी सामने आईं। जांच के बाद कलेक्टर ने ऐसे दो बाबुओं को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।

उन्होंने कहा कि आम जनता के कामों में देरी करना और फाइलों को जानबूझकर लंबित रखना गंभीर लापरवाही है, जिसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इस कार्रवाई ने साफ संकेत दिया कि अब प्रशासन में काम नहीं करने वालों के लिए कोई जगह नहीं है।

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अनुपस्थित अधिकारियों पर भी कार्रवाई

कलेक्टर ने जनसुनवाई में अनुपस्थित रहने वाले अधिकारियों पर भी सख्ती दिखाई। ड्यूटी से नदारद पाए गए दो अधिकारियों का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने कहा कि जनसुनवाई शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और इसमें अनुपस्थित रहना गंभीर अनुशासनहीनता मानी जाएगी।

“सरकारी संपत्ति पर कब्जा बर्दाश्त नहीं”

हैंडपंप मामले पर कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यह केवल पानी की सुविधा का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह आम जनता के अधिकारों और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा मामला है।

उन्होंने कहा कि शासन की संपत्ति पर कब्जा करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और इसमें लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को भी जिम्मेदार माना जाएगा।

कलेक्टर ने सभी राजस्व अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे मामलों की पहचान कर तुरंत कार्रवाई करें।

जनसुनवाई में आए सैकड़ों आवेदन

इस जनसुनवाई में करीब 525 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें राजस्व, शिक्षा, सामाजिक न्याय और अन्य विभागों से जुड़े मामले शामिल थे। कलेक्टर ने प्रत्येक विभाग की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी शिकायतों का समयसीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि अब हर आवेदन की मॉनिटरिंग की जाएगी और अनावश्यक देरी पर सीधे कार्रवाई होगी।

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जनता में जगा भरोसा

कलेक्टर की इस सख्त कार्यशैली का असर जनसुनवाई में साफ नजर आया। वर्षों से परेशान फरियादियों को पहली बार लगा कि उनकी समस्याओं पर गंभीरता से सुनवाई हो रही है और मौके पर ही समाधान मिल रहा है।

कई लोगों ने कहा कि अब प्रशासन पर उनका भरोसा बढ़ा है और उन्हें उम्मीद है कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान होगा।

बदलती प्रशासनिक कार्यशैली

रीवा में लंबे समय से चली आ रही ‘सिर्फ आवेदन लेने’ की परंपरा अब बदलती नजर आ रही है। कलेक्टर के एक्शन मोड ने यह संकेत दे दिया है कि अब परिणाम देने पर जोर होगा।

“सूरज ढलने तक का वक्त” जैसे सख्त निर्देशों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब अधिकारियों को जमीन पर काम करना ही होगा, वरना कार्रवाई तय है।

रीवा की यह जनसुनवाई प्रशासनिक सख्ती और जवाबदेही का मजबूत उदाहरण बनकर उभरी है। तहसीलदार और नायब तहसीलदार को दिया गया अल्टीमेटम, दो बाबुओं का निलंबन और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई ये सभी कदम यह दिखाते हैं कि अब व्यवस्था बदल रही है।

अगर यही सख्ती आगे भी जारी रहती है, तो न केवल सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आम जनता को भी समय पर न्याय मिल सकेगा।

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